हमारा मीडिया निष्पक्ष है! सच्चीमुच्ची!!

Nadim S. Akhter :  सच है, इस देश में मीडिया निष्पक्ष है. नरेंद्र मोदी की गुजरात सरकार रोजाना 11 रुपये से ज्यादा कमाने वाले को अमीर करार देती है, गरीबों का मजाक उड़ाती है लेकिन मीडिया की चुप्पी हमें चौंकाती नहीं. कोई नहीं पूछता कि कांग्रेस के रशीद मसूद तो 5 रुपये वाली थाली ले आए थे, नरेंद्र मोदी 5 रुपये का ढोकला कहां से लाएंगे ??? हां, जब कांग्रेस वाली केंद्र सरकार के योजना आयोग ने ऐसा बेतुका आंकड़ा दिया था, गरीबों का उपहास किया था तो मीडिया ने आसमान सिर पर उठा लिया था. खबर खूब बिकी थी.

गुजरात के हजारों किसान सरकार द्वारा जबरन जमीन हड़पने और मुआवजा नहीं दिए जाने को लेकर प्रदर्शन करते हैं, सड़क पर उतरते हैं लेकिन राष्ट्रीय मीडिया में इस पर बहस नहीं होती. खबर गायब कर दी जाती है. लेकिन केजरीवाल सरकार अगर बिजली-पानी के दाम घटाती है तो कई दिनों तक उसके परिणामों पर चर्चा चलती रहती है.

भ्रष्टाचार को लेकर बड़े-बड़े सम्पादक टीवी स्क्रीन पर उपदेश देते दिखते हैं लेकिन जब भ्रष्टाचार के आरोप में पार्टी छोड़ने को मजबूर हुए येदियुरप्पा दोबारा बीजेपी ज्वाइन करते हैं तो ये खबर हेडलाइन नहीं बनती. मोदी की सरकार एक महिला की जासूसी कराती है, पूरी सरकारी मशीनरी के सहयोग से. बहुत कम मीडिया संस्थानों को इसमें आम नागरिकों की निजता का हनन मालूम पड़ता है. वो इस खबर को कैम्पेन बनाकर इंसाफ की दुहाई नहीं देते. चुप्पी साध लेते हैं. बुलेट की स्पीड से खबर निकल जाती है, फिर किसी को कुछ याद नहीं.

आदर्श घोटाले पर हेडलाइन बनाने वाले मीडिया को कांग्रेस के एक ताकतवर नेता के जमीन घपले पर सांप सूंघ जाता है. इस पूर्व पत्रकार कम नेता महोदय ने मुंबई में एक जमीन कौड़ियों के भाव ले ली लेकिन उसका इस्तेमाल नेक काम में करने की बजाय मुनाफा कमाने के लिए किया. यहां भ्रष्टाचार खबर नहीं बनती, खबर मैनेज हो जाती है. बाद में मंत्री महोदय धीरे से जमीन से पीछा छुड़ाकर पतली गली से कट लेते हैं. उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर नहीं किया जाता, मीडिया इसे मुद्दा नहीं बनाता.

ऐसे कई उदाहरण हैं, ये मानने के लिए कि इस देश का मीडिया निजी हाथों में जाकर पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष है. हम भारत के नागरिकों को मुगालते में रहने की तो आदत हो गई है, खुशफहमी में जीने में हर्ज ही क्या है. मुआं ये मीडिया ना होगा तो क्या सरकार नहीं चलेगी, लोकतंत्र नहीं चलेगा, देश नहीं चलेगा??? सम्राट अशोक और अकबर महान के समय भी तो मीडिया नहीं था, ना खबर बनती थी, ना छपती थी और ना ही दिखती थी. तो क्या उनका राजकाज नहीं चला?? जनता सुखी नहीं थी???

खामोख्वाह आप भी मीडिया के होने और उसके फल-प्रतिफल पर राय बनाए बैठे हैं. जो अखबार में नहीं छपता, टीवी पर नहीं दिखता, वह सोशल मीडिया पर छाता है. यहां किसी सम्पादक- रिपोर्टर और मीडिया संस्थान चलाने वाले किसी धनकुबेर की जरूरत नहीं पड़ती. यहां जनता ही आपस में खबरें बांटती और उसका छिद्रान्वेषण करती है. सबकुछ live.

भारत के छोटे शहरों और गांवों-कस्बों तक इंटरनेट की ताकत जाने दीजिए. फिर देखिएगा ये वैकल्पिक माध्यम क्या करता है. फिलहाल तो बिना किसी हू-हा के हम ये मानने के लिए तैयार हैं कि इस देश का मीडिया निष्पक्ष,पारदर्शी, संतुलित और संयमित है. सच में.

पत्रकार नदीम एस. अख्तर के फेसबुक वॉल से.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *