हम डीक्लास तो हो सकते हैं लेकिन डीकास्ट नहीं : शंभूनाथ शुक्ला

Shambhunath Shukla : मैं अनीश्वरवादी हूं, जातिवाद मैं नहीं मानता और मुझे एक ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने पर शर्म है। लेकिन दिक्कत यह है कि हम डीक्लास तो हो सकते हैं लेकिन डीकास्ट नहीं। शुक्ल का पुछल्ला मेरे साथ लगा ही रहेगा। मेरी किसी धर्म से कोई शत्रुता नहीं है। मुझे इस्लाम या क्रिश्चियनिटी से कोई गुरेज नहीं है। मेरे चौके में सभी की दखल है और मेरी पांत में सभी हैं। लेकिन मैं हिंदू हूं और हिंदू ही रहूंगा तथा मरूंगा भी एक हिंदू रहते हुए भी। हालांकि मुझे जलाया जाए अथवा दफनाया इस पर भी मुझे आपत्ति नहीं है।

मुझे अपने हिंदू होने के लिए किसी भाजपा अथवा आरएसएस या सुशीलकुमार शिंदे से प्रमाणपत्र नहीं चाहिए। मैं हिंदू इसलिए हूं क्योंकि यह किसी लकीर का फकीर नहीं है। यह व्यक्तियों और किताबों से ऊपर है। इसमें एक तरह की अराजकता है जो मुझे पसंद है। राजनीति में जो जगह प्रिंस क्रोपाटकिन की है धर्म में उसी जगह पर हिंदू हैं। व्यवस्था और बौद्धिकता आदमी-आदमी में लड़ाई कराती है जबकि प्रिंस क्रोपाटकिन का दर्शन उन्हें व्यवस्था से मुक्ति कराती है। हिंदू में अगर वैदिक हैं तो गोरख भी हैं। यह धर्म अत्यंत प्रगतिशील और अत्यंत प्रतिगामी है। इसीलिए मैं हिंदू हूं अपना रास्ता आप तय करिए।

वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ला के फेसबुक वॉल से.

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