हरदिल अजीज शख्स रामदुलारे की खुदकुशी और गरीबी का जुर्माना

Ramakant Roy : अलविदा रामदुलारे… हमारे विद्यालय, राजकीय इण्टर कालेज, कोन, सोनभद्र के कार्यालय सहयोगी (दफ्तरी) और हरदिल अजीज शख्स रामदुलारे ने 24 दिसम्बर, 2013 को अल-सुबह फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली. रामदुलारे बहुत ही कर्मठ और समर्पित कर्मचारी थे. वे हमेशा उपलब्ध रहते थे. किसी काम के लिए कभी भी मना नहीं करते थे. वे रात-दिन चौबीस घंटे तत्पर देखे जा सकते थे.

रामदुलारे की एक ख़ास विशिष्टता यह थी कि वे अपनी बात कहने के लिए जिन शब्दों का प्रयोग करते थे, उनका उनकी बात से कोई सम्बन्ध नहीं होता था, फिर भी सब उनकी बात समझ जाते थे. रहस्य, विपरित, सम्मलेन, परिस्थिति, जज़बात, जबरजस्ती आदि कई ऐसे शब्द थे जिनका वे समय-समय पर प्रयोग करते थे. उनको ठीक से सुनने पर कुछ नहीं समझा जा सकता था लेकिन यह उनकी आत्मीयता थी कि वे उट-पटांग शब्दों के साथ भी वह समझाने में सफल हो जाते थे, जो कहना चाहते थे.

रामदुलारे इतना झुकते थे कि विनम्रता भी शरमा जाये. वे बहुत मृदुभाषी थे. अपना प्रतिरोध भी वे बहुत मुलायमियत से जाहिर करते थे. बीते तीन महीनों से वे बहुत परेशान थे. उन्होंने लोन के लिए आवेदन किया था. वे रोज बैंक जाकर पता करते थे कि पैसा उनके खाते में आया या नहीं. बाद में मैंने उनके खाते में लेन-देन की सूचना एसएमएस द्वारा पाने की सुविधा एक्टिवेट करवा दी थी, तो वे रोज सुबह-शाम सन्देश की राह देखते थे. आज सुबह भी उन्होंने इस तरह का कोई सन्देश न पाकर घोर निराशा में आत्महत्या कर ली.

तीन महीने से उनका लोन क्यों पास नहीं हो रहा था, यह तो जिला विद्यालय निरीक्षक बताएँगे.. यह तस्वीर अभी दो-तीन दिन पहले विद्यालय में स्वेटर और ड्रेस वितरण के मौके पर आने वाले अतिथियों के स्वागत के लिए माला लेकर तैयार रामदुलारे की है. हममें से किसी को नहीं पता था कि हम चन्द दिन के बाद उनके पार्थिव शरीर पर फूल चढ़ाने को विवश होंगे..

अलविदा रामदुलारे!!


रमाकांत राय द्वारा अपने एफबी वॉल पर पोस्ट किए गए स्टेटस पर आए कुछ कमेंट इस प्रकार हैं…

Bipin Kumar Sharma इस दौर में आम इन्सान कुछ इसी तरह से लाचार हो गया है. क्या किया जाये! मुझे तो खुद पर भी बहुत भरोसा नहीं रहा है…
 
Ramakant Roy जीवन बहुत अनमोल है बिपिन भाई.. इस तरह आत्महत्या कर लेने को जायज नहीं ठहराया जा सकता लेकिन आम जन के लिए इसके अलावा कोई और चारा भी नहीं है…
 
Hareprakash Upadhyay ये हत्यारी परिस्थितियां….व्यवस्था और गंदे लोग सारी जीवंतताओं पर ही भारी नहीं पड़ रहे हैं बल्कि जान भी ले रहे हैं…रामदुलारे की आत्महत्या के जिम्मेदार लोगों को कठोर सजा मिलनी चाहिए….

Nirbhay Rai जाने कितने राम दुलारे राम को प्यारे हो रहे हैं, या घूटन महसूस कर रहे हैं। शायद कार्यालयों मे किसी प्रकार की जबाबदेही और पारदर्शिता का अभाव ही इस मौत का जिम्मेदार है। सिटिजन चार्टर लागू करवाने के लिए सडकों पर उतरना होगा।

श्याम गोपाल गुप्त बहुत दुःख हुआ भाई !खासकर आत्महत्या जैसी घटना ज्यादा तकलीफ़ देती है…

Shayak Alok इन्ही परिस्थितियों में हमारे यहाँ चतुर्थ श्रेणी की एक महिला कर्मचारी पागल हो गई .. यही व्यवस्था .. यही तंत्र .. जान दे दीजिये .. घुटते रहिये .. नक्सली हो जाईये .. पागल हो जाइये .. आपको एक आम कर्मचारी ज़िन्दगी भी नहीं देगी व्यवस्था …

आचार्य उमाशंकर सिंह परमार शिक्षा -व्यवस्था पर भाषण देने के लिये हमारे यू पी मे हर ऐरा गैरा राधाकृष्णन का अवतार बन जाता है . ……लेकिन शिक्षा विभाग मे कर्मचारियों का किस कदर शोषण होता है …किस प्रकार की तानाशाही की जाती है ….किस परिस्थितियों मे काम कराया जाता है ….क्या क्या काम कराये जाते हैं ….न तो मीडिया की नजर मे आता है न ही नेताओं की नजर मे और न ही राधाकृष्णन के अवतारों की नजर जाती है ….ऐसी घटनाये दिल दहला जाती हैं…

Mahendra Kumar बहुत ही दुखद, शायद इसी को गरीबी का जुर्माना कहते हैं….

Nooruddin Mohd Parvez रामदुलारे मुआफ करना…..हम वक़्त के शर्मनाक दौर से गुज़र रहे हैं….तुम्हारा बलिदान जाया नहीं जाएगा….

भूपत शूट बहुत दुखद. ना जाने ये लालफीताशाही कितनों की इस तरह जान लेगी.उन्हें श्रद्धाँजलि !

Umashankar Verma Gharib ki sunne wala koi nahi hai. Bade logo ka loan hota to 2 din me pass hota. Ye bahut dukhad hai aur hamare loktantra ke muh pe tamacha hai.

वीरेन्द्र सिंह वसिष्ठ भगवान स्व श्री रामदुलारे की दिवँगत आत्मा को शाँति दे एवँ उनके परिवार को इस अपूर्णीय क्षति को वहन करने की हिम्मत दे…

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