हिंदुस्‍तान विज्ञापन घोटाला : जज के सामने श्रीकृष्‍ण प्रसाद ने उठाया करोड़ों की हेराफेरी से पर्दा

मुंगेर। विश्व के सनसनीखेज दैनिक हिन्दुस्तान के लगभग दो सौ करोड़ के विज्ञापन घोटाले में मुंगेर (बिहार) पुलिस की ओर से अभियोजन के पक्ष में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 में न्यायालय में दर्ज किए गए तीसरे गवाह के बयान ने विज्ञापन घोटाले पर से पर्दा पूरी तरह उठा दिया है। गवाह ने भंडाफोड़ कर दिया है कि देश के शक्तिशाली मीडिया हाउस ने सरकारी विज्ञापन पाने के लिए किन-किन कारणों से जालसाजी और फर्जीवाड़ा किया और उस फर्जीवाड़ा में कौन-कौन से सरकारी पदाधिकारी शामिल थे।

धारा 164 के तहत सरकारी गवाह के लिपिबद्ध बयान ने केन्द्र और राज्य सरकारों को एक तरह से सचेत कर दिया है कि देश के शक्तिशाली मीडिया हाउस धन कमाने की अंधी दौड़ में सरकारी पदाधिकारियों को मेल में लेकर किस हद तक जालसाजी कर सकते हैं और जालसाजी कर किस प्रकार करोड़ों-अरबों रुपयों की लूट मचा सकते हैं। और बात-बात में ये मीडिया हाउस केन्द्र और राज्य सरकारों को आंख दिखाने में भी नहीं चूकते हैं।

पुलिस अधीक्षक पी. कन्नन के आदेश पर कोतवाली थाना अपराध संख्या- 445/2012 में पुलिस अनुसंधानकर्ता सह कोतवाली के आरक्षी निरीक्षक ने पुलिस अभियोजन के समर्थन में मुंगेर के मंगल बाजार ,गुमटी नं.-3 निवासी आरटीआई कार्यकर्ता, अधिवक्ता और पत्रकार श्रीकृष्ण प्रसाद को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एमके सिन्हा के समक्ष दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत बयान के लिए पेश किया। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एमके सिन्हा के आदेश पर प्रथम श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी डीएन भारद्वाज ने पुलिस के गवाह श्रीकृष्ण प्रसाद का बयान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत लिपिबद्ध किया।

प्रथम श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी डीएन भारद्वाज के समक्ष अधिवक्ता व पत्रकार श्रीकृष्ण प्रसाद ने धारा 164 के तहत बयान किया है कि –‘‘वे बिना किसी भय या दबाव के यह बयान दे रहे हैं। भारत सरकार के डीएवीपी की विज्ञापन सूची में शामिल होने के लिए शर्त यह है कि अखबार को प्रेस रजिस्ट्रार से निबंधन संख्या प्राप्त हो और अखबार 36 माह अर्थात तीन वर्ष लगातार नए मुद्रण केन्द्र से प्रकाशित हो। इन दोनों शर्तों को पूरा करने के बाद ही डीएवीपी की विज्ञापन सूची में अखबार को जोड़ा जा सकता है। परन्तु दैनिक हिन्दुस्तान ने मुजफ्फरपुर और भागलपुर संस्करण बिना निबंधन संख्या के अवैध ढंग से प्रकाशित किया और धोखाधड़ी और जालसाजी कर भारत सरकार के डीएवीपी की विज्ञापन सूची में अपने को दर्ज करा लिया और ‘विज्ञापन-दर‘ प्राप्त कर लिया।‘‘

श्रीकृष्ण प्रसाद ने आगे बयान दिया कि – ‘‘डीएवीपी को धोखा देकर विज्ञापन प्राप्त कर प्रबंधन ने बिहार सरकार के सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय, पटना के कुछ वरीय पदाधिकारियों की मिलीभगत से भागलपुर और मुंगेर के हिन्दुस्तान के अवैध संस्करणों के माध्यम से अवैध विज्ञापन प्रकाशित कर सरकारी विभागों को करोड़ों-करोड़ रुपए का चूना लगाया। बिहार सरकार की अंकेक्षण रिपोर्ट में इस विज्ञापन घोटाले के प्रकाश में आने के बाद सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय, पटना के पदाधिकारियों ने घोटाले पर पर्दा डालने के लिए अखबार के प्रबंधन से कई प्रकार के दस्तावेज तैयार करवाए।‘‘

श्रीप्रसाद के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि 36 माह तक बिना सरकारी विज्ञापन के अखबार छापने की कानूनी बाध्यता से बचने के लिए अंधी कमाई की दौड़ में प्रबंधन ने कागजात में फर्जीवाड़ा कर डीएवीपी विज्ञापन-दर प्राप्त किया और उस विज्ञापन-दर को आधार बताकर बिहार के सरकारी विभागों से करोड़ों-करोड़ रुपया अवैध ढंग से छापकर विज्ञापन लूट की घटना को अंजाम दिया। इस विज्ञापन घोटाला में पहले से नामजद अभियुक्तों में शामिल हैं मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड की अध्यक्ष व पूर्व सांसद शोभना भरतिया, मुद्रक और प्रकाशक अमित चोपड़ा, प्रधान संपादक शशि शेखर, कार्यकारी संपादक अकु श्रीवास्तव, स्थानीय संपादक बिनोद बंधु। इस सनसनीखेज कांड के सूचक हैं आरटीआई कार्यकर्ता मन्टू शर्मा।

मुंगेर से काशी प्रसाद की रिपोर्ट.


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