हेम मिश्रा की रिहाई से बढ़कर कोई भी सवाल करना बेमानी है

Himanshu Kumar : हेम मिश्रा को पुलिस ने पकड़ लिया. आप अगर आदिवासी इलाके में जायेंगे तो आप भी पकड़े जा सकते हैं. आखिर आदिवासी इलाके में जाना क्यों खतरनाक है? क्योंकि आदिवासी इलाके में नक्सलवादी रहते हैं. और हो सकता है आप आदिवासी इलाके में जाकर नक्सलवादियों को कोई मदद पहुंचा दें. यूँ तो मुंबई में भी भाई लोग रहते हैं लेकिन मुंबई जाना तो मना नहीं है? इसलिये सच्चाई यह नहीं है कि नक्सलियों के कारण आपके लिये आदिवासियों के इलाके में जाना खतरनाक बात है.

असल में सरकार चाहती ही नहीं है कि आदिवासी इलाके में कोई जाकर सच्चाई की छानबीन करे. इसलिये सरकार सच बोलने पर बिनायक सेन को जेल में डाल देती है, जीतेन मरांडी, अपर्णा मरांडी, आरती मांझी, सोनी सोरी, लिंगा कोडोपी, दयामनी बरला, कोपा कुंजाम, सुखनाथ, कर्तम जोगा और हजारों दूसरे लोगों को जेल में डाल देती है ताकि जुबान खोलने वाले लोग डर कर चुप रहें.

सरकार आदिवासी इलाके की किस सच्चाई को छिपाना चाहती है. क्या सच में आप नहीं जानते? क्या आपको नहीं पता कि आज हमारे सुरक्षा बलों के सबसे ज़्यादा सैनिक कहाँ गये हुए हैं और क्या कर रहे हैं? हमारे सैनिक आदिवासी इलाकों में भेज दिये गये हैं. आदिवासी इलाकों में हमारे सैनिक क्यों भेज दिये गये हैं? हमारे सैनिक आदिवासी इलाकों में क्या कर रहे हैं? अगर आपने आज तक यह नहीं जानने की कोशिश ही नहीं करी तो अब पूछना शुरू कीजिये. अरे आपके सैनिक इस देश के ही लोगों के गाँव जला रहे हैं और आप कह्ते हैं आपको पता नहीं है?

खैर आप इस सबको शायद बदलना नहीं चाहते लेकिन कुछ लोग इस सब को बर्दाश्त नहीं कर पाते. वो आपसे ज्यादा देशभक्त होते हैं. वो आपसे ज़्यादा धार्मिक होते हैं. इसलिये वो दूसरों के कष्टों से विचलित हो जाते हैं. इसलिये वो इन अपने देश के आदिवासियों की हालत जानने के लिये जाते हैं. और आपकी पुलिस उन्हें जेल में डाल देती है. पर वो फिर भी जाते रहेंगे, अगर आप जैसे लोग इस समाज में हैं, तो उन जैसे भी होते रहेंगे.  हेम मिश्रा आदिवासी इलाके में गया, उसे आपकी पुलिस ने जेल में डाल दिया. ये मेरी पुलिस नहीं है, ये आदिवासी की पुलिस नहीं है, ये देशभक्त पुलिस नहीं है, ये भ्रष्ट नेताओं की गुलाम पुलिस है. मैं हेम मिश्रा की गिरफ्तारी का विरोध करूँगा.

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Shahnawaz Malik :  वामपंथ के नए चमन अपनी ऊर्जा ठीकठाक काम में लगाने की बजाय दुश्मनों-भेदियों, छद्म क्रांतिकारियों, कॉरपोरेट दलालों की शिनाख्त करने में ज़ाया कर रहे हैं। गोया कि इससे जरूरी कोई सवाल ही नहीं। बेशक सबकी शिनाख्त होनी चाहिए लेकिन ऐसा भी क्या कि लंगोट की तरह चिपक जाइए। फिज़ूल के कमेंट करना, स्टेटस लगा देना और उसपर ज्ञान बखारते रहना। इससे बाहर निकलिए। और भी ग़म हैं ज़माने में शिनाख्त करने के सिवा। बीती रात हेम दा की गिरफ्तारी ने हिलाकर रख दिया है। लड़ाई की तैयारी शुरू करिए। जंतर-मंतर की जगह संसद का घेराव कीजिए। चक्का जाम कीजिए। फिलहाल उनकी रिहाई से बढ़कर कोई भी सवाल करना बेमानी है।

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Ashish Bhardwaj : Hem Mishra की गिरफ़्तारी दरअसल एक दस्तक है. अगर अब आपने इसका विरोध नहीं किया तो कल आपको नक्सलों का "समर्थक-कूरियर-कमांडर-नेता" कह के उठाया जा सकेगा. सो, हेम दा की तत्काल रिहाई के लिए आवाज़ उठाइये! तुरंत!!
 

मानवाधिकारवादी हिमांशु कुमार, पत्रकार शाहनवाज मलिक और आशीष भारद्वाज के फेसबुक वॉल से.

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