हिंदुस्तान अखबार ने श्रम विभाग को भी उसकी औकात दिखा दी

यशवंत जी नमस्कार, आपके द्वारा प्रकाशित हिंदुस्तान, कानपुर से संबंधित पीड़ित हम लोगों जैसे कर्मियों का समाचार पूरे देश में मीडियाकर्मियों को जागरूक कर रहा है. लोग आपके माध्यम से जागरूक हो रहे हैं और अपने अधिकारों को समझ रहे हैं. आगे की कथा बताना चाहूंगा कि अतिरिक्त श्रम आयुक्त श्री प्रदीप श्रीवास्तव के समक्ष 15.10.2013 को होने वाली वार्ता में कम्पनी के आधिकारिक व्यक्ति को कम्पनी के स्टैंडिंग आर्डर के साथ पेश होने को कहा गया था लेकिन श्रम आयुक्त के आदेश को दरकिनार करके हिंदुस्तान कानपुर मैनेजमेंट का कोई भी मैनेजर उपस्थित नहीं हुआ.

हिंदुस्तान कानपुर प्रबंधन हिटलर जैसा तानाशाही रवैया अपना रहा है और श्रम मंत्रालय के सभी रूल्स और रेगुलेशन की धज्जियाँ उड़ाकर हम लोगों को नौकरी से निकाल दिया है और सितम्बर माह से श्रम आयुक्त के आदेश देने के बाद भी सेलरी नहीं दी जा रही है जिसके कारण कानपुर महानगर में हम चारों कर्मचारियों का परिवार भुखमरी के कगार पर खड़ा है और बच्चों की पढ़ाई बाधित हो गयी है.

हम लोगों का ट्रांसफर जहाँ भी किया गया, वहाँ हम लोगों ने पूरी ईमानदारी और मेहनत से ड्यूटी की, चाहे वो मेन्टली हो या फिजिकली. इसके फलस्वरूप हमलोगों को कानपुर मैनेजमेंट आज ये दिन देखने को मजबूर कर रहा है. अतिरिक्त श्रम आयुक्त द्वारा हम लोगों को पत्र दिया गया है, जो इसमें अटैच किया गया है.

आपका

नवीन कुमार

अंजनी प्रसाद

पारस नाथ शाह

संजय दुबे

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