हिंदुस्‍तान विज्ञापन घोटाला : संस्‍करणों में रजिस्‍ट्रेशन संख्‍या बदलकर-बदलकर छापा गया

 

मुंगेर। विश्व के सनसनीखेज दैनिक हिन्दुस्तान के 200 करोड़ के विज्ञापन फर्जीवाड़ा में पुलिस अधीक्षक पी. कन्नन के निर्देशन में आरक्षी उपाधीक्षक अरूण कुमार पंचालर की समर्पित ‘‘पर्यवेक्षण-टिप्पणी‘‘के पृष्ठ -04 पर इस कांड के वादी मंटू शर्मा ने खुलासा किया है कि मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड ने किस प्रकार भागलपुर और मुंगेर के दैनिक हिन्दुस्तान संस्करणों में बार-बार निबंधन संख्या बदलने, फर्जी तरीके से समाचर-पत्रों के मुद्रण, प्रकाशन और वितरण करने और अवैध संस्करणों में सरकारी विज्ञापन छापकर करोड़ों रुपए का फर्जीवाड़ा किया।
 
वादी मंटू शर्मा ने अभियुक्तों के द्वारा किए गए छल, धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा को प्रमाणित करने के लिए डीएवीपी, नई दिल्ली की शर्त्तों का उल्लंघन कर डीएवीपी विज्ञापन दर प्राप्त करने का भी सनसनीखेज खुलासा किया है।
 
हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाला के प्रमुख सरकारी गवाह बने श्रीकृष्ण प्रसाद : पर्यवेक्षण टिप्पणी की पृष्ठ संख्या -04 पर मुंगेर के समाजसेवी, पत्रकार और अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद को इस विश्वव्यापी दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाले से जुड़े पुलिस कांड में सरकार की ओर से प्रमुख साक्ष्य के रूप में पेश किया गया है। अभियोजन साक्ष्य (प्रथम) श्रीकृष्ण प्रसाद ने इस पृष्ठ में खुलासा किया है कि दैनिक हिन्दुस्तान के विज्ञापन फर्जीवाड़ा की पुष्टि बिहार सरकार के वित्त विभाग के अंकेक्षण -प्रतिवेदन, जिसकी संख्या- 195/2005-06 है, में भी की गई है। उन्होंने दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर संस्करण के गलत और अवैध मुद्रण, प्रकाशन और वितरण का भी कानूनी नजर में बारीकियों के साथ खुलासा किया है। खुलासा इतना सरल भाषा में किया गया है कि भारत के किसी कोने के पाठक इसे पढ़कर देश के कारपोरेट प्रिंट मीडिया के सरकारी विज्ञापन घोटाले में अपने स्तर से देश के किसी भी न्यायालय या पुलिस में सीधी कार्रवाई कर सकते हैं।
 
डीएवीपी की भूमिका संदिग्ध : पर्यवेक्षण -टिप्पणी के पृष्ठ-04 के खुलासा से प्रामाणित होता है कि अभियुक्तों ने भागलपुर से अवैध ढंग से प्रकाशित दैनिक हिन्दुस्तान के लिए डीएवीपी विज्ञापन -दर पाने में या तो डीएवीपी के समक्ष गलत सूचनाएं दीं या डीएवीपी, नई दिल्ली के वरिष्ठ पदाधिकारियों की मिलीभगत से गैरनिबंधित दैनिक अखबार हिन्दुस्तान (भागलपुर संस्करण) के लिए डीएवीपी ने विज्ञापन-दर जारी कर दिया और उस विज्ञापन-दर की आड़ में अभियुक्तों ने बिहार सरकार से भी सरकारी विज्ञापन प्राप्त करने का लाइसेंस प्राप्त कर लिया। हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाला का यहां ही सभी कानूनी पेंच है। अब दायित्व पुलिस जांच एजेंसी पर है कि जांच एजेंसी जांच करे कि डीएवीपी विज्ञापन -दर प्राप्त करने में डीएवीपी कार्यालय, नई दिल्ली की सहभागिता है या नहीं? यदि सहभागिता है, तो किस रूप में है? क्योंकि डीएवीपी विज्ञापन दर पर ही दैनिक हिन्दुस्तान ने विगत ग्यारह वर्षों में बिहार सरकार से अरबों-अरब रूपया का विज्ञापन 38 जिलों से बटोर लिया।
 
विश्व के पाठकों की मांग पर आरक्षी उपाधीक्षक की पर्यवेक्षण-टिप्पणी की पृष्ठ संख्या-04 पाठकों के लिए यहां हू-बहू प्रस्तुत कर रहा हूं-‘‘वादी मंटू शर्मा ने अपने बयान में आगे बताया है कि दैनिक हिन्दुस्तान के भागलपुर और मुंगेर संस्करणों में बार-बार निबंधन संख्या बदलते रहने से स्वतः स्पष्ट हो जाता है कि अभियुक्तों द्वारा गलत एवं फर्जी तरीके से उक्त स्थानों से समाचार-पत्र का मुद्रण/प्रकाशन किया जा रहा है तथा अभियुक्तों को अपने कृत्यों को छिपाने के लिए समाचार -पत्र में बार-बर निबंधन संख्या बदलकर प्रकाशित करना पड़ रहा है। उन्होंने अपने बयान में आगे बताया कि अभियुक्तों द्वारा किए गए छल/धोखाधड़ी एवं फर्जीवाड़ा को प्रमाणित करने हेतु प्राथमिकी के साथ आवश्यक दस्तावेज संलग्न किया गया है। उन्होंने अपने बयान में यह भी बताया है कि डीएवीपी की विज्ञापन सूची में किसी दैनिक अखबार का नाम तब दर्ज होगा, जब दैनिक अखबार का प्रकाशन 36 माह तक बिना रूके नियमित रूपसे हो चुका होगा अर्थात 36 माह तक किसी भी अखबार को बिना सरकारी विज्ञापन के ही अखबार निकालना होगा, परन्तु उक्त नियमों की अनदेखी की गई। उन्होंने अपने बयान में आगे बताया कि वे सितम्बर, 2001 से दैनिक हिन्दुस्तान के नियमित पाठक हैं, जिस संबंध में उनके पास दैनिक हिन्दुस्तान के स्थानीय कार्यालय द्वारा निर्गत मासिक ग्राहक विपत्र भी उपलब्ध हैं, जिसे वे आवश्यकता पड़ने पर प्रस्तुत कर सकते हैं।
 
साक्षी श्रीकृष्ण प्रसाद, पे0 काशी प्रसाद, साकीन-मंगल बाजार, थाना-कोतवाली, जिला- मुंगेर का बयान लिया गया। इन्होंने अपने बयान में बताया कि ये एक समाजसेवी हैं तथा वादी के सहयोगी हैं। इन्होंने अपने बयान में प्राथमिकी एवं वादी के बयान का पूर्णरूपेण समर्थन करते हुए आगे बताया कि प्रेस पुस्तक रजिस्ट्रीकरण अधिनियम-1867 के तहत किसी भी समाचार पत्र के प्रकाशन हेतु निम्नांकित नियमों का पालन किया जाना आवश्यक है:-
 
(1) प्रकाशन का कार्य प्रारंभ करने के पूर्व संबंधित जिले के जिला दंडाधिकारी के समक्ष विहित प्रपत्र में घोषणा-पत्र समर्पित करना।
 
(2) तद्नुसार जिला दण्डाधिकारी द्वारा प्रमाणीकरण देना।
 
(3) कंपनी रजिस्ट्रार से अनुमति प्राप्त करना।
 
(4) भारत सरकार के समाचार-पत्र पंजीयक से पंजीयन कराना।
 
इन्होंने अपने बयान में आगे बताया कि उक्त सम्पूर्ण प्रक्रिया का अनुपालन करने के उपरांत ही नियमतः किसी समाचार पत्र का प्रकाशन किया जा सकेगा, परन्तु अभियुक्तों द्वारा उक्त तथ्यों की अनदेखी करते हुए 03 अगस्त, 2001 से दैनिक हिन्दुतान का भागलपुर संस्करण प्रकाशित किया जाने लगा। उसके बाद मुंगेर से भी दैनिक हिन्दुस्तान का संस्करण का प्रकाशन किया जाने लगा, जिसके लिए भी निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया जिसकी पुष्टि बिहार सरकार के वित्त विभाग की अंकेक्षण प्रतिवेदन संख्या-195/2005-06 से भी होती है। इन्होंने अपने बयान में आगे बताया कि भागलपुर एवं मुंगेर से मुद्रित एवं प्रकाशित होनेवाले दैनिक हिन्दुस्तान में वर्ष 2001 से 30 जून, 2011 तक आरएनआई नं0-44348/86, जो पटना के लिए आवंटित है, का प्रयोग किया गया जबकि 01 जुलाई, 2011 से 16 अप्रैल, 2012 तक आरएनआई नं. के स्थान पर ‘‘आवेदित‘‘छापा जाने लगा। पुनः दिनांक 17 अप्रैल, 2012 को उक्त समाचार पत्र में आरएनआई नं0- बीआईएचएचआईएन/2011/41407 छापा गया।
 
जांच का विषय : प्रेस रजिस्ट्रार कार्यालय, नई दिल्ली ने दैनिक हिन्दुस्तान के भागलपुर संस्करण को पहली बार जो निबंधन संख्या -बीआईएचएचआईएन/2011/41407 आवंटित किया, वह भी जांच का विषय है। दैनिक हिन्दुस्तान के भागलपुर संस्करण के लिए आवंटित इस निबंधन संख्या का प्रकाशन 17 अप्रैल, 2012 से प्रिंट लाइन में शुरू हुआ। परन्तु, इस निबंधन संख्या में निबंधन का वर्ष 2011 दिखाया गया है जो पुलिस अनुसंधान का अलग ही विषय है। अभी भी दैनिक हिन्दुस्तान के भागलपुर से प्रकाशित रविवारीय संस्करण के लिए प्रेस रजिस्ट्रार कार्यालय से निबंधन संख्या प्राप्त नहीं हुआ है। मजे की बात है कि गैर निबंधित दैनिक हिन्दुस्तान के रविवारीय संस्करणों में भी सरकारी विज्ञापन का प्रकाशन और सरकारी विज्ञापन के प्रकाशन के विरूद्ध राशि की वसूली धड़ल्ले से की जा रही है।
 
सभी अभियुक्तों के विरूद्ध प्रथम दृष्टया आरोप प्रमाणित : मुंगेर पुलिस ने कोतवाली कांड संख्या-445/2011 में सभी नामजद अभियुक्त (1) शोभना भरतिया (अध्यक्ष, दी हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड, नई दिल्ली), (2) शशि शेखर (प्रधान संपादक, दैनिक हिन्दुस्तान, नई दिल्ली), (3) अकु श्रीवास्तव (कार्यकारी संपादक, हिन्दुस्तान, पटना संस्करण), (4), बिनोद बंधु (स्थानीय संपादक, हिन्दुस्तान, भागलपुर संस्करण) और (5) अमित चोपड़ा (मुद्रक एवं प्रकाशक, मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड, नई दिल्ली) के विरूद्ध भारतीय दंड संहिता की धाराएं 420/471/476 और प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट,1867 की धाराएं 8 (बी),14 एवं 15 के तहत लगाए गए सभी आरोपों को अनुसंधान और पर्यवेक्षण में ‘सत्य‘घोषित कर दिया है।
 
सांसदों से इस विज्ञापन घोटाले को संसद में उठाने की अपील : देश के माननीय सांसदों से इस विज्ञापन घोटाले को आगामी संसद सत्र में उठाने की अपील की गई है। देश की आजादी के बाद यह पहला मौका है कि माननीय सांसद देश के कोरपोरेट मीडिया के अरबों-खरबों के सरकारी विज्ञापन घोटाले को सबूत सदन के पटल पर रख सकेंगे। अब तक अखबार ही देश के भ्रष्टाचारियों को अपने अखबारों में नंगा करता आ रहा है। अब माननीय सांसद भी आर्थिक अपराध में डूबे शक्तिशाली मीडिया हाउस के सरकारी विज्ञापन घोटाले को संसद में पेश कर आर्थिक भ्रष्टाचारियों को नंगा कर सकेंगे।
 
गिरफ्तारी का आदेश और आरोप-पत्र समर्पित होना बाकी है : विश्व के इस सनसनीखेज हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाले में पुलिस अधीक्षक के स्तर से पर्यवेक्षण रिपोर्ट -02 जारी होने के बाद अब कानूनतः इस कांड में सभी नामजद अभियुक्तों के विरूद्ध गिरफ्तारी का आदेश और आरोप पत्र न्यायालय में समर्पित करने की प्रक्रिया शेष रह गई है। देखना है कि मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के नेतृत्व में बिहार में आर्थिक अपराधियों के विरूद्ध चले रहे युद्ध में सरकार कब तक इस मामले में गिरफ्तारी का आदेश और आरोप-पत्र न्यायालय में समर्पित करने का आदेश मुंगेर पुलिस को देती है?
 
क्या सरकार अभियुक्तों को सजा दिला पाएगी? : विश्व के पाठक अब प्रश्न कर रहे हैं कि क्या बिहार सरकार दैनिक हिन्दुस्तान के विज्ञापन घोटाले में शामिल कंपनी की अध्यक्ष शोभना भरतिया, प्रधान संपादक शशि शेखर और अन्य संपादकों को सजा दिलाने में भविष्य में सफल होगी?
 
मुंगेर से श्रीकृष्ण प्रसाद की रिपोर्ट. इनसे संपर्क मोबाइल नं0- 09470400813 के जरिए किया जा सकता है. 


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