कहने को तो मीडिया इंडस्ट्री में कहा जाता है कि कंटेंट इज किंग लेकिन कंटेंट की असल औकात मीडिया हाउसों में दो कौड़ी की होती है, दूसरे पायदान की होती है, सेकेंड ग्रेड की होती है. यही कारण है कि पत्रकारों के साथ प्रबंधन बेहद घटिया, सौतेला और अमानवीय व्यवहार करता है. जब चाहे जिसे रख लो और जब चाहे जिसे भी कान पकड़ कर बाहर कर दो. आजकल हिंदुस्तान अखबार में आंतरिक तौर पर खूब उठापटक है.
ढेर सारे पत्रकारों को मजीठिया न देने के लिए उन्हें नई बनाई गई वेब कंपनी का इंप्लाई बता दिया गया है तो अब नई तैयारी पत्रकारों का टेस्ट लेने की है. हिंदुस्तान की लखनऊ और कानपुर यूनिट से खबर है कि यहां के सारे मीडियाकर्मियों के टेस्ट होंगे. यह नहीं बताया जा रहा है कि टेस्ट क्यों होंगे.
न्यूज एडिटर से लेकर ट्रेनी तक को टेस्ट देना होगा. जो पत्रकार अखबार निकालने की प्रक्रिया में रोज रोज टेस्ट देते हैं और एक बेहतर अखबार निकालकर अपनी परीक्षाएं पास करते हैं, उन्हें अब आब्जेक्टिव टाइप अलग से एक टेस्ट से गुजरना होगा. इसको लेकर हिंदुस्तानियों में भारी आक्रोश है. कई लोग तो मजीठिया न दिए जाने और वेब कंपनी में डाले जाने को लेकर कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं. देखना है हिंदुस्तान के अंदर सुलगती चिंगारी कब आग में तब्दील हो पाती है या फिर चिंगारी सुलगने के बाद बुझकर राख में बदल जाती है.
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