हे न्यूज चैनल वालों, सुनो, आइना देखो… तरुण तेजपाल से बड़ा कोई पत्रकार नहीं, ‘तहलका’ से तेवरदार कोई मीडिया ब्रांड नहीं

Yashwant Singh : तरुण तेजपाल ने जो किया, उसकी सजा उन्हें कानून देगा… लेकिन एक बात तो तय है कि पिछले कुछ दशकों में तरुण तेजपाल से बड़ा कोई पत्रकार नहीं हुआ… तहलका से बड़ी कोई मैग्जीन नहीं हुई… तरुण तेजपाल और तहलका के इर्द-गिर्द कोई पत्रकार व कोई मीडिया हाउस नहीं खड़ा हो सकता.. दलालों, ब्लैकमेलरों, पूंजीवादियों के इस दौर में पत्रकारिता क्या होती है, यह तरुण तेजपाल ने करके दिखाया और मैग्जीन कैसी होनी चाहिए, यह तहलका छाप कर बताया… बाकी, हर किसी के जीवन में ब्लैक, डार्क एरियाज होते हैं.. उन्हें तो झेलना ही पड़ेगा… बोलो- हां या ना?

तरुण तेजपाल


Yashwant Singh : सायमा सहर का यौन उत्पीड़न एबीपी न्यूज (पहले स्टार न्यूज) में किया गया तो सायमा हर जगह न्याय के लिए भटकीं, पर एबीपी वालों के मालिक अवीक सरकार से लेकर एबीपी न्यूज के संपादक शाजी जमां तक की जुबान पर ताला बंद रहा… सारे न्यूज चैनल सब कुछ जान कर चुप्पी साधे रहे…. पर अब सब तेजपाल के बहाने तहलका पर पिल पड़े हैं…. आम लोगों को यह सब बातें समझ में नहीं आएंगी… असली दलाल, मक्कार, ब्लैकमेलर, बलात्कारी तो इन बड़े दिखने वाले न्यूज चैनलों में भरे पड़े हैं… तरुण तेजपाल तो अपनी गल्ती के चलते इन कारपोरेट दैत्यों को मौका दे चुके हैं उनके अब तक के सब कुछ किए धरे पर पानी फेरने के लिए..

Yashwant Singh : एनडीटीवी पर रवीश कुमार ने कभी भी बरखा दत्त की दलाली और राडिया टेप पर विमर्श नहीं कराया… पर तहलका व तरुण तेजपाल पर रोज मजमा लगाए बैठे हैं? काहें भाई… ?? पता है हम लोगों को.. एनडीटीवी को पसंद नहीं कि उनसे ज्यादा सरोकारी और तेजतर्रार ब्रांड मार्केट में रहे… सो निपटा रहे हैं भइया… हम लोग एनडीटीवी की भी हकीकत जानते हैं सर.. कहां से पैसा आता है और किस किस तरीके से आता है… सब खबर है… एनडीटीवी के तहलका विरोधी अभियान पर इतना ही कहा जा सकता है कि जिनके घर खुद शीशे के बने हों, वो दूसरे के घरों पर पत्थर नहीं उछाला करते.. डा. प्रणय राय, समझिए और संभलिए… वक्त बड़ा बेरहम होता है और ये बेरहमी सबके लिए होती है….

Yashwant Singh : सुधीर चौधरी बता रहे हैं जी न्यूज पर तहलका ने कौन सी खबर रोकी और किसका पैसा लगवाया… अरे भाई सुधीर.. तहलका ने तो दस प्रतिशत डील की होगी जो कि नार्मल बिजनेस डील माना जाता है… अगर नब्बे फीसदी कंटेंट आपका फ्री है तो आपसे बड़ा कोई मीडिया हाउस नहीं … तहलका ऐसा ही है.. लेकिन खुद अपने आपको और अपने मालिक सुभाष चंद्रा को देखिए… जिंदल से खबर रोकने के लिए पैसा मांगते ऐसा वीडियो बना कि जेल हो आए…. सुभाष चंद्रा जुगाड़ लगाकर जेल जाने से बच गया.. लेकिन दुनिया को तो पता चल गया न कि सुधीर चौधरी आधुनिक पत्रकारिता के ब्लैकमेलरों का प्रतिनिधि चेहरा है… अब आपके मुंह से शोभा नहीं देता तहलका की बुराई करना.. तहलका के जो कंटेंट अब तक प्रकाशित हुए हैं, उसका पंद्रह बीस प्रतिशत भी जी न्यूज पर दिखा देते तो जनता आपके चरण चूमती.. लेकिन आप नहीं समझेंगे क्योंकि आप लोगों को जनता जनार्दन मूर्ख नजर आती है, साथ ही स्मृति लोप की शिकार भी… तहलका जैसी मैग्जीन चलाने और तरुण तेजपाल जैसी पत्रकारिता करने के लिए आपको अभी कई जनम लेने पड़ेंगे…

Yashwant Singh : बुढ़ापे के शिकार होते जा रहे आशुतोष भी चेहरे पर लीपापोती करके कुछ डंका टाइप बजाते हुए आईबीएन7 पर तहलका की पत्रकारिता पर डमडमाडमडम कर रहे थे.. अरे आशुतोष महराज… अपने यहां से तीन-चार सौ लोगों को निकाल खाया, एक बोली तक नहीं निकली आपके मुंह से… अंबानी के गोद में रातोंरात बैठ गए, एक बार भी सफाई नहीं दी कि अब अंबानी के खिलाफ कैसे डंका बजा सकेंगे… जब आप लोग कारपोरेट के गोद में पूरी तरह बैठ चुके हैं तो आपका डर समझ में आता है… तहलका जैसा ब्रांड बचा रहा तो वह कल को आपके और आपके पीछे के खेल को उजागर कर देगा और आप कहीं मुंह दिखाने के लायक नहीं रहेंगे… पर तरुण तेजपाल अपनी करनी से हिट विकेट हो चुके हैं.. इसलिए अभी जितना बोलना है बोल लीजिए… वक्त सबका आता है क्योंकि समय का पहिया चले रे साथी…

Yashwant Singh : पेड न्यूज का सबसे बड़ा माफिया टाइम्स ग्रुप का एक चैनल है टाइम्स नाऊ.. यहां अर्नव गोस्वामी नामक एक जीव रोज अदालत लगाता है और किसी तानाशाह की तरह फैसले सुनाता है, बुलवाता है… आजकल वह तरुण तेजपाल और तहलका पर बातें कर रहा है… पत्रकारिता में पेज3 कल्चर और टाइम्स ग्रुप के मालिकों जैन बंधुओं के बारे में कभी विमर्श कर लो, ताकि लोगों को पता चले कि पेड न्यूज किसने इस देश में शुरू कराया और किसने सैकड़ों हजारों कंपनियों का शेयर लेकर पूरे शेयर मार्केट पर कब्जा करने की रणनीति बनाई .. साथ ही शेयर मार्केट के बारे में निगेटिव खबरें छापने से पूरे ग्रुप को मना करा दिया… बिल्डरों, चिटफंडियों, दलालों, पावर ब्रोकरों, नेताओं, अफसरों की ब्लैकमनी का सबसे ज्यादा व सबसे बड़ा हिस्सा हड़पने वाले अपने मालिकों जैन बंधुओं पर कब बैठेगी आपकी अदालत? बाकी, तरुण तेजपाल जैसी साहसी पत्रकारिता तो आप कर नहीं पाएंगे क्योंकि आपके मालिकों की पूंछ ढेर सारे नेताओं, सरकारों से दबी है.. सो आप आंय बांय सांय करते रहिए.. पर जिन्हें पत्रकारिता की गहराई से समझ है वो जानते हैं कि देश का सबसे बड़ा पत्रकार अगर कोई है तो वो तरुण तेजपाल हैं और सबसे तेवरदार व सरोकारी ब्रांड कोई है तो वो तहलका है… अब तरुण तेजपाल अपनी एक करनी से बुरी तरह फंसे हैं और जेल जाने की ओर हैं तो ढेर सारे कुत्ते उनके पीछे भों भों करने निकल पड़े हैं, जो लाजिमी भी है…

Yashwant Singh :  न्यूज चैनल वालों, कानून को अपना काम करने दो.. तरुण तेजपाल के बहाने 'तहलका' का मीडिया ट्रायल मत करो.. 'तहलका' की पत्रकारिता का अगर दस फीसदी भी अपने यहां उतार लिया तो समझो मीडिया व जनता का बहुत बड़ा उपकार कर दिया… सबके कारनामें सब जानते हैं… हर न्यूज चैनल की एक, दो नहीं बल्कि दर्जनों काली कहानियां हैं… अगर वाकई पत्रकारिता करते हो तो पहले अपनी कहानियां खुद के चैनलों पर चलाने की हिम्मत दिखाओ, फिर 'तहलका' पर गोले दागे… तरुण तेजपाल ने गलत किया है, वे जेल जाएंगे, कानून अपना काम करेगा… यह सही है.. पर तरुण के बहाने तुम लोग 'तहलका' को बर्बाद करने की जो मुहिम चला रहे हो इससे सिर्फ तुम लोगों का भय और तुम लोगों का छिछोरापन-हलकापन ही सामने आता है… पैसे लेकर बड़े नेताओं के लाइव चलाने वालो, कारपोरेट घरानों को शेयर बेचने वाले, मंत्रियों-नौकरशाहों की लाबिंग करने वाले, खबर रोकने के लिए पैसे मांगने वाले, करप्ट नेताओं के ब्लैकमनी से चलने वाले चैनल पर नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले प्रबंधक किस्म के संपादकों की हकीकत किसी से छुपी नहीं हैं… ध्यान रखना, अपनी ताकत का चरम दुरुपयोग होगा 'तहलका' ब्रांड को बदनाम, नष्ट करने की मुहिम चलाना.. हिम्मत हो तो तुम सब 'तहलका' की तरह खुलासे, स्टिंग, पत्रकारिता करके दिखाओ… पर पता है, तुम लोगों के मालिकों ने तुम लोगों की चोटी अपने जांघों के बीच बांध रखी है, इसलिए हिलडुल नहीं सकते हो… रोबोट की तरह बकर बकर करते रहोगे, थूक फेकते हुए.. कम से कम इतना तो लाज रखो कि अपराध जब किसी एक का हो तो बर्बाद पूरे संस्थान-ब्रांड को नहीं करते… ध्यान रखना.. तुम लोगों की 'तहलका' के खिलाफ कुत्सित मुहिम से एक बड़ा फायदा भी होने वाला है… तुम लोगों की सच्चाई भी अब तहलका की ही तरह किसी अन्य जगह पर आने लगेगी क्योंकि जब तुम लोग छल से शिकार करोगे तो कोई तुम लोगों से आमने-सामने भी लड़ने आ जाएगा… दुनिया का दस्तूर यही है.. इसलिए तरुण तेजपाल के अपराध पर बातें करो…. 'तहलका' की पत्रकारिता पर न बोलो क्योंकि तुम्हें खुद पता है कि तहलका जैसा ब्रांड शुरू करना, बढ़ाना और फैलाना पहाड़ जैसा काम है, जिसे तुम जैसे बौने, सेलरीशुदा लोग नहीं कर सकते…

भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से. यशवंत तक अपनी बात yashwant@bhadas4media.com के जरिए पहुंचा सकते हैं.


इन्हें भी पढ़ें…

तेजपाल के नाम पर 'तहलका' को निपटाने में जुट गए न्यूज चैनल वाले

xxx

'तहलका' में कार्यरत दो मीडियाकर्मियों के कुछ बयान…

xxx

दो दिन से तरुण को बेच रहे हैं अर्नव… पर तेजपाल जैसी पत्रकारिता कब करेंगे गोस्वामी?

xxx

पीड़िता सायमा सहर से केस वापस लेने के लिए दीपक चौरसिया दबाव बनाते रहे!

xxx

आइये हम सब पत्रकार भाई एकजुटता दिखाए तेजपाल जी के साथ

xxx

'तहलका' ने जिनका पर्दाफाश किया, वे तरुण तेजपाल कांड में खूब सक्रिय हैं : मंगलेश डबराल

xxx

तेजपाल दोतरफा मारे गए… बेचारे तेजपाल

xxx

यह तुलना न की जाए कि आसाराम और तेजपाल समान हैं : शंभूनाथ शुक्ल

xxx

सुधीर चौधरी के खाने के दांत और दिखाने के और

xxx

तरुण तेजपाल अब माफी के लायक हैं (1)

xxx

तरुण तेजपाल अब माफी के लायक हैं (2)


इस पोस्ट पर कमेंट आफ कर दिया गया है, इसलिए अगर आप कमेंट करने की कोशिश भी करेंगे तो वो एसेप्ट नहीं होगा. आपको जो भी बात कहनी है, भड़ास तक सीधे भेजें, उसे प्रकाशन लायक समझा गया तो प्रकाशित किया जाएगा. भड़ास तक अपनी बात bhadas4media@gmail.com पर मेल करके पहुंचा सकते हैं. -एडिटर, भड़ास4मीडिया

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *