‘हे अजीत अंजुम, क्षमा मांग, बड़ों से माफी मांगने में हेठी नहीं होती’

मित्रों, जब फ़ेसबुक पर भड़ास4मीडिया डॉट कॉम की ख़बर साझा की गई तो हमें एकाएक विश्वास नहीं हुआ। किन्तु आज की जनसत्ता की ख़बर से हम बुरी तरह से हिल गये हैं। हम राजेन्द्र यादव की उम्र और वरष्ठिता का आदर करते हैं। वहीं अजित अंजुम एक मर्यादित एवं लोकप्रिय टी.वी. समाचार संपादक एवं वाचक हैं। उन दोनों को लेकर जनसत्ता में प्रकाशित समाचार मन को बहुत दुःख देता है।

हमें अपने बुज़ुर्गों के साथ व्यवहार करना सीखना होगा। यदि उनकी किसी भी बात से हमें कष्ट पहुंचता है तो हमें तालिबानी ढंग के व्यवहार का कोई हक़ नहीं पहुंचता। हमारे पास प्रिंट मीडिया है और टी.वी. चैनल है, हम अपनी प्रतिक्रिया वहां दर्ज करवा सकते हैं। लेखकों ने जो बयान जारी किया है, उस बयान पर डा. नामवर सिंह, केदारनाथ सिंह, अशोक वाजपेयी, मंगलेश डबराल, मैत्रेयी पुष्पा, पंकज बिष्ट, प्रेम पाल शर्मा एवं भारत भारद्वाज के अतिरिक्त अन्य लोगों के भी हस्ताक्षर हैं। मेरी अपने मित्र अजित अंजुम को सलाह है कि राजेन्द्र जी से क्षमा मांग लें। बड़ों से क्षमा मांगने में कभी अपनी हेठी नहीं होती। बड़े इसी बात से ख़ुश हो जाते हैं कि आज भी बच्चे ग़लती करके क्षमा मांग लेते हैं।

तेजेन्द्र शर्मा, लन्दन से.

फेसबुक से साभार.

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