स्टिंग प्रकरण पर जागरण में छपी एकतरफा खबर से खफा पत्रकार पुष्प शर्मा ने जारी किया बयान

पत्रकार पुष्प शर्मा ने एक स्टिंग किया जिसके बाद भाजपा खेमे में खलबली मच गई. इस प्रकरण पर दैनिक जागरण में एक आर्टकिल प्रकाशित हुआ जिसके बाद पुष्प शर्मा ने अपना पक्ष लिखकर भड़ास4मीडिया को भेजा. पहले जागरण में प्रकाशित खबर पढ़ें फिर उसके ठीक नीचे पुष्प शर्मा का बयान.

अमित शाह का मुकदमा प्रभावित करने की साजिश

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली

तुलसीराम प्रजापति फर्जी मुठभेड़ मामले में भाजपा महासचिव अमित शाह के खिलाफ चल रही अदालती कार्यवाही को प्रभावित करने की साजिश रचने के ताजा स्टिंग ने सियासी माहौल गरमा दिया है। एक स्टिंग ऑपरेशन में भाजपा सांसद प्रकाश जावड़ेकर व भूपेंद्र यादव और संगठन महामंत्री रामलाल को घेरा गया है। इस स्टिंग के जरिये आरोप लगाया गया है कि अमित शाह को बचाने के लिए तुलसीराम की मां को भ्रमित कर उनसे कोरे वकालतनामों पर अंगूठे का निशान ले लिया गया ताकि समय आने पर उनका दुरुपयोग किया जा सके। खुद को जावड़ेकर का विश्वस्त बताने वाले पुष्प कुमार शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर पूरी घटना की सीबीआइ जांच और अमित शाह को मिली जमानत रद करने की मांग की है।

खुद को स्वतंत्र पत्रकार बताने वाले पुष्प कुमार ने रिकार्डेड वीडियो सीडी के जरिये आरोप लगाया कि जावड़ेकर और भूपेंद्र ने उन्हें जिम्मा दिया था कि वह तुलसीराम की मां नर्मदा बाई से संपर्क करें। लगभग एक साल पहले जावड़ेकर के दिल्ली आवास पर भोजन के दौरान तीनों की बात हुई और पुष्प को जिम्मा सौंपा गया। भूपेंद्र के संपर्क का एक कनिष्ठ वकील गोविंद पुरोहित साथ गया था और वहां नर्मदा बाई से कई वकालतनामों पर अंगूठे का निशान ले लिया गया।

प्रेस कांफ्रेंस में पुष्प पत्रकारों के इस सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए कि वह खुद इस पूरी कवायद में क्यों शामिल थे? उन्होंने कहा, मुझे कहा गया था कि नर्मदा बाई को क्षतिपूर्ति दी जाएगी। सीडी में साफ दिखाया गया है कि पुष्प ने खुद देखा था कि वह वकालतनामा था। क्षतिपूर्ति के लिए किसी वकालतनामे की जरूरत नहीं होती। बहरहाल, पुष्प ने कहा कि जावड़ेकर के अनुसार पूरी घटना की जानकारी गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह को भी है।

पुष्प कुमार के समर्थन में आए वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा, भूपेंद्र यादव, अमित शाह के बचाव पक्ष में उतरे वकीलों की टीम में शामिल हैं। ऐसे में कोरे वकालतनामे पर हस्ताक्षर कराने का स्पष्ट संकेत है कि समय आने पर उसका दुरुपयोग किया जाएगा। जब वक्त आएगा तो नर्मदा बाई की ओर से भी वकील वही कहेगा जो बचाव पक्ष कहेगा। यानी अमित शाह के खिलाफ पूरे केस पर नियंत्रण की कोशिश की गई है। पुष्प ने कहा कि इस पूरी कवायद की जानकारी संगठन महामंत्री रामलाल को भी थी और जब उनसे संपर्क साधा गया तो रामलाल ने निष्ठा से काम करने की बात कही थी।

सीडी में इंदौर में रहने वाले वकील मनोज द्विवेदी और उज्जैन में रहने वाले भाजपा नेता मोहन यादव का भी नाम आया है। पुष्प ने आरोप लगाया कि पूरी कवायद में उन्हें भी भूमिका निभानी थी। पुष्प के मुताबिक जावड़ेकर से उनकी पांच-छह साल पुरानी दोस्ती थी जबकि नर्मदा बाई से भी उनका अच्छा परिचय था। इसीलिए उनका इस्तेमाल किया गया था। वह नहीं जानते थे कि उनसे गलत काम करवाया जा रहा है। बात में इसकी भनक लगने पर उन्होंने स्टिंग शुरू किया था। भाजपा सांसद प्रकाश जावड़ेकर कहते हैं- ''मुझे जानकारी मिली है कि किसी ने मुझपर आरोप लगाया है। वह सुप्रीम कोर्ट भी गया है। तो कोर्ट में ही जवाब देंगे। लेकिन, एक बात बता दूं कि सबकुछ कांग्रेस के डर्टी-गेम डिपार्टमेंट का काम है। चुनाव का समय है, इस तरह की चीजें आती रहेंगी।''


उपरोक्त खबर पर ये रहा पुष्प शर्मा का बयान…

Dear readers

Fact is I m fighting against Baba Ramdev , Narender Modi and Amit Shah so entire Saffron family and their sympathisers are disturbed. Now they have come up with new story I m backed by anti BJP force in India. Selected few journalists in general , cover story as per their political shcool of thought and loyality which yields profit. Larger aspect of this is called "Paid Journalism". Jagran is involved in same against me. In order to appease their political masters jagran is creating rumours against my work in public.

When they find nothing then they talk about one FIR (2009 Case ) against me which is just an excuse but the reality is in last four years Respected Delhi police didnt bring sole witness of this case. Same thing happned when Indian media kept on projecting Fake encounters of Gujrat as Real encounters. Hardly Indian journalists read the chargesheet and pen down planted dots. As journalist we have forgotten to raise questions, ask counter questions on police theory.
FIR doesnt make someone wrong unless its proved in court.

Journalist and an investigative journalist have basic difference.

A journalist comes with Police theory and starts jumping in air as if he has got life time achievement award at the same time Investigative journalist starts his work by dumping police theory thats why there is always an exceptional journalist behind opening up fake encounters, bogus ATS theoris where so many Muslims were jailed just because of religion.

Rent a riot expose , Swami Shankerdev missing case , Guru of Baba Ramdev and now BJP Sting exposes are not simple stories. I went in side jails to conduct sting. Pramod muthalik had filled cases against me in 27 districts across Karnataka. But finally Sri Ram Sene is exposed.

How many media men dare to challenge Ramdev and Modi? But because I dared so now people in paid media are giving twist to my work that journalist is backed by Congress or he is pro

पुष्प शर्मा
पुष्प शर्मा
congress etc.

Journalism of assumptions and exposes with proofs have wide diffrence. Jagran is journalism of assumption which can create sensation and can try to attack on my character but case is in Supreme court now. SC ST Commission has sent letter along with my work (CD) to CBI but still jagran due to its pro BJP mentality is propagating false news.

Filling an FIR and sueing Jagran in court is the only answer to such bad names in Indian media.

thanks

pushp


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