हिंदुस्‍तान विज्ञापन घोटाला : काशी प्रसाद ने कोर्ट में दर्ज कराया बयान, कई राज खोले

मुंगेर। विश्व के सनसनीखेज दैनिक हिन्दुस्तान के कथित दो सौ करोड़ के विज्ञापन घोटाले में जांच की आंच अब बिहार प्रबंधन के शीर्ष पदाधिकारियों के द्वार तक पहुंच गई है। अभियोजन के समर्थन में पुलिस के गवाह ने न्यायालय में धारा 164 के तहत दिए बयान में विज्ञापन घोटाले में कंपनी के बिहार राज्य के उपाध्यक्ष योगेश चन्द्र अग्रवाल के शामिल होने की बात उजागर की है। बयान में गवाह ने इस बड़े घोटाले में प्रबंधन के अन्य वरीय सहयोगियों और संपादकों की मिलीभगत को भी उजागर किया है।

लोगों में चर्चा होने लगी है कि बिहार राज्य में आर्थिक अपराधियों के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर चुके बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कब तक इस विश्वस्तरीय हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाले के नामजद और अप्राथमिक अभियुक्तों को जेल भेज पाते हैं? ज्यों-ज्यों पुलिस अनुसंधान आगे बढ़ता जा रहा है, पुलिस जांच से लगता है कि इस विज्ञापन घोटाले में भविष्य में राज्य और केन्द्र सरकार के अनेक विभागों के वरिष्‍ठ अधिकारी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

इस बीच, पुलिस अधीक्षक पी. कन्नन के आदेश पर कोतवाली कांड संख्या-445/2011 में पुलिस जांचकर्ता सह कोतवाली के आरक्षी निरीक्षक ने अभियोजन के समर्थन में मुंगेर के मंगल बाजार निवासी 85 वर्षीय आरटीआई कार्यकर्ता, अधिवक्ता और पत्रकार काशी प्रसाद को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एमके सिन्हा के समक्ष आईपीसी की धारा 164 के तहत बयान के लिए पेश किया। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (मुंगेर) एमके सिन्हा के आदेश पर प्रथम श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी डीएन भारद्वाज ने पुलिस के गवाह काशी प्रसाद का बयान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत लिपिबद्ध किया।

प्रथम श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी डीएन भारद्वाज के समक्ष पत्रकार काशी प्रसाद ने बयान किया है कि —‘‘मैं बिना किसी भय या दबाव में यह बयान दे रहा हूं। छात्र जीवन से पत्रकारिता से जुड़ा हूं। मुझे वर्ष 2007-08 में पता चला है कि मेसर्स हिन्दुस्तान टाइम्स लिमिटेड, जो अपना नाम मेसर्स एचटी मीडिया लिमिटेड किया और अभी मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड है, ने अपने हिन्दुस्तान अखबार में फर्जी निबंधन संख्या छापकर करोड़ों का घपला किया है। आरटीआई के तहत अधिकृत प्रति मुझे प्राप्त है। वित्तीय वर्ष 2002-03 और 2003-04 के दौरान कंपनी ने एक करोड़ से भी अधिक रुपया का घपला विज्ञापन मद में किया है और सरकार को चूना लगाया है।‘‘

श्री काशी प्रसाद न्यायालय में आगे बयान करते हैं कि–‘‘इस कंपनी ने 2001 में भागलपुर संस्करण को लांच किया और अखबार में प्रेस रजिस्ट्रार का वर्ष 1986 का रजिस्‍ट्रेशन चिपका दिया। कंपनी ने जाली कागजात प्रस्तुत कर करोड़ों का चूना लगाया और षड़यंत्र कर धोखाधड़ी की है। इस घोटाले में कंपनी की अध्यक्ष शोभना भरतिया, पटना प्रबंधन के उपाध्यक्ष योगेश चन्द्र अग्रवाल और उनके प्रबंधक सहयोगियों और संपादकों ने मिलीभगत कर यह कुकृत्य किया है।‘‘

इस विज्ञापन घोटाला में पहले से नामजद अभियुक्तों में मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड की अध्यक्ष शोभना भरतिया, मुद्रक और प्रकाशक अमित चोपड़ा, प्रधान संपादक शशि शेखर, कार्यकारी संपादक अकु श्रीवास्तव और स्थानीय संपादक बिनोद बंधु शामिल हैं। पुलिस प्राथमिकी में सूचक व आरटीआई कार्यकर्ता मंटू शर्मा ने आरोप लगाया है कि अभियुक्तों ने बिना निबंधित मुंगेर और भागलपुर के दैनिक हिन्दुस्तान संस्करणों के प्रिंट लाइन में 15 वर्ष पूर्व के प्रेस रजिस्‍ट्रार, नई दिल्ली से पटना हिन्दुस्तान संस्करण के लिए प्राप्त रजिस्‍ट्रेशन संख्या-44348/1986 को चिपका कर अपना अखबार को रजिस्‍टर्ड घोषित कर केन्द्र और राज्य सरकार के सैकड़ों सरकारी विभागों से लगभग दो सौ करोड़ रुपया की प्राप्ति विज्ञापन मद में गैर कानूनी ढंग से की।

मुंगेर से श्रीकृष्ण प्रसाद की रिपोर्ट. इनसे संपर्क  मोबाइल नं- 09470400813 के जरिए की जा सकती है.

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