हिंदुस्‍तान विज्ञापन घोटाला : पुलिस ने प्रेस रजिस्‍ट्रार से पूछा – मुंगेर संस्‍करण वैध या अवैध?

मुंगेर। सनसनीखेज 200 करोड़ के दैनिक हिन्दुस्तान के विज्ञापन घोटाले में चल रहे जांच में उस समय नया मोड़ आ गया जब पुलिस अधीक्षक पी. कन्नन के निर्देश पर पुलिस उपाधीक्षक एके पंचालर ने इस आर्थिक अपराध के बड़े मामले में भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रेस रजिस्ट्रार कार्यालय, नई दिल्ली को भी जांच के दायरे में शामिल कर लिया है। देश की आजादी के बाद संभवतः यह पहली घटना है जब किसी आर्थिक अपराध के बड़े मामले में प्रेस रजिस्ट्रार कार्यालय को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया हो।

उच्च पदस्थ पुलिस सूत्रों ने आज बताया कि पुलिस उपाधीक्षक एके पंचालर ने अनुसंधानकर्ता को लिखित आदेश देकर निम्नांकित बिन्दुओं पर प्रेस रजिस्ट्रार, नई दिल्ली से प्रतिवेदन प्राप्त करने का आदेश जारी किया है।

1- प्रेस रजिस्ट्रार, नई दिल्ली प्रेतिवेदन दें कि किसी भी स्थान से समाचार-पत्र के मुद्रण/प्रकाशन हेतु घोषणा-पत्र समर्पित करने एवं मुद्रण/प्रकाशन का कार्य प्रारंभ करने के बीच की क्या-क्या प्रक्रिया है?

2- प्रेस रजिस्ट्रार, नई दिल्ली प्रतिवेदन दें कि दैनिक हिन्दुस्तान के प्रतिनिधियों द्वारा पर्यवेक्षण के क्रम में बताया गया है कि किसी भी नए संस्करण के प्रकाशन हेतु घोषणा-पत्र समर्पित करना, उसका प्रमाणीकरण कराना एवं प्रेस रजिस्ट्रार की अनुमति प्राप्त करना आवश्यक नहीं है। फलस्वरूप, मुंगेर संस्करण का प्रकाशन प्रारंभ किया गया। इस संबंध में प्रेस रजिस्‍ट्रार स्पष्ट मंतव्य दें कि क्या उक्त कथन सही है या नहीं ?साथ ही किसी भी नए संस्करण के प्रकाशन हेतु निर्धारित प्रावधानों की सम्पूर्ण विवरणी भी प्रेतिवेदित करें।

3 – वादी मंटू शर्मा के बयान के अनुसार भागलपुर एवं मुजफ्फरपुर में दैनिक हिन्दुस्तान के पटना संस्करण का ही मुद्रण केन्द्र होने की स्थिति में पटना से प्रकाशित समाचार ही भागलपुर और मुजफ्फरपुर से भी प्रकाशित करने का प्रावधान है। भागलपुर और मुजफ्फरपुर में पटना से अलग स्थानीय समाचार प्रकाशित नहीं किय जा सकते हैं, जबकि इन दोनों स्थानों से मुद्रित होने वाले दैनिक हिन्दुस्तान में पटना से भिन्न स्थानीय समाचारों का मुद्रण किया गया है। साथ ही स्थानीय विज्ञापन भी प्राप्त किया है। ऐसा करने से पीआरबी एक्ट में निहित प्रावधानों का उल्लंघन हुआ अथवा नहीं है? इस संबंध में प्रेस रजिस्ट्रार जानकारी दें।

उच्च पदस्थ पुलिस सूत्रों ने बताया कि ज्यों-ज्यों हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाले की जांच बढ़ती जा रही है, घोटाले के नए-नए पहलू और घोटाले के नए-नए संरक्षणकर्ताओं के चेहरे भी सामने आ रहे हैं। स्मरणीय है कि पर्यवेक्षण रिपोर्ट में सूचक मंटू शर्मा के द्वारा मुंगेर न्यायालय मे दर्ज परिवाद-पत्र में लगाए गए सभी अभियोग को सभी नामजद अभियुक्तों के विरूद्ध प्रथम दृष्टया सत्य घोषित कर दिया है। पुलिस ने पर्यवेक्षण रिपोर्ट में नामजद अभियुक्तों क्रमशः मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्स लिमिटेड की अध्यक्ष एवं ऐडिटोरियल डायरेक्टर शोभना भरतिया, मुद्रक और प्रकाशक अमित चोपड़ा, प्रधान संपादक शशि शेखर, कार्यकारी संपादक अकु श्रीवास्तव और स्थानीय संपादक बिनोद बंधु के विरूद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420/471/476 और प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की धारा 8 (बी), 14 और 15 के तहत लगाए गए सभी अभियोग को प्रथम दृष्टया सत्य पाया है। अब पुलिस इन सभी नामजद अभियुक्तों के विरूद्ध न्यायालय में मुकदमा चलाएगी। इस मुकदमे में अभियुक्त बच नहीं सके, पुलिस ने सूचक सहित चार गवाहों की गवाही भी मुंगेर न्यायालय में अभियोग के समर्थन में धारा 164 के अधीन करा चुकी है। अब इस सनसनीखेज आर्थिक अपराध से जुड़े कांड में पुलिस को न्यायालय में अभियोग -पत्र समर्पित करना है।

इस बीच, मंटू शर्मा ने सीबीआई के आर्थिक कोषांग के प्रभारी से दैनिक हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और देश के अन्य दैनिक अखबारों के विज्ञापन फर्जीवाड़ा की जांच राष्‍ट्रीय स्तर पर भी शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रेस की आजादी के नाम पर देश के मीडिया कारपोरेट केवल फर्जीवाड़ा और देश के लोकतंत्र की जड़ को कमजोर करने में दशकों से जुटे हैं।

मुंगेर से श्रीकृष्ण प्रसाद की रिपोर्ट. इनसे संपर्क मोबाईल नं.- 09470400813 के जरिए किया जा सकता है.


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