हिंदुस्‍तान, पटना में जूनियर फोटोजर्नलिस्‍ट ने सीनियर से की बदतमीजी

हिन्दुस्तान, पटना के पूर्व संपादक अक्कू श्रीवास्तव के तबादले के कुछ दिनों बाद ही उनके करीबी लोग नए संपादक केके उपाध्याय को रिझाने के लिए वर्चस्व जमाना शुरू कर दिया है. इसको लेकर रिपोर्टरों व फोटोग्राफरों के पुराने गुटों ने फिर से खेमाबंदी शुरू हो गई है. यूनिट में चर्चा है कि इसी क्रम में अक्‍कू श्रीवास्‍तव के खास रहे जूनियर फोटोग्राफर आशीष ने शुक्रवार को सीनियर फोटोग्राफर अनिल कुमार के साथ न सिर्फ बदतमीजी बल्कि हाथापाई भी की. अब देखना है प्रबंधन इस मामले को किस तरह टैकल करता है.

उल्‍लेखनीय है कि अनिल हिन्दुस्तान, पटना में करीब 20 वर्षों से कार्यरत हैं. पटना के मीडिया जगत में इनकी छवि एक ईमानदार व तेजतर्रार फोटोग्राफर की है. जबकि सेटर व तुनक मिजाज प्रवृति आशीष को आए हुए महज तीन वर्ष ही हुए हैं लेकिन अक्कू के दौर में वो प्रमोशन पाकर चमक गए. वहीं इस दौरान अनिल को बाहर का रास्ते दिखाने के लिए काफी प्रताड़ित किया गया. फिर भी एक योद्धा के भांति वह डंटे रहे. जो प्रोजेक्‍ट सौंपे गए उसे पूरा किया. 

वैसे इस पूरे मामले में यह भी कयास लगाया जा रहा है कि इस प्रकरण में एंटी रिपोर्टर लाबी का हाथ है. तभी तो एंटी लाबी तथ्य को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत कर रही है. ताकि संपादक को बरगलाते हुए अनिल कुमार को बदनाम किया जा सके. अब देखना यह है कि हिंदुस्‍तान के सुलझे हुए संपादकों में गिने जाने वाले केके उपाध्याय इस पर कौन से प्रक्रिया अपनाते हैं. माना जा रहा है कि अपने मिजाज के अनुरूप केके उपाध्‍याय दूध का दूध और पानी का पानी जरूर करेंगे.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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