सोशल मीडिया नहीं, मास मीडिया कहिए जनाब

इस हफ्ते फेसबुक के दस साल पूरे होने का जश्‍न मनाया जा रहा है. फेसबुक की इंडिया चीफ कृतिगा रेड्डी का कहना है कि यह साल एफबी इंडिया के लिए अहम होगा. रेड्डी मानती हैं कि भारत मार्क जकरबर्ग की उम्‍मीदों पर खरा उतरेगा. 42 साल की रेड्डी चाहती हैं कि सोशल मीडिया की जगह इसे मास मीडिया कहा जाना चाहिए. खासकर भारतीय कंपनियां फेसबुक को सोशल मीडिया नहीं, बल्कि मास मीडिया प्लैटफॉर्म के रूप में देखें.

मार्क जकरबर्ग भारत का एक प्रमुख बाजार मानते हैं. भारत में एफबी के करीब 9 करोड़ 30 लाख यूजर्स हैं. दिसंबर 2013 तक के आंकड़ों के अनुसार, इनमें से 7 करोड़ 50 लाख यूजर्स मोबाइल के जरिए एफबी पर थे. अमेरिका के बाद भारत इसका दूसरा सबसे बड़ा यूजर बेस है. मोबाइल प्लैटफॉर्म को ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने की एफबी की योजना को देखते हुए लग रहा है कि भारत में इसे सही मंच मिल गया है.

चार साल पहले जब रेड्डी ने कंपनी ज्‍वॉइन किया था उस समय भारत में इसके यूजर 80 लाख थे. भारत में हर महीने एफबी से करीब 20 लाख लोग जुड़ रहे हैं. यह 9 भाषाओं में अपनी सेवा दे रही है. रेड्डी के सामने अगला लक्ष्‍य इसके यूजर बेस को 10 करोड़ तक पहुंचाना है. रेड्डी ने कहा कि मुझे पता है कि अब से 18 महीने बाद मीडिया लैंडस्केप अलग होगा और इस बदलाव को रफ्तार देने में फेसबुक की अहम भूमिका होगी. उन्होंने कहा कि तमाम कंपनियां और ब्रैंड्स इस प्लैटफॉर्म को अपनाएंगे.
 

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