सोशल मीडिया पर चल रहे ट्रायल का गंभीर नतीजा है खुर्शीद अनवर का जाना

Dhananjay Singh : खुर्शीद अनवर Khurshid Anwar साहब के लेख कुछ नए लोगों को पढ़ने के लिए देता था तो दोस्त कहते थे कि एक मुसलमान होकर भी मजहबी कट्टरपंथियों के खिलाफ ऐसे कैसे लिख लेते हैं,एक जहीन इंसान थे. उनका यादों का कारवां कोई भूल नहीं सकता. फेसबुक पर ही उनके खिलाफ मुहिम शुरू हुई. कुछ चर्चाओं में देखा था कि उनका सर कलम करने की भी बात होती थी.

उत्तराखंड त्रासदी के अवसर पर गठित कुछ युवाओं के झुण्ड के बीच से एक खबर उछली जो किसी यौन अपराध से जुडी हुई थी, जिसमें अनवर साहब का नाम था…अभी कल रात इण्डिया टीवी ने इस पर खबर चलाई और आज उनके आत्महत्या की खबर आ गई…… ये सोशल मीडिया पर चल रहे ट्रायल का एक गंभीर नतीजा है…..हकीकत क्या है अब तो खुदा जाने

Santosh Singh उनके बैलेंस्ड लेखन से मैं भी बहुत प्रभावित था…और काफी कुछ नया जाना और समझा उनसे ..बाकी इस मामले पर क्या कहा जाये…कुछ नहीं कहा जा सकता …एक त्रासदी जैसा ही है…

Dhananjay Singh उनका कोई भी लेख अपने आप में नायाब लगता था,चाहे गाँव की याद के बहाने हिन्दू -मुस्लिम की साझा विरासत की बात या अलकायदा के बहाने चरमपंथ पर उनके प्रहार….. इतने कमजोर नहीं लगते थे कि आत्महत्या करलें,वैसे तमाम लोग ये भी मानते हैं की कायर आत्महत्या कर ही नहीं सकते….खैर जो भी हो,अदालत से पहले फेसबुक पर ही उनको निपटाने की मुहीम चलाने वालों से सवाल जरुर पूछे जाने चाहिए क्योंकि वो इस आभासी दुनिया में ही ट्रायल के शिकार हो गए….. सवाल ये भी है कि अब किया क्या जा सकता है?

Alok Rai अब कम। से कम फेसबुक ट्रायल से बचा जा सकता है भविष्य में..

धनंजय सिंह के फेसबुक वॉल से.

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