स्त्री और दलित विमर्श के प्रवर्तक थे राजेंद्र यादव

झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के जनसंचार और पत्रकारिता विभाग में बुधवार को अपराह्न बाद हुई एक शोकसभा में हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार राजेंद्र यादव को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई. वक्ताओं ने उन्हें हिंदी समाज में स्त्री और दलित विमर्श का प्रवर्तक बताते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए.
 
विभागाध्यक्ष डा. सी.पी. पैन्यूली की अध्यक्षता में हुई सभा में हिंदी साहित्य में राजेंद्र यादव के योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई. वक्ताओं ने कहा कि राजेंद्र यादव ने साहित्य की तमाम बहसों विवादों और मतभेदों में से रचना संसार के लिए एक उदार लोकतांत्रिक स्थान बनाया. तमाम नए सामाजिक आंदोलनों का न केवल उन्होंने समर्थन किया बल्कि उनकी अगुआई भी की. कई नये लेखकों को उन्होंने शुरूआती मंच भी दिया. सभा में प्रवक्ता सतीश साहनी, जय सिंह, उमेश शुक्ल आदि ने राजेंद्र यादव के कृतित्व और व्यक्तित्व के विविध पहलुओं का उल्लेख करते हुए उन्हें महान प्रयोगधर्मी बताया. वक्ताओं ने उन्हें अनूठा संपादक बताते हुए कहा कि उनकी कमी समाज को हमेशा खलती रहेगी. सभा में दो मिनट का मौन रखा गया.

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