शिमला प्रेस क्लब इन दिनों विवादों में है। सालाना चुनाव 13 अक्तूबर 2009 को हुए थे। कायदे से 13 अक्तूबर 2010 से पहले सालाना चुनाव हो जाने चाहिए थे, जो ढाई साल बीत जाने के बाद भी नहीं कराए जा रहे हैं। प्रेस क्लब शिमला के पांच बार अध्यक्ष एवं तीन बार मुख्य महासचिव रह चुके शिमला के वरिष्ठ पत्रकार कृष्णभानु ने इस सिलसिले में क्लब के मौजूदा अध्यक्ष धनंजय शर्मा को 31 मई 2012 को लम्बा पत्र लिखकर कई गंभीर आरोप लगाए और जल्द इस्तीफा देकर चुनाव करवाने को कहा।
इसका असर हुआ और धनंजय शर्मा ने क्लब की संचालन परिषद की बैठक बुलाकर 27 जून 2012 को साधारण अधिवेशन बुलाने का फैसला लिया। लेकिन इसी बीच क्लब में हजारों रुपयों के गबन की पुख्ता सूचना पूर्व अध्यक्ष कृष्णभानु को मिली। इस बारे में उन्होंने फिर धनंजय को पत्र लिखकर असलियत बताने की मांग की। कृष्णभानु ने इसके लिए मौजूदा अध्यक्ष को 15 जून तक का समय दिया है। उसके बाद थाना सदर शिमला में गबन की एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी है। नीचे प्रस्तुत है, कृष्णभानु द्वारा धनंजय शर्मा को 5 मई 2012 को लिखा पत्र।
श्री धनंजय शर्मा
अध्यक्ष (?)
प्रेस क्लब ऑफ शिमला
पदमदेव कॉम्पलैक्स (धरातल मंजिल)
दि रिज, शिमला (हि.प्र.)
विषय : प्रेस क्लब में हजारों रुपयों का गबन (एक)।
महादेय,
आपके नेतृत्व में प्रेस क्लब शिमला में हजारों रुपयों के गबन की पहली पुख्ता सूचना प्राप्त हुई है। 13 अक्तूबर 2009 को प्रेस क्लब शिमला की संचालन परिषद के लिए चुनाव हुए। निर्वाचन अधिकारी वरिष्ठ पत्रकार श्री सुशील कुमार शर्मा और सहायक निर्वाचन अधिकारी दैनिक भास्कर के श्री साहिल शर्मा थे। नामांकन पत्रों के लिए निर्धारित शुल्क तय था। चुनाव लड़ने के इच्छुकों ने निर्वाचन अधिकारियों से निर्धारित शुल्क जमा कराने के पश्चात नामांकन पत्र खरीदे, भरे और चुनाव लड़ा। नामांकन पत्र शुल्क के जरिए हजारों रुपए निर्वाचन अधिकारियों के पास एकत्रित हुए, जो चुनाव सम्पन्न होने के बाद आपको सौंप दिए गए, लेकिन यह भारी भरकम धनराशि आज तक क्लब के बहीखातों में कहीं दर्ज नहीं है। फलस्वरूप निम्नलिखित प्रश्न उत्पन्न हो गए हैं :-
1. निर्वाचन अधिकारियों ने क्लब के किस पदाधिकारी के पास यह धनराशि जमा कराने के लिए सौंपी?
2. यदि यह धनराशि अध्यक्ष को नहीं सौंपी गई तो अध्यक्ष होने के नाते धनंजय शर्मा ने मामला संचालन परिषद की बैठकों में क्यों नहीं उठाया। ढाई साल पहले क्लब के हजारों रुपए आखिर कौन खा गया?
3. हे धनंजय! क्या आप बताएंगे कि उपरोक्त हजारों रुपए आप नहीं तो कौन डकार गया? कृपया बताएं कि यह हजारों रुपए प्रेस क्लब के किस बही खाते में और किस तारीख को जमा कराए गए?
4. अध्यक्ष होने के नाते मैं इस गबन के लिए आपको व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार मानता हूँ। अतः आपसे कहा जाता है कि 13 अक्तूबर 2009 से अब तक 18 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्याज के साथ गबन की गई हजारों रुपयों की धनराशि क्लब के खाते में जमा कराएं। साथ ही इस गबन की जिम्मेदारी लेते हुए क्लब के साधारण अधिवेशन में क्षमा याचना करें।
5. आपको 15 जून 2012 का समय दिया जाता है। समस्त जानकारी उपलब्ध कराएं, अन्यथा 15 जून के बाद कभी भी थाना सदर में व्यक्तिगत तौर पर आपके विरूद्ध गबन का मामला दर्ज किया जा सकता है।
मैं याद दिला दूं कि मैं इस क्लब का लगातार पांच बार अध्यक्ष रह चुका हूँ। इस संस्था को मैंने और मेरे मित्रों ने लहू से सींचा है। अतः आपके नेतृत्व में इसे कदापि बरबाद नहीं होेने देंगे। धन्यवाद।
भवदीय
(कृष्णभानु)
पूर्व अध्यक्ष
प्रेस क्लब ऑफ शिमला
प्रतिलिपिः-
1. पंजीयक सोसायटीज़ जिला शिमला, शिमला(हि.प्र.)।
2. मुख्य महासचिव प्रेस क्लब ऑफ शिमला (हि.प्र.)।
3. प्रबंध कमेटी के सभी माननीय सदस्य।
4. सभी दैनिक समाचार पत्रों के शिमला स्थित संपादक अथवा ब्यूरो प्रभारियों के ध्यानार्थ। उनसे अनुरोध है कि यह सब हालांकि प्रकाशन हेतु नहीं है तथापि आप इस बारे में अपने विवेकानुसार निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं।
5. क्लब के सभी वरिष्ठतम् एवम् संस्थापक सदस्यों को सूचनार्थ।
इस मामले में अधिक जानकारी के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें –
पत्र भेजकर कृष्णभानु ने कहा – धनंजय इस्तीफा दें या कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें





