हिंदी से मोहभंग, अंग्रेजी पत्रकारिता में हाथ आजमाएंगे विनोद शर्मा

: कानाफूसी : आज समाज अखबार और इंडिया न्यूज चैनल चलाने वाले कांग्रेसी नेता विनोद शर्मा का रुझान अब अंग्रेजी पत्रकारिता की तरफ हो चुका है. इसी कारण उनके पुत्र कार्तिकेय शर्मा और पुत्रवधू धीरे धीरे हिंदी से अंग्रेजी की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं. इस कारण इस समूह के हिंदी अखबार व चैनल से जुड़े लोग बेरोजगारी व छंटनी के शिकार हो रहे हैं. आज समाज के कई ब्यूरो बंद किए जा रहे हैं. लोगों को दिल्ली से अंबाला भेजा जा रहा है ताकि लोग खुद ब खुद छोड़ दें.

एमजे अकबर के अखबार द संडे गार्जयन को विनोद शर्मा द्वारा खरीदे जाने की चर्चा है. न्यूज एक्स चैनल को खरीदे जाने की डील पहले ही कंप्लीट हो चुकी है. मतलब साफ है कि अंग्रेजी अखबार और अंग्रेजी चैनल में विनोद शर्मा व उनके परिजनों की रुचि है, हिंदी से तौबा करने का इरादा कर लिया गया है. बताया जा रहा है कि इंडिया न्यूज चैनल को फ्रेंचाइजी व ठेके पर चलाने की तैयारी है. इस क्रम में इंडिया न्यूज मध्य प्रदेश – छत्तीसगढ़ चैनल को एक बड़े चर्चित पत्रकार को ठेके पर दे दिए जाने की चर्चा है. ये बड़े चर्चित पत्रकार एक बड़े न्यूज चैनल के स्टार रिपोर्टर एंकर माने जाते हैं.

सूत्रों के मुताबिक ये बड़े पत्रकार महोदय कार्तिकेय शर्मा से कई राउंड मुलाकात कर चुके हैं. इन बड़े पत्रकार महोदय की बहन भी भोपाल में पत्रकार हैं. माना जा रहा है कि वे पर्दे के पीछे से सारा काम देखेंगी. इंडिया न्यूज राजस्थान की फ्रेंचाइजी भी कोटा के एक व्यक्ति को दी जा चुकी है. इस व्यक्ति के बारे में बताया जाता है कि वह वसुंधारा राजे का करीबी है. हरियाणा, यूपी, बिहार आदि प्रदेशों के लिए चैनल को फ्रेंचाइजी व ठेके पर दिए जाने की तैयारी है. गुजरात में भी चैनल ला रहे हैं. इंडिया न्यूज गुजराती की फ्रेंचाइजी गुजरात समाचार को दिए जाने की चर्चा है.

भड़ास4मीडिया के पास एक मेल के जरिए बताया गया है कि आज समाज अखबार के लोगों की छंटनी का काम जोरों से चल रहा है. कुछ लोगों का कहना है कि रवीन ठुकराल कनाडा जाकर सेटल होने वाले हैं इसलिए उन्होंने कंपनी प्रबंधन से खुद को कार्यमुक्त किए जाने का अनुरोध किया है. बताया जा रहा है कि आज समाज, दिल्ली का नब्बे फीसदी स्टाफ बेरोजगार हो गया है. पहले कुल 20 एडिशन थे जिसे कंपाइल करके 11 कर दिया गया. दिल्ली के एडिशन के डेस्क को अंबाला भेज दिया गया है. ऐसा इसलिए किया गया है कि लोग अंबाला जाने की बजाय नौकरी छोड़ दें. दिल्ली पुलआउट बनाने वाली डेस्क को भी अंबाला भेज दिया गया है. भड़ास के पास आई मेल इस प्रकार है….

आज समाज के दर्जन भर ब्यूरो आफिसों पर ताला

चंद रोज पहले न्यूज एक्स नाम से बड़ा अंग्रेजी चैनल खरीद कर चर्चा में आए कार्तिकेय शर्मा के पुराने हाउस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। खबर है कि गुड मार्निंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रिंट वर्जन आज समाज पर खतरों के बादल मंडरा रहे हैं। कंपनी के कई ब्यूरोज पर ताला लटक गया है। ब्यूरो प्रमुखों को कह दिया गया है कि वे अपने घर बैठ कर काम करना चाहें तो करें, कंपनी उनका भार नहीं उठाएगी। ​प्रबंधन के इस फैसले के बाद से कई ब्यूरो अब घरों से हैंडल किए जा रहे हैं। इनमें दिल्ली रीजन में आने वाले कई पुलआउट्स के साथ ही अंबाला से प्रिंट होने वाले पुलआउट भी शामिल हैं। दिल्ली रीजन के मेवात, झज्जर, नारनौल महेंद्रगढ़ और पलवल जिले और अंबाला रीजन के यमुना नगर, कैथल, पानीपत, जींद, सिरसा फतेहाबाद समेत करीब दर्जन भर जिले शामिल हैं। आर्थिक मोर्चे पर फटके पर फटका खा रहे अखबार का कोई तारनहार नजर नहीं आ रहा।

फिलहाल तो कास्ट कटिंग के नाम पर सबसे जोरदार झटका स्ट्रिंगरों को दिया गया है। बताया जा रहा है कि दिल्ली के संपादकीय प्रभारी राजशेखर मिश्रा ने तीन से चार हजार रुपए ले रहे स्ट्रिंगरों को फोन करके कह दिया है कि वे हजार रुपए मे काम कर सकते हों तो करें वरना रास्ता देख लें। साथ ही ब्यूरो वालों को विज्ञापन जुटा कर अखबार की माली हालत सुधारने की नसीहत दी जा रही है। दर्जनों स्टाफर और स्ट्रिंगर्स की बलि ले ली गई है। अखबार बंद होने और छंटनी की अटकलें तेज हो गई हैं। संस्था से लोगों का पलायन बढ़ता जा रहा है। योग्य लोग भाग रहे हैं और नए लोग मिल नहीं रहे। किसी तरह रीटेनर्स से काम चलाया जा रहा है। ​दिल्ली में संपादकीय का कामकाज देख रहे राजशेखर मिश्र ​के मिश्रावाद के चलते लोग और भी निराश हैं। हालत इस कदर खराब है कि जो मिश्रा नहीं है उसे किसी को राहुल देव का आदमी बताकर तो किसी को मधुकर उपाध्याय के आदमी बताकर ठिकाने लगाया जा रहा है। ग्रुप के समूह संपादक रवीन ठुकराल को बहकावे में डाल कर ये सब किया जा रहा है।

प्रिंट एडीशन के साथ साथ इंडिया न्यूज के नेशनल चैनल का हश्र किसी से छुपा नहीं है। कई लोग राजनीति का शिकार हुए तो कई अंधों के हाथ बटेर लग गई। फिलहाल तो जिला संस्करणों के आफिस बंद किए जाने से पत्रकारों में हड़कंप मचा है और वे अपनी रोजी रोटी के लिए हाथ पैर मार रहे हैं।

कानाफूसी कैटगरी की खबरों पर भरोसा करने से पहले आप अपने स्तर पर तथ्यों की जांच कर लें. यह कालम गासिप, चर्चाओं, अपुष्ट जानकारियों पर आधारित है. अगर आपके पास कोई नई जानकारी, तथ्य हो तो भड़ास तक bhadas4media@gmail.com के जरिए पहुंचा सकते हैं. भेजने वालों का नाम गोपनीय रखा जाएगा.

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