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हरदोई में नेतीगिरी करनी हो या पत्रकारिता, नरेश अग्रवाल को तेल लगाना पहले सीख लो

हरदोई के नक्शेबाज सपा नेता ने शहर के बड़का पत्रकारों में शुमार रखने वाले आमिर किरमानी को प्रेस वार्ता के दौरान खुले आम तमाम छोटे-बड़े पत्रकारों के सामने खूब छीछालेदर की। वहां पर मौजूद हरदोई मीडियाकर्मियों की जमकर फजीहत हुई। फिर भी हां में हां करने के साथ ही सभी मुंह ताकते रह गए। तमाम लोगों को बात नागवार गुजरी फिर भी सामने कुछ न बोल पाने के बाद गिले-शिकवे आपस में आज भी जारी हैं। दूसरों की आवाज उठाने वाले मीडियाकर्मी इनदिनों अपने साथी के अपमान का दर्द पी घूंट जी रहे हैं।

हरदोई के नक्शेबाज सपा नेता ने शहर के बड़का पत्रकारों में शुमार रखने वाले आमिर किरमानी को प्रेस वार्ता के दौरान खुले आम तमाम छोटे-बड़े पत्रकारों के सामने खूब छीछालेदर की। वहां पर मौजूद हरदोई मीडियाकर्मियों की जमकर फजीहत हुई। फिर भी हां में हां करने के साथ ही सभी मुंह ताकते रह गए। तमाम लोगों को बात नागवार गुजरी फिर भी सामने कुछ न बोल पाने के बाद गिले-शिकवे आपस में आज भी जारी हैं। दूसरों की आवाज उठाने वाले मीडियाकर्मी इनदिनों अपने साथी के अपमान का दर्द पी घूंट जी रहे हैं।

पूरा वाकया कुछ इस तरह था कि हरदोई के सपा नेता नरेश अग्रवाल ने इसी सप्ताह एक प्रेसवार्ता बुलाई थी। उसमें हरदोई प्रिन्ट मीडिया और इलेक्ट्रानिक मीडिया के लगभग सभी पत्रकार थे। पाली के समाचार की विस्तृत खबर न छापने पर अखबार नवीसों पर आंखे तरेरी। अमर उजाला के राजीव शुक्ला पर खबर बहुत अच्छी न छपने पर नाराजगी दिखाई। बाद में आमिर किरमानी को देखकर विफर पड़े। नेता की नाराजगी यह थी कि आमिर किरमानी पुलिस आफिस में क्यों चिपके रहते हैं। जब आमिर किरमानी ने जवाब दिया कि पुलिस से उनका 30 साल पुराना व्यवहार है तो नेता बोले व्यवहार घर में निभाओ। आमिर किरमानी के साथी इलेक्ट्रानिक मीडिया आलोक सिंह पर भी आंखें तिरछी रहीं।

वहां पर बैठे इलेक्ट्रानिक मीडिया से मुन्ना शुक्ला, प्रशान्त पाठक, सुनील अर्कवंशी और उनके तमाम साथी ऐसे मुंह लटकाए बैठे रहे जैसे द्रोपदी चीर हरण होते समय पांच पाण्डव बैठे होगें। मुन्ना शुक्ला लंबी चौड़ी हांकने में बहुत माहिर हैं। वहां पर उनकी घिग्घी बंध गई। प्रशान्त पाठक अपने हरदोई की पत्रकारिता और पत्रकार पर जाने क्या-क्या लिखते रहते हैं। अधिकारियों और नेताओं से भी खूब तू-तड़ाक करते वहां पर भीगी बिल्ली नजर आए। सुनील अर्कवंशी भी अपनी अकड़ नहीं दिखा सके। अपनी पत्रकार बिरादरी की फजीहत कराई और नाश्ता पानी करके निकल लिए।

हरदोई में नेतीगिरी करनी हो या पत्रकारिता, नरेश अग्रवाल को तेल लगाना पहले सीख लो। नौकरी में प्रमोशन और डिमोशन का रिमोट भी वह अपने पास रखता है। अगर जिन्दगी प्यारी हो तो कभी भी उसके खिलाफ एक लब्ज भी धोखे से ना लिखना नहीं तो पल झपकते ही अपराधी पीछे पड़ जाएंगे और ज्यादा उछले तो शोक सभा हो जाएगी। यहां हरदोई के पत्रकार कलम चलाना जानते हैं लेकिन उसकी स्याही नेता के इशारे पर शब्द उगलती है। शहर का हाल यह है तो कस्बे ब्लाक तहसील वालों की हालत क्या होगी।

मुस्लिमों की रैली कर नेता ने अपनी पीठ खूब थपथपाई… जरा आमिर किरमानी के दिल से पूंछो इस नेता ने उनसे क्या कहा ? यह तो सब लोग कहते हैं कि पुलिस से इनकी नजदीकियां हैं। स्टैन्डर्ड खर्च के लिए कुछ कमाई-धमाई हो जाती है। हरदोई के नेता कितने दूध के धुले हैं? आमिर किरमानी ही नहीं पूरी हरदोई की मीडिया नेता की चरण वन्दना कर रही है जिले में और भी नेता हैं… उनका नाम अखबारों में नहीं दिखता रोज… यही इकलौते नेता सभी अखबारों की सुर्खियां होते हैं।

अगर हम सभी को लगता है कि इस तरह की पत्रकारिता चाटुकारिता है, तो इस पर अपनी तगड़ी लेखनी सबको मिलकर चलानी चाहिए। इन पत्रकारों को भंडुवई त्याग कर पत्रकारिता के मानक के हिसाब से काम करने की जरूरत है। नेता के दबाव में पत्रकार सच्चाई को उजागर करना छोड़िए, अपनी बीती तक बताने में भी घबरा रहे हैं। नेता का क्या दबाव है पत्रकारों पर जिससे उनमें उनके सामने इतना खौफ है। आमिर किरमानी का अपमान पूरी हरदोई मीडिया का अपमान है। नेता की इस तरह की मनमानी पर रोक लगाने के लिए भारतीय प्रेस परिषद और तमाम संगठन यह खाली झक मारने के लिए हैं या फिर कुछ कार्यवाही भी करने की हिम्मत रखते हैं। इससे पहले भी नेताओं से कई बार हरदोई के मीडियाकर्मी अपमानित हो चुके हैं।

हरदोई से एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजा गया पत्र.

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