हे आजतक वालों, आपने प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकारों के लिए एक कब्र खोद दी है

Panini Anand : आप अपने घर पर अंबानी का अल्फांज़ो खाएं तो एक कैमरा ज़रूर लगाइएगा अबकी बार. हो सके तो लाइव उसी कटोरे से पैन करके उठा दीजिएगा. प्रिंट और इलेक्ट्रानिक के पत्रकारों के लिए एक कब्र आपने खोद दी है. कई पुलिस अधिकारी सच्चाई बोलने के लिए अब कान पकड़कर बाहर होंगे और आपको बोनस मिलेगा. इतना बड़ा स्टिंग जो किया है आपने. जिससे न तो सपा, भाजपा का कोई नेता बर्खास्त होगा और न ही दंगों की राजनीति रुकेगी.

मरोड़ी जाएगी सच बोलने वाले अधिकारियों की गर्दन और आपके पास उनके लिए न नौकरी है, न प्रतिरक्षा. आपके लिए दंगा प्रभावित इलाके का अधिकारी और पुलिसिए एक टिसू पेपर हैं जिससे आप पोछेंगे और फेंक देंगे. आपकी दुकान चल गई. सच बताने के तरीके तब नहीं इजात हुए जब कैमरा आया. अरे सदियों से सच बताया जाता रहा है. कैमरा सच का धंधा करा रहा है. करते रहिए धंधा. सच के नाम पर दुकान चालू आहे.

पत्रकार पाणिनी आनंद के फेसबुक वॉल से. उपरोक्त पोस्ट पर आईं टिप्पणियां यूं हैं…


    Rangnath Singh मीडिया कर्मियों को अब सूत्रों से भी ख़बर मिलनी कम हो जाएगी…
 
    Panini Anand मसला सूत्रों का नहीं है गुरू. इससे कहीं बड़ा है. आपको जो सच बताए यह सोचकर कि यह ऑफ दि रिकॉर्ड है, उसे आप ऑन रिकॉर्ड कर दें. यह पत्रकारिता नहीं है. दूसरे यह कि ई दरोगा दरोगी को कउनो पुन्न पंडित मदद करने नहीं आएंगे. विश्वसनीयता की शुरुआत ही विश्वासघात से. बनारस में कहते हैं, पार कराए रस्ता, जेबौ से गएन. आपको हमको सबको पता है कि स्टिंग शिरोमणि को दंगों से कितना मरोड़ उठा है. कुकुरमुत्ते की तरह उग आए हैं खाद देखकर.
 
    Panini Anand यह स्टिंग कई सच सामने लाता है लेकिन जिस कदर ग़ैर-ज़िम्मेदाराना है, उसे चूतियापे के अलावा क्या कहा जा सकता है.
 
    Rangnath Singh मेरा आशय भी यही था…
 
    Harshendra Verdhan Panini Anand Vaise Baat Main Damm to hai aapki..vichar kiya Maine..
 
    Vikas Kumar Panini Anand; jb maine esting dekha tha to vah,vah kr utha tha lekin jb aapki baaten padhin to laga ki meri khushi galat thee. shukriya.
   
    Rahul Singh कभी कभी धोखे से सच को सामने लाना पड़ता है…कम से कम, दुष्ट सबके सामने बेनकाब तो हुए, इन्हें देशद्रोह की सजा होनी चाहिए अब मीडिया की जिम्मेदारी है – इन अधिकारियों के साथ खड़े हों, जिन्होंने विश्वास के साथ आपसे बातें साझा की है…मीडिया कर्मियों को चाहें भूख हड़ताल करनी पड़े या आन्दोलॉन…नेतायों को मन मर्जी न करने दें, जनता भी समर्थन में आएगी…
   
    Rahul Singh लेकिन मीडिया कर्मी ये तब कर पायेंगे जब खुद TRP की लड़ाई से आगे बढ़ के कार्य करेंगे…और यदि इस मुद्दे पर मीडिया ने अपनी तागत का एहसास करा दिया तो आगे, ईमानदार अधिकारी वर्ग और हौसले के साथ मीडिया के साथ खड़ा दिखाई देगा…लेकिन, मैं जानता हूँ यह एक स्वप्न की तरह है :I
     
    Panini Anand हमको उनसे वफ़ा की है उम्मीद, जो नहीं जानते वफ़ा क्या है
     
    Ramesh Bhagat सब अपनी दुकान चला रहे हैं और कुछ की आदत है… अपनी आदत से आदमी बाज आता नहीं है…
     
    Arvind Chaturvedi सच में कल पुण्य प्रसून हाथ मलते रह गऐ, दर्शक भी ठगा सा महसूस कर रहे थे। बर्खास्त हुऐ एस.एच.ओ., जो रूटीन जैसी बातें ही कर रहे थे।
   

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