हमलावर को मौके पर ही जान से मार डालो, वरना गनर विहीन राजनीति हमेशा के लिए फेल हो जाएगी

Rajiv Nayan Bahuguna : मैं फिर दोहराना चाहता हूँ कि अरविन्द केजरीवाल पर हो रहे अबाध हमले भारतीय रजनीति को गतानुगतिक बनाये रखने की साजिश है। उसकी सहज सरल चर्या कोंग्रेस भाजपा दोनों को चुभ रही है। इनके नेता स्टेट्स सिम्बल के तौर पर गनर रखते हैं, जबकि उन्हें राह चलता कुत्ता भी काटने को तैयार नहीं। मूतना कम और हिलाना ज़्यादा। हमलावर को मौके पर ही जान से मार डालो, वरना गनर विहीन राजनीति हमेशा के लिए फेल हो जाएगी।

Vineet Kumar : केजरीवाल पर हाथ उठाने की घटना को आप मीडियाकर्मी जिस मसाले और चटकारे के साथ पेश कर रहे हो न,कभी अपने आकाओं को कहो जो तुम्हें TRP के बताशे बनाने के हुक्म दे रहे,आप भी इसी तरह खुलेआम सर्फ 2 घंटे घूमकर देखिये, 10 मिनट में शक्ल नई दिल्ली रेलवे स्टेशन बना देंगे, कुछ तो बचा लो यार…

Mohammad Anas : अरविन्द केजरीवाल के गाल पर थप्पड़ नहीं पड़ा है, ये थप्पड़ देश की जर्जर और ढहती हुई व्यवस्था को सही करने वाले लोगों पर एक साथ पड़ा है. अहिंसा में विश्वास रखने वाले लोगों को थप्पड़ का बदला थप्पड़ से नहीं बल्कि ई वी एम मशीन पर बटन दबा कर देना चाहिए. मैं आम आदमी पार्टी का समर्थक नहीं हूं पर अरविन्द केजरीवाल के साथ किए जा रहे बुरे बर्ताव से मन व्यथित है और दुखी भी. लोकतांत्रिक प्रणाली में बाहुबल और ठसक के बलबूते राजनीति करने वाले लोग हैं तो दूसरी तरफ सादगी और सच्चाई के दीवाने मुट्ठी भर लोग. तय आपको करना है कि किसके साथ रहना है. ध्यान रहे, आपका फैसला थप्पड़ मारने वाले और खाने वाले में से किसी एक के पक्ष में ही जा सकता है. उसके बाद का परिणाम व्यापक और दूरगामी होगा.

पत्रकार राजीव नयन बहुगुणा, विनीत कुमार और मोहम्मद अनस के फेसबुक वॉल से.


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