हिंदुस्‍तान की खबर का असर : फीस के लिए आइसक्रीम बेचना छोड़ इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करेगा जितेंद्र

जौनपुर हिन्दुस्तान अखबार के पत्रकार रूद्र प्रताप सिंह द्वारा ५ मई को लिखी गई एक खबर 'इंजीनियर बनने की राह में बेच रहा है आइसक्रीम' शीर्षक के तहत प्रकाशित हुई थी. यह खबर गरीबी से तंग उस जितेन्द्र पर थी जिसे बीटेक की फीस जमा करने के लिए जौनपुर शहर में आइसक्रीम बेचना पड़ रहा था. जितेन्द्र ने इंजीनियर बनने का सपना देखा. बीटेक संस्थान में उसको प्रवेश भी मिल गया. रिक्शा चला कर उसने एक सेमेस्टर की फीस १५ हजार में से ७ हजार जमा कर दिया था. अनुसूचित जाति के होने के कारण फीस भी कम ही भरनी थी, लेकिन पूरे पैसे उसके पास नहीं थे.

एक सेमेस्टर का एक्जाम तो कॉलेज वालों ने देने दिया लेकिन फीस जमा न कर पाने के कारण आगे की पढ़ाई रोक दी. जितेन्द्र ने हिम्मत नहीं हारी और आगे की फीस भरने के लिए इस बार आइसक्रीम बेचने लगा. जिसकी खबर हिंदुस्तान में प्रकाशित हुई. खबर पढ़ने के बाद काशी गोमती ग्रामीण बैंक के चेयरमैन ने इसको संज्ञान में लिया और जितेन्द्र की खोज के लिए बैंक अधिकारिओं को निर्देशित किया. जितेन्द्र को पढ़ाई के लिए बैंक ने लोन दे दिया. बैंक के चेयरमैन सच्चिदानंद त्रिपाठी के आँखों में जितेन्द्र का दर्द सुन कर आसूं आने लगे फिर जितेन्द्र भी रोने लगा.

जौनपुर में मंगलवार को आयोजित एक कार्यक्रम में बैंक के चेयरमैन ने एक मेधावी छात्र विनोद भारती को सम्मानित किया और जितेन्द्र को आईएएस बनवाने का संकल्प दिलवाया. जितेन्द्र के समझ में ही नहीं आ रहा था कि इतनी जल्दी यह सब कैसे हो गया. हिंदुस्तान के जौनपुर ब्यूरो प्रमुख राजेंद्र सिंह ने बैंक के चेयरमैन को इसके लिए बधाई भी दी. वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जनसंचार विभाग के प्राध्यापक डॉ. अवध अवध बिहारी सिंह कहते है कि समाचार पत्र की खबर का क्या असर होता है उसका यह इसका सर्वोत्‍तम उदाहरण है.

जौनपुर से डा. दिग्विजय सिंह राठौर की रिपोर्ट.

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