हिंदुस्‍तान विज्ञापन घोटाला : पुलिस ने डीएवीपी से मांगा कई सवालों के जवाब

मुंगेर। 200 करोड़ के दैनिक हिन्दुस्तान के विज्ञापन घोटाले में आरक्षी अधीक्षक पी. कन्नन के निर्देशन में आरक्षी उपाधीक्षक (मुख्यालय) अरुण कुमार पंचालर की ओर से दी गई पर्यवेक्षण रिपोर्ट में बिहार पुलिस ने भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के ‘‘विज्ञापन एवं प्रचार निदेशालय (डीएवीपी)'', नई दिल्ली को भी जांच के दायरे में अब ले लिया है। उच्च पदस्थ पुलिस सूत्रों ने आज बताया कि पुलिस उपाधीक्षक ने डीएवीपी से निम्नवर्णित कानूनी बिन्दुओं पर प्रतिवेदन प्राप्त करने का लिखित आदेश जांचकर्ता को जारी कर दिया है।

मुंगेर पुलिस ने डीएवीपी, नई दिल्ली को इन बिंदुओं पर जवाब देने को कहा है कि –

1- वर्ष 2001 में किसी भी समाचार पत्र में सरकारी विज्ञापनों के प्रकाशन की क्या प्रक्रिया थी? डीएवीपी से मार्ग-निर्देशिका को प्राप्त करें।

2- डीएवीपी ने बिहार के भागलपुर और मुजफ्फरपुर से मुद्रित/प्रकाशित दैनिक ‘हिन्दुस्तान‘ को किस आधार पर एवं किस तिथि से सरकारी विज्ञापन प्रकाशित करने की स्वीकृति दी?

3- क्या भागलपुर और मुजफ्फरपुर से मुद्रित/प्रकाशित दैनिक हिन्दुस्तान में प्रकाशित होने वाले सरकारी विज्ञापनों के लिए पटना से प्रकाशित होनेवाले विज्ञापनों के समानान्तर ही ‘दर‘ का निर्धारण किया गया या उन दोनों स्थानों के लिए अलग से ‘विज्ञापन दर‘ का निर्धारण किया गया?

बिहार पुलिस द्वारा डीएवीपी, नई दिल्ली से उपर वर्णित कानूनी बिन्दुओं पर प्रतिवेदन मांगने के लिखित आदेश जारी होने के बाद हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाले की जांच की आंच अब डीएवीपी, नई दिल्ली कार्यालय पहुंच गई है। उच्च पदस्थ पुलिस सूत्रों ने बताया कि ज्यों-ज्यों हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाले की जांच बढ़ती जा रही है, घोटाले के नए-नए पहलू और घोटाले के नए-नए संरक्षणकर्ताओं के चेहरे भी सामने आ रहे हैं।

स्मरणीय है कि पर्यवेक्षण रिपोर्ट में सूचक मंटू शर्मा के द्वारा मुंगेर न्यायालय मे दर्ज परिवाद-पत्र में लगाए गए सभी अभियोग को सभी नामजद अभियुक्तों के विरुद्ध प्रथम दृष्टया सत्य घोषित कर दिया है। पुलिस ने पर्यवेक्षण रिपोर्ट में नामजद अभियुक्तों क्रमशः मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड की अध्यक्ष एवं ऐडिटोरियल डायरेक्टर शोभना भरतीया, मुद्रक और प्रकाशक अमित चोपड़ा, प्रधान संपादक शशि शेखर, कार्यकारी संपादक अकु श्रीवास्तव और स्थानीय संपादक बिनोद बंधु के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 471, 476 और प्रेस एण्ड रजिस्‍ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की धारा 8(बी), 14 और 15 के तहत लगाए गए सभी अभियोग को प्रथम दृष्टया सत्य पाया है। अब पुलिस इन सभी नामजद अभियुक्तों के विरुद्ध न्यायालय में मुकदमा चलाएगी। इस मुकदमे में अभियुक्त बच नहीं सके, पुलिस ने सूचक सहित चार गवाहों की गवाही भी मुंगेर न्यायालय में अभियोग के समर्थन में धारा 164 के अधीन करा चुकी है। अब इस सनसनीखेज आर्थिक अपराध से जुड़े कांड मे पुलिस को न्यायालय में अभियोग-पत्र समर्पित करना है।

मुंगेर से श्रीकृष्ण प्रसाद की रिपोर्ट. इनसे संपर्क मोबाइल नं.- 09470400813 के जरिए किया जा सकता है.


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