Shambhunath Shukla : बात सन् २००० की है। मैं कोलकाता से कानपुर आ रहा था। कालका मेल में फर्स्ट एसी का कोच था। कालका हावड़ा से चलती है। हावड़ा स्टेशन की खास बात यह है कि दो प्लेटफार्म ऐसे हैं जहां आपकी कार सीधे प्लेटफार्म पर ही खड़ी की जा सकती है। ड्राइवर ने कोच के सामने ही कार पार्क की। कोच में सामान रखा और चला गया। कुछ ही देर बाद एक संभ्रांत बुजुर्ग महिला हांफती हुई केबिन में घुसीं और पीछे-पीछे एक युवक उनका ढेर सारा सामान लेकर आया।
फर्राटेदार अंग्रेजी बोलती हुई एक युवती भी साथ में थी। युवक ने मुझसे अनुरोध किया कि मम्मी इलाहाबाद जाएंगी आप प्लीज इनका ख्याल रखिएगा। मैंने कहा जरूर। सामान रखने के बाद युवक व युवती शायद पानी या बिस्किट लाने नीचे चले गए। मैंने अनुमान लगाया कि यह युवक इन वृद्ध महिला का बेटा होगा और युवती शायद बहू। तब तक उन बुजुर्ग महिला ने खुद ही कहा कि भगवान करे ऐसा दामाद सबको मिले। मुझे कुछ आश्चर्य हुआ कि कोई दामाद अपनी सास की इतनी ज्यादा सेवा करता होगा। तब तक उन महिला ने अपना पूरा परिचय खुद दे दिया कि वो इलाहाबाद में संगीत पढ़ाती हैं और उनके ददिया ससुर मदनमोहन मालवीय थे तथा उनकी बेटी के पापा जापान में रहकर हिंदी पढ़ाते हैं।
मैंने पूछा नाम तो बोलीं- लक्ष्मीधर मालवीय। कन्हैयालाल नंदन की सारिका और धर्मयुग में उनकी कहानियां पढ़ रखी थीं तथा मुझे लगता था कि वे घोर दक्षिणपंथी कथाकार हैं। तब तक उनकी बेटी दामाद वापस आ गए। मैंने बेटी से कहा कि आपके पिताजी की कहानियां मैंने पढ़ रखी हैं। बेटी ने मेरी बात सुनकर एक ऐसी निस्पृहता दिखाई कि मैं दंग रह गया। गाड़ी खुलने के बाद वे दोनों उतर गए और फिर उन वृद्ध महिला ने मुझे अपनी रामकहानी सुनाई कि इस लड़की के पैदा होने के बाद उनके पति जापान चले गए और वहीं सुना है कि उन्होंने एक जापानी लड़की से शादी कर ली है। अब वे यहां नहीं आते हैं। हालांकि इलाहाबाद में उनकी काफी जमीन जायदाद है पर वे अपने मायके वालों के साथ रहती हैं। लड़की दामाद कोलकाता में वैज्ञानिक हैं। दामाद मेरठ का जाट है लेकिन बहुत भला और नेक। भगवान ऐसा दामाद सब को दे। उनकी ससुराल वालों ने इस अंतरजातीय शादी का विरोध किया था। हिंदी के एक कहानीकार की यह रामकहानी दिलचस्प है ना!
वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल के फेसबुक वॉल से साभार.





