हिंदुस्तान और अमर उजाला किसके हितों की चौकीदारी करने उत्तराखंड आए हैं?

Rajen Todariya : मेरठ से प्रकाशित और देहरादून से प्रसारित दैनिक अमर उजाला और दिल्ली से प्रकाशित और देहरादून से प्रसारित दैनिक हिंदुस्तान ने पनबिजली परियोजनाओं के खिलाफ कथित साधुसंतों के विरोध को काफी प्रमुखता से छापा है पर गोपेश्वर, पीपलकोटी समेत टिहरी, उत्तरकाशी और चमोली में होने वाले विरोध प्रदर्शनों को नजरअंदाज कर दिया। अमर उजाला ने तो पद्मश्री अवधेश कौशल द्वारा धरना दिए जाने समेत उन सभी खबरों को ब्लैकआउट कर दिया जिनमें कथित साधुसंतों का विरोध किया गया था।

दैनिक हिंदुस्तान ने अवधेश कौशल के बयान पर एक छोटी सी छापकर उन पर अपनी कृपा कर दी। वर्ना अवधेश कौशल और उत्तराखंड के लोग उसका क्या बिगाड़ लेते? इनमें किसी भी अखबार ने पनबिजली परियोजनाओं का विरोध कर रहे कथित साधु-संतों का पिछला रिकार्ड छापने की जुर्रत नहीं की कि इन सज्जनों का पर्यावरण से अब तक क्या लेना देना रहा है। इनके खिलाफ कहां-कहां कितने अपराधिक मामले दर्ज हैं?

अमर उजाला ने तो बाकायदा प्रथम पेज पर एक पहाड़ी जाति नाम से एक स्टोरी छापी है जिसमें भगीरथी और अलकनंदा पर बनने वाली परियोजनाओं से पर्यावरण को हुए नुकसान का विस्तृत ब्यौरा है। जबकि हकीकत यह है कि भगीरथी पर केवल दो ही पनबिजली परियोजनायें मनेरी भाली प्रथम और द्वितीय बनी हैं। टिहरी बांध तो यूपी का बनाया हुआ है और उसके राजस्व का 25 प्रतिशत हिस्सा भी यूपी को ही जा रहा है। उत्तराखंड के हिस्से में तो 12 प्रतिशत रायल्टी और एक लाख विस्थापितों और दस लाख बांध प्रभावितों की कष्ट ही आये हैं। इस बांध को तो कल तोड़ दें तो सबसे ज्यादा खुशी उत्तराखंड के लोगों को ही होगी। पर अमर उजाला और हिंदुस्तान इसका जिक्र नहीं करते।

इन दोनों ही अखबारों ने एक लाइन टिहरी के विस्थापितों और बांध प्रभावितों पर नहीं लिखी। सवाल उठता है कि ये अखबार किसके नौकर हैं? किसके हितों की चैकीदारी करने ये उत्तराखंड में आए हैं? यह स्पष्ट है कि ये अखबार उत्तराखंड और पहाड़ के पक्ष में तो कतई नहीं हैं। यदि होते तो ऋषिकेश और कानपुर से लिए गए गंगा के पानी के नमूनों में पाए गए प्रदूषण की रिपोर्ट छापते और बताते कि गंगा को अपवित्र करने वाले अपराधी कौन हैं? यदि इन अखबारों में पत्रकारिता की थोड़ी भी नैतिकता होती तो ये गंगोत्री, बद्रीनाथ, उत्तरकाशी, हरिद्वार और ऋषिकेश के आश्रमों से गंगा में जाने वाली गंदगी की रिपोर्ट छापते और बताते कि धर्म के धंधेबाज और उद्योगपति ही गंगा के सबसे बड़े दुश्मन हैं। लेकिन नहीं! इनसे तो इन अखबारों का धंधा चलता है।

इसलिए गरीब की जोरू तो पहाड़ के लोग हैं जिन पर सबको हमला करना है। क्योंकि इन सबका एजेंडा एक ही है कि उत्तराखंड को उसके जल संसाधनों का उपयोग करने से रोको। जब मुख्यधारा की पत्रकारिता ने तय कर लिया है कि वह अपने पैतृक राज्यों के पक्ष में खड़ी होकर क्षेत्रवाद के आधार पर उत्तराखंड के हितों को दूरगामी और निर्णायक नुकसान पहुंचायेंगे तब क्षेत्रीय पत्रकारिता को ही नहीं बल्कि स्थानीय समाज को भी इसके खिलाफ उठ खड़ा होना होगा। अखबारों और न्यूज चैनलों को यह समझाना होगा कि स्थानीय लोगों के हितों के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण अभियान या तो बंद करना होगा या फिर आर्थिक बहिष्कार और हुक्कापानी बंद जैसे गांधीवादी कार्रवाईयां झेलनी पड़ेंगी। उत्तराखंड के लोगों को भी यह बात गांठ बांधनी होगी कि वे जिन्हें समाचार देने वाले मान रहे हैं वे दरअसल अफीम बेचने वाले सौदागर हैं। ये 19 वीं सदी में चीन को नशेड़ी बनाने वाले अफीम सौदागरों की भारतीय संतानें हैं। अफीम के इस पेड़ को जड़ से उखाड़ो! इसकी जड़ों को जला दो! तभी नशे की यह खेती नष्ट होगी।

            Ravindra Belwal Pahadi Chora main bhi tehri ka vistapit aur dubaara jolly grant airport ka vistapit hun…. inn damoun ne humare uttrakhnd ko barbaad kar diya haai …. prakriti se chead chad vinash ko nyota hai ….. congress pata nhi kyun hindu dharm ki pavtra chizoun ko barbaad karne main tuli hui hai…

            Prvn Bisht tuching lines. . .

            Inder Singh Negi visthapan ki peeda to koi visthpit hi samajh sakta he, jise apni sanskriti,samaaj,aas-padosh,parivesh se jabran dakel diya jaata he, jahaan use tathakathitroop se visthapit kiya jaata he kyo uprokt usko mil payega…..?  
             
            Naresh Chamoli Hydro power jaroorat hai. in par kam hona chahiye. newspapers ne motamota dekha pipalkoti jaisi grassroot par bee nazar jayegi. wahan bhee patrkar sathi hin. We jaroor is mudde ko uthayenge
             
            Inder Singh Negi Uttrakhand mein 5so se adhik pariyojnaye bibhinn gad,gadero our nadiyo par parstavit hein en par malikana hak rajywasiyon ka rahe tab to thik hein kintu yadi visthapan aata he to……? Esse jo visthapan hoga kya pahaad khali nahi ho jaayega es tarah se……? Jayenge kahaan log……?

उत्तारखंड के वरिष्ठ पत्रकार राजेन टोडरिया के फेसबुक वॉल से साभार.

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