हिंदू धर्म का मोदी छाप हिंदुत्व से कोई नाता नहीं है

Shambhunath Shukla : अहं ब्रह्मस्मि यानी अनहलहक! … नरेंद्र भाई मोदी को कुछ लोग हिंदुत्व का नवोन्मेषक मान कर चल रहे हैं। लेकिन इस हिंदुत्व का उस सहिष्णु हिंदू धर्म से कोई लेना देना नहीं है जिसकी कल्पना आदि शंकराचार्य ने अहं ब्रह्मस्मि या अनहलहक के रूप में की थी। अद्वैतवाद और वेदांत में समाहित हिंदू धर्म का मोदी छाप हिंदुत्व से कोई नाता नहीं है। क्या जो हिंदू कांग्रेस को, सपा को, बसपा को, राजद को, जदयू को, वाम दलों को, द्रमुक अन्ना द्रमुक और यहां तक कि मुसलिम लीग को वोट देते हैं वे क्या हिंदू नहीं हैं? अगर नहीं हैं तो फिर देश में हिंदू अल्पसंख्यक हैं।

जिस हिंदी पर आप गर्व करते हैं वह मुसलमानों की देन है। अयोध्या के हनुमान गढ़ी मंदिर को मुसलिम नवाब शुजाउद्दौला ने बनवाया था। चित्रकूट के राम जानकी मंदिर को जमीन औरंगजेब ने दी थी। मलिक मोहम्मद जायसी वह कवि थे जिन्होंने अवधी का संस्कृत से प्रेमालाप कराया। यह मैं नहीं आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने कहा है। मालूम हो कि तुलसी ने मलिक मोहम्मद जायसी की नकल की है। इसीलिए तुलसी ने कभी भी मुसलिम शासकों या समुदाय की निंदा नहीं की है। उलटे वे तो खुद ही लिखते हैं- मांग के खाइबो को मसीत में सोइबे को।

रसखान को भक्तमाल ने 52 वैष्णवों में शामिल किया है। ध्यान रहे कि रसखान कोई हिंदू नहीं हुए थे उनकी मजार आज भी कृष्णधाम में है। वे दिल्ली के शासक वंश से थे। उन्होंने लिखा है-
छांड़ि नगर हित साहिबी, दिल्ली नगर मसान।
छिनहिं बादशाह वंश की, ठसक छांड़ि रसखान।।

इसी तरह अब्दुर्रहीम खानखाना कोई हिंदू नहीं थे वरन् वे तो अकबर के नौरत्नों में से थे। उनके पिता महान मुगल सम्राट अकबर के संरक्षक थे। जिस तरह के कवित्त रहीम ने लिखे हैं वैसे वे कट्टर हिंदू नहीं लिख पाएंगे जो इस नव हिंदुत्व के पीछे पगलाए घूम रहे हैं। रहीम को दोहा है-

रे मन भज निसि बासर, श्री बलबीर।
जो बिन जांचे टारत, जन की पीर॥

जब मुसलमान इस देश के शासक थे तब उन्होंने हिंदुओं का बाल बांका नहीं किया तो आज उनके साथ भेदभाव क्यों होगा। लेकिन बहुसंख्यक हिंदू मुसलिम विरोधी नहीं है बल्कि वे अल्पसंख्यक हिंदू मुसलिम विरोध की राजनीति कर रहे हैं जो अज्ञानी हैं।

वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ला के फेसबुक वॉल से.

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उपरोक्त पोस्ट पर फेसबुक पर आईं कुछ टिप्पणियां इस प्रकार हैं..

Vikas Asati Modi ji next P.M.
 
Sandeep Verma संघी अपने मतलब का इतिहास बना कर पढ़ाते है . यह इतिहास तो उनकी लुटिया डूबा देगा . इसको तुरंत सेंसर कीजिए ,कही मोदिवा देख लिहिस तो आग बबूला हो जईहे .
 
Shailendra Singh आप जिस समय काल की बात कर रहे है उसमे और आज में बहुत फर्क आ गया है …. उस समय भी मीना बाज़ार सजता था , ज़ज़िया कर लगा था , जबरन लोग मुसलमान बनाये गये थे और मन्दिर तोड़े गये थे …. तब भी सारे मुसलमान बुरे नहीं थे , आज भी सारे मुसलमान बुरे नहीं है , बस सियासतदार उनके एक होकर , एकमुश्त वोट डालने की आदत का फायदा उठा रहे है … अगर ये मसलमानों के सच्चे हितैषी होते तो उनके विकास के लिये काम करते … जरा बता दे किसने मुसलमानों के विकास का काम किया है सिवाय वोट लेने के …
 
Pawan Mishra Shailendra /h=Ji bahut khoob, lekin afsoos ki baat yah hai ki kya aaj ka Muslim abhi tak ye nahi samajh paya ki Congress, SP, BSP va anya dal jo Muslims ki Rajneet karte haain unhone ab tak inhe kya diya ? Sirf aur sirf is community ka fayda utha kar SATTA hasil ki hai chahe vo Central ki Rajneet ho ya Pradesh ki. Asal samya inki apni mansikta hai jo kisi ek (khas kar inke varisht jan) ke kehne par ek chal me chal dete hain.
 
Shravan Kumar Shukla शैलेन्द्र सिंह से सौ फीसदी सहमत हूँ! शुक्ल जी, अगला ठिकाना कहीं विधानमंडल या राज्यसभा का तो नहीं ढूंढ रहे आप? आखिर आप बड़े* सेकुलर पत्रकार जो ठहरे..!
 
Shailendra Singh Ji Pawan ji ekdam sahi kaha aapne … darasal asiksha , pariwar niyojan ka n hona , aurato ko poori tarah viksit samaj ke saath na rakhna tamam bate hai jo ek had tak us samaj ko andhkar me rakhe hai … aur ye chalak siyasatdar unki is masoom kamjori ka nazayaz fayada uthate hai ..
 
Faraz Khan Very good Sir.Modi ka Hindutva to apne buzurgon ko apmanit karna sikhata hai..
 
Jagat Sharma aap itihash ka punarpaath kijiye uske baaad hi muslimgatha ka gayan kare kya is desh me ya vish me kahi bhi koi muslim darsan se prabhabit hokar musalman bana he isaiyo ki bhi to misnri he jo seva karti he aur baad me lobh dekar dharmantaran itihash ka panna panna hamare khun aur hamari matao ke johar ki aag se bhara pada he
 
Satyam Mishra सच मानिए तो आज की तारीख़ में इन 'हिंदुत्व का शंखनाद' करने वालों और 'एक ही विकल्प' के पीछे भागने वालों से बड़ा हिंदुत्व का शत्रु और कोई नहीं है.
कल जिस तरह सुब्रमण्यन स्वामी ने ट्विटर पर धर्मनिरपेक्षों को हिजड़ा कहते हुए राष्ट्र के सामने दो विकल्प रखे कि वो या तो 'विराट हिन्दू सभ्यता' चुन ले या 'हिजड़ा' (धर्मनिरपेक्ष) होना… कम से कम इससे तो यही लगता है.
इन्हें धर्म के नवोन्मेष/उत्थान/सुधार से कुछ लेना देना नहीं…सिर्फ़ वोट और सत्ता चाहिये (चाहे जिस कीमत पर मिले )….

और आपकी इस बात से कत्तई सहमत नहीं हूँ कि ऐसी राजनीति सिर्फ 'अज्ञानी' कर रहे हैं और इन्हें वर्तमान भारतीय सभ्यता-संस्कृति को मध्यकाल की देन के बारे में पता नहीं.
ये अज्ञानी नहीं हैं… ##### हैं (आपकी दीवाल है गालियाँ क्या दूँ…). ये सिर्फ़ लोगों को बरगलाने और झूठे भय दिखा कर भयादोहन करने में लगे हैं… अच्छी तरह जानते-बूझते हुए… अज्ञानी वो हैं जो इनके पीछे आँख मूंदकर दौड़ रहे हैं…

और अज्ञान कहीं भी हो उसके लिए ज्ञानी लोग भी उतने ही जिम्मेदार हैं….

अच्छा लगा कि आपने ऐसे समय में यह बातें लिक्खीं जब फेसबुक पर "नमो नमो" की धूम मची हुई है. बहुत बहुत धन्यवाद!
 
Abhishek Pandey kya baat hai shukla ji, aap Muslims ki tarif kar rahe ya fir modi ka virodh… aap jaise log honge toh kuch hi dino me bharat me roza aur ramjaan hi rastriye mahotsav-utsav hoga….
sharm aati hai aap ke is safgoi par, kya aap sach me 1 ethical journalist hi hai yafir dong kar rahe hai… apni lekh aap swatah padiye aur bataiye kya aapne balance kya hai apne lekha me…?
sachchai toh ye hai aapki mansikta aap critics ki kam aur kunthit ki jyada ho chuki hai…!!
ab aap mujhe block kar dijiye, bajaru sahitya padane se na padana jyada uchit hota hai…
sharm aati hai ki maine aap k liye kabhi Guru jaise pavitra shabd ka prayog kiya tha
 
Anil Shukla एकदम सही , सत्यम् मिश्र जी
 
Rajeev Agarwal Shukla ii bilkul aaui oine par ja rahe hain. Aap sabhi logdekh lena congress ya Samajwadi Pary unhe iska inam jaroor degi
 
Purushottam Jha Shukla ji.. Abhi humsab ko milkar rahna chahiye lekin ye bat se main sahmat nahi hu.. Ki mugal kal me hinduo ki raksha hui.. Jabardasti zaziya lena,dharm pariwartan.. etc. Kya aap iske bare me nahi jante.
 
Pradeep Sharma Kabhi kaber bi padhiye sir malum ho jayga aapko
 
Kamal Sadana बहुसंख्यक हिंदू मुसलिम विरोधी नहीं है ,बहुसंख्यक मुसलिम,हिंदू विरोधी नहीं है ,
 
Nirbhay Kulkarni आपकी बात समसामयिक नहीं लेकिन यह सत्य है की यहाँ का इतिहास सन उन्नीस सौ सैतालिस के पहले तक आपके वर्णन अनुसार था, यक्ष प्रश्न यह है की ..
क्यों जिन्ना को अखंड भारत का पहला प्रधानमंत्री मानने से इनकार किया गया? और कौन हिन्दुस्तान में हिन्दुओं को इसा और मूसा के बीच भिड़ा कर गया? , किसने हिन्दुस्तान की आज़ादी की कीमत यहाँ के शहीदों जो की सभी धर्मों के थे को छोड़कर भारत को एक बाज़ार बनाकर अदा की? , कौन ऐसा भडवा रहा जिसने ब्रिटिश हुकूमत से यह सब बारगेनिंग की ? किसने "ग़दर " को "स्वतंत्रता की लड़ाई" में बदला? किसने गदर की भाषा जो "उर्दू" थी को "हिंदी" साबित किया ?
निःसंदेह आज हम उसी की फसल काट रहे है।
 
Udaynarayan Singh Nirjhar मालुम पडता है,आप इतिहास नहीं पढते, मुहम्मद गोरी , नादिरशाह औरंगजेब आदि मुस्लिम लुटेरों और शासकों ने भारत को लूटने और हिन्दू को मुसलमान बनाने यहॉ की संस्कृति मिटाने में ही अपना पूरा बल लगाया है, भारत में आज जितने मुसलमान हैं उनमें अधिक से अधिक हिन्दू से मुसल मान बने हैं.जो हारा कट्टर प्रतिद्वन्दी हैं
 
Satyam Mishra @ निर्भय कुलकर्णी जी – समसामयिक प्रश्न केवल यही नहीं है कि हम कौन सी फसल काट रहे हैं बल्कि यह भी कि हम कौन सी बो रहे हैं. हिंदुत्व के नाम पर आजकल जिस तरह की घृणा बो रहे हैं ये लोग उससे आपको क्या लगता है समृद्धि-सौहार्द की फासले उगेगीं ?

@ उदयनारायण निर्झर जी – जब आप ही इतिहास पढ़कर बता रहे हैं कि "मुहम्मद गोरी, नादिरशाह, औरंगजेब आदि मुस्लिम लुटेरों और शासकों (मैं डिक्टेटर मान लेता हूँ) ने भारत को लूटने और हिन्दू को मुसलमान बनाने यहॉ की संस्कृति मिटाने में ही अपना पूरा बल लगाया है" और भारतीय संस्कृति अभी बची हुई है तो अब (तो इतने खतरनाक लोग भी नहीं रहे) किसका डर है भारतीय संस्कृति को.
और इतिहास के हिसाब से जब मुस्लिम शाशकों द्वारा धार्मिक असहिष्णुता का दौर था तब शायद हिन्दू धर्म को सबसे ज्यादा बल भक्ति आंदोलन ने दिया था मजबूत करने में भी और सुधारने में भी, किसी अतिवादी आंदोलन ने नहीं.
 
Nirbhay Kulkarni Satyam Mishra माफ़ कीजियेगा आप बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी में है की हम बो रहे है , आज भी हम उसी फसल को ही काट रहे है जो आज़ादी के समय से बोई गई है। आप जब तक सभी प्रश्नों का जवाब नहीं देंगे तब तक मै यही मानूंगा की आप एक ही सोच को पेल रहे है और इन्ही सवालों के जवाबों में हर राज छुपा है।
 
Nirbhay Kulkarni Satyam Mishra आपके इस तथ्य " और इतिहास के हिसाब से जब मुस्लिम शाशकों द्वारा धार्मिक असहिष्णुता का दौर था तब शायद हिन्दू धर्म को सबसे ज्यादा बल भक्ति आंदोलन ने दिया था मजबूत करने में भी और सुधारने में भी, किसी अतिवादी आंदोलन ने नहीं."

पर स्पष्ट कर दूँ उस वक़्त "राजशाही" थी आज "लोकतंत्र" है , आज का भक्तिवाद आन्दोलन भी आपको साम्प्रदायिक दिखेगा, रामदेव बाबा के अहिंसात्मक कार्य में समग्र हिन्दुस्तान ने देखा किस प्रकार निरपराध लोगों को सोते में पीटा गया। कैसे कोई मान ले की अभी स्थिति खतरनाक नहीं है ?
 
Nitin Thakur Shravan Kumar Shukla इतना गुस्सा? महज़ कमेंट करके काम नहीं चलता क्या भाई जो निजी हो जाते हो?
 
Dinesh Kumar Garg Narendra Modi Bhayanak hai to unhe panapane ke liye zamin kaun banata hai yeh bhi sochane ki baat hai, khood minorities ka radicalism and political parties ki minorityism non-minorities ke hriday mein bhay aur sandeh ke beej bote hai. Pakistaan banane ke baad Jinna wale language minority ke neta aur spokesman use kareinge to Modion ka avataar hona kya rookega. Aap hi bataaiyen kya congress, kutch regional parties aur leftist khood vahi baatein nahi kar rahi hain jo Pakistaan banane wale netaon ne preceding century ke thirties aur fortieths mein kee theein?Janata ko Hindu aur Mohammedan ke roop mein dekhane ke bajay haves and have-nots ke hi khaanche mein dekha jaana chaahiye.
 
Acharya Shilak Ram वाह ! क्या कमाल की जानकारी है (अयोध्या के हनुमान गढ़ी मंदिर को मुसलिम नवाब शुजाउद्दौला ने बनवाया था। चित्रकूट के राम जानकी मंदिर को जमीन औरंगजेब ने दी थी) डूब मरो
 
Dinesh Kumar Garg kaun doob mare? voh jo zameen de raha hai ya voh jisaki zameen thi.
 
Vineet Chaudhary Shambhunath Shukla liked ur comments & request u to use these thoughts in a editorial of a National daily.
 
Ankur Agarwal सवाल । गंभीर और प्रासंगिक है ।
 
Ankur Agarwal डूब मरो Shambhunath Shukla
 
Mohammad Kashif True.
 
Siddhartha Rastogi एकदम सटीक उदाहरण लिये हैं शुक्ल जी। इन उदाहरणों में अब कृपया यह भी जोड़ लें कि किस प्रकार नरेंन्द्र मोदी ने सरखेज रोज़ा, जामी मस्जिद, और झूलता मीनारा आदि का जीर्णोद्धार करवाया है। हालांकि मैनें यह जीर्णोद्धार स्वंय होते देखा है, आपकी तसल्ली के लिये:
http://www.manushi.in/print-article.php?articleid=1698

Ramanuj Pandey jaichand or man sinh v hindu the ye na hote to desh ka ye hal na hota or aapake kalam me ye kamal na hota
 
Vivek Sharma बड़े बड़े लोगो की बड़ी बातें ….. "तू हिन्दू है , मै मुस्लिम हूँ … तू मेरी गाय का दूध ना पी … मै तेरे घर का पानी ना लू …. दोनों प्यासे मर जायेंगे ,, ओर शायद ऐसे ही मिट जाएंगे … "
 
Prashant Kumar Mishra Sir,aap aurangjeb ke ek mandir ke liye diye jamin par gadgad hain.Hajaro hindu dharmawalambiyon ko marwa diya uspar bhi kuch kahiye
 
Blooming India safed jhoot ko asthapit kiya jay fir kaha jaye ye galat hai,,yah hai hamara boudhik byayam
 
Rajeev Bhardwaj The most remarkable thing in this entire discussion is that Shukla ji has started the debate afresh which has been the hot topic since very long. The discussion is continued between people of different approaches but shuklaji is silent……….. no further comments from his mighty pen. Reason????????? May be by denouncing Hinduism and criticizing Modi and others, He is also heading on the same path which has been tread by Salman Rushdie and Taslima Nasrin by denouncing Mohammadanism in past.
I remember a comment of Shuklaji in past where he declared himself a non pro-claimer of brahminism that too being a brahmin!!!!!!!!!! It again shows the same approach:-
" Ap jis kul, samaj, dharm, Jati, Rashtra ya sanskriti ka hissa hei uski Alochana ap ko dusron se shreshtha sabit karti hei kuch esi dhaarna, humarey samaj k kuch tatha kathit sammanit sheshtha janon me gahri ghar kar gayi hei".

" Kshama karen shukla ji rok nahi paya ap ne aap ko. No harsh feelings,
 
Rajeev Bhardwaj I believe aap bura nahin manengey.
 
Shambhunath Shukla Siddhartha Rastogi: किसी मसजिद का पुनर्निर्माण करा कर नरेंद्र भाई मोदी कोई दूध के धुले नहीं साबित होते उलटे और संाप्रदायिक ही साबित होते हैं। एक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक देश में सरकारों का काम मंदिर, मसजिद, गुरुद्वारा या चर्च बनवाना नहीं है। मैने जो उदाहरण दिए थे वह मुसलिम काल के हैं जब धर्म राज्य द्वारा पोषित होता था और इसके बावजूद हिंदू मुसलिम सभी राजे अपने-अपने यहां के अलग-अलग धर्मों के स्थल बनवाते थे या उन्हें मदद देते थे।
 
Vinod Tiwari सर आपके द्वारा बहुत ही अच्छा एवं सराहनीय सहयोग प्रदान किया जा रहा है । हमरे लिये प्रेरणादायक है।
 
Shravan Kumar Shukla Nitin thakur.. niji hona padta hai.. kafi dino tak dekhne ke baad.. waise pichhlaggu banna khud ko pasand nahi. auro jaisa
 
Uma Singh ok
 
Sunil Thapliyal Lekin bina kisi Bhedbhav ke Maine ye dekha hey ki anya Samprdaya wale apnehi Mat ko Kuchalne mein itna Utsahit nahin hote, Jitna HINDU naam rakhne wale log Hindutva ka Manmardan karne aur apni Sanskriti ki Burayiyan Dhoondhne mein.Ajkal Brahman ya Pandit ko bataya jata hey ki Vivah ke 6 ghante ke Mantra 30 minute mein khatam karo. To kya aise Vivah ko Hindu Vivah Mana Jaye ? Kya Church ya Gurudware ya Masjid men unke Dharmik Padre, Maulwi ya anya ke saath Badtamiji kabhi karte honge wo log ? Kya isi ka naam Hindu Broadminded Sanskriti Hey ? Kya Shankaracharya 5 Minute mein Shastrarth Poora karke hamre Guru kehlaye ? Kya kisi Scientist ya Professor ko Uski Speech bilkul kam samay mein NIPTANE par jor diya gaya ?
 
Sunil Thapliyal Aur Bhai Saheb, Bangladeshi Writer Tasleema ko India ke Muslim maaf nahin kar rahe kyunki Banladesh ke Hinduon ke baare mein usne kucch kaha,, Kashmiri Panditon ko wahan koi maafi nahin, aur Pakistan ke jo 77 GARIB Hindu Pariwar yahan se wapas nahin jana chahte, Indian Govt aur Media unme koi interest nahin rakhte, SAUDIA mein American aur Indian ke beech ka farq aye din Prakash mein aata rehta hey, Aajkal Global Jamana hey, Aise Hindu sab or se Niraash hokar kya karen, Lanka mein jo hua wo bhi saamne hey, Mein Staunch Hindu nahin hun lekin ye saare sawal mujhe Hinduism cchorkar koi Original Philosophy follow karne ko prerit karte hen kyonki jaise Indian Society mein,repeated Gang Rape hone ke baad sarkon par awaaz lagane se to ye abhishaap kam nahin ho gaya ? Kucch TUOGH kadam to uthane hote hein, ANYAYA ke khilaf, Chahe kisi bhi Kaum ke saath anyaya ho raha ho??? Kewal Hindu bura hey, es theory se to tang aa gaya hun sun sunkar.

Nitin Thakur Shravan Kumar Shukla मगर अलग दिखने के लिए ज़रूरी नहीं कि वही किया जाए जो अक्सर कमअक्ल और मशहूरी के भूखे करते हैं,औरों की तरह।

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