हाइकार्ट ने पत्रकार पर दर्ज मुकदमे पर लगाई रोक

इलाहाबाद : संत रविदास नगर भदोही के वरिष्ठ पत्रकार सुरेश गांधी के विरूद्ध पुलिस द्वारा दायर झूठी प्राथमिकी के आधार पर चल रहे मुकदमें पर माननीय उच्च न्यायालय ने अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी. माननीय न्यायमूर्ति वीके नारायन के समक्ष प्रस्तुत याचिका में याची की तरफ से वरिष्ठ अधिक्ता के0 के0 राय एवं शम्स विकास ने बहस की. माननीय उच्च न्यायालय ने विपक्षीगण को प्रतिशपथपत्र दाखिल करने के लिए डेढ़ माह का समय दिया है और दो महीने के बाद याचिका को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है.

अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता केके राय ने बताया कि कोतवाल संजयनाथ तिवारी ने फर्जी तरीके से गुण्डा एक्ट की रिपोर्ट तैयार कर 25 मार्च को नोटिस दी. 9 अप्रैल को जिलाधिकारी ने बगैर पक्ष सुने व मौका दिये जिला बदर कर दिया। इतना ही नहीं 23 मार्च को दोपहर में जब उप जिलामजिस्ट्रेट न्यायालय में 110 जी जा0 फौ0 का जवाब श्री गांधी ने दाखिल किया, जिसमें कार्यवाही में भी 20 साल पूर्व के तीन मुकदमों को आधार बनाया गया, उसमें वह न्यायालय से दोष मुक्त हैं या पुलिस ने खुद फाईनल रिपोर्ट लगा दी है तब भी रात 8:30 बजे मकान मालिक विनोद गुप्ता से रंगदारी मांगने व मकान कब्जा करने की रिपोर्ट दर्ज कर दी.

दोषमुक्त मामले में जनसूचना अधिकार के तहत मांगी गयी रिपोर्ट में एएसपी भदोही ने भी तीनों आरोपों में दोषमुक्ति की बात कही है. गुण्डा एक्ट जिला बदर व झूठी रिपोर्ट में 20 जून को जिला न्यायालय ने हाई कोर्ट के ही आदेश पर 25 जून तक के लिए अन्तरिम जमानत दे दी. बावजूद इसके गांधी को बर्बाद कर देने पर तुले कोतवाल भदोही संजयनाथ तिवारी ने मकान मालिक को उकसाकर 7 मई को आलमारी में रखे नकदी जेवरात समेत जरूरी कागज चोरी करवा दिये और जब डीएम के आदेश पर उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी और चोरी की शिकायत के बाबत 30 मई को जिला न्यायालय में 156(3) के तहत याचिका दायर की तो 1 जून 2013 को पुनः मकान मालिक को शह देकर कोतवाल ने घर में रखे लाखों के घरेलू सामान, कम्प्यूटर, मूवीकैमरा, टी0वी0, फ्रिज, दो इन्वर्टर बैट्री सहित 25 लाख का सामान लुटवा  दिया.

इतना ही नहीं पकड़कर न सिर्फ मारा पीटा बल्कि आईपीसी की धारा 323, 353, 504 के तहत एक और रिपोर्ट दर्ज कर दी. इसे लेकर न्यायालय में याचिका दायर की थी. इसके पहले भी उत्पीड़नात्मक कार्यवाही के बाबत उच्च न्यायालय में दायर याचिका के मामले में न्यायमूर्ति बीके शुक्ल एवं न्यायमूर्ति राकेश श्रीवास्तव की खण्डपीठ ने प्रमुख गृह सचिव, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, कोतवाली भदोही को एक माह के अन्दर जवाब देने का निर्देश दिया है।

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