हो सकता है कल राहुल गांधी लिख दें कि – ”कहां हैं संविधान और कोर्ट बनाने वाले…”

Yashwant Singh : राहुल गांधी फेसबुक पर लिखते हैं- ''कहां हैं ह्यूमन राइट्स इंडस्ट्री चलाने वाले…'' कल को वो लिख सकते हैं- ''कहां हैं समानता और बराबरी का ठेका लेने वाले… '' हो सकता है वो परसों के दिन लिख दें कि– '' कहां हैं संविधान और कोर्ट बनाने वाले….''

मैं जो कहना चाह रहा वो ये कि ह्यूमन राइट्स, समानता, आजादी, बराबरी जैसी बुनियादी चीजें किसी की दुकान नहीं, किसी की इंडस्ट्री नहीं, किसी का ठेका नहीं बल्कि ये मनुष्यों के हजारों साल के संघर्ष का नतीजा है… हजारों लाखों करोड़ों लोगों ने कुर्बानी देकर ये अधिकार हासिल किया है जिसे आज हम इंज्वाय करते हुए सहज सरल तरीके से जी पाते हैं, बोल पाते हैं, लिख पाते हैं…

राहुल गांधी से कहना चाहूंगा कि आपके गृह मंत्रालय वालों ने यानि आपकी ही सरकार के लोगों ने महेंद्र कर्मा को जेड प्लस सेक्युरिटी देने की फाइल चार साल से लटका रखी थी… महेंद्र कर्मा नक्सली इलाके में ही रहते थे, वहीं से चुनाव लड़ते थे, वहां रहकर वह नक्सलियों से खुलेआम टकराहट मोल लिए थे… अगर आपको इतनी ही महेंद्र कर्मा की चिंता थी तो क्यों नहीं उनके जेड प्लस के अप्लीकेशन को पास कर दिया और सुरक्षा दिला दी ताकि नक्सली उनकी हत्या नहीं कर पाते… पर आप तो रामगोपाल यादव को जेड प्लस की सुरक्षा दिलाएंगे जिन्हें किसी से कोई खतरा ही नहीं है…

राहुल गांधी, अगर आपकी सहमति से यह फेसबुक स्टेटस अपलोड किया गया है, तो मुझे यह कहने में कतई संकोच नहीं कि राजनीति, मनुष्य, संवेदना और सरोकार को सीखना अभी बाकी है… आप सच में मेच्योर नहीं हैं… अगर ह्यूमन राइट्स को लेकर इतनी घटिया सोच व भाषा का आप इस्तेमाल कर सकते हैं तो समझा जा सकता है कि जब आप खुद पीएम कभी बन गए तो ह्यूमन राइट्स के प्रति किस तरह का एक्शन रिएक्शन आप करेंगे…

मुझे कभी कभी लगता है कि इस देश का भगवान ही मालिक है… वंशवाद के कारण देश प्रदेश की राजनीति नेता पुत्रों के हाथ में चली गई है… ये नेता पुत्र जैसा सोचते हैं, वैसा ही देश प्रदेश बनाएंगे और इनके कंधे पर सवार होकर कारपोरेट मलाई खाएगा… जनता के पाले में सिर्फ और सिर्फ अत्याचार व आंसू रहेंगे…

कल तक आम जन मारे जाते रहे नक्सली इलाकों में तब राहुल गांधी के बोल नहीं फूटे, लेकिन अब जब नेता मारे जाने लगे हैं तो वो बौखला कर ह्यूमन राइट्स वालों पर निशाना साध रहे हैं…

राहुल जी, ह्यूमन राइट्स के लिए महात्मा गांधी से लेकर नेल्सन मंडेला और राजीव गांधी तक ने काम किया है… तो क्या, इन्हें ह्यूमन राइट का इंडस्ट्री चलाने वाला मान लिया जाए? राहुल जी, सोच बदलिए, क्योंकि वक्त बदल गया है. ट्रांसपैरेंट रहिए और सहज रहिए. ओवर स्मार्ट बनने में लेने के देने पड़ जाएंगे क्योंकि पब्लिक सब जानती है. आप उस देश के युवा नेता हैं और भावी पीएम हैं जिसमें सैकड़ों भाषाएं, संस्कृतियां, सोच और सभ्यताएं हैं… आपको अपनी सोच इतनी उदात्त बना लेनी चाहिए कि हर एक को यह भरोसा दे सकें कि उनका भला होगा…. कम से कम इस देश की जनता को यह तसल्ली व भरोसा तो मिलना ही चाहिए कि अगर उनके मानवाधिकार का पुलिस, सिस्टम, नक्सली, इंडस्ट्रलिस्ट, डकैत, नेता, बाहुबली हनन करते हैं तो उन्हें न्याय मिलेगा और न्याय दिलाने के लिए आपको खुद भी मानवाधिकारवादी बनना पड़ सकता है…

अन्यथा, अगर आप सोच नहीं बदल पाए तो कल को आप सुप्रीम कोर्ट की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठा सकते हैं…

फिलहाल तो आज मैं आप यानि Rahul Gandhi को मानवाधिकार के प्रति घटिया भाषा और सोच के कारण शेम शेम कहता हूं…

मुझे मालूम है, आप सरकार हैं, आप राजकुमार हैं, आप देश के पहले नौजवान हैं, इसलिए पता नहीं आपको मेरे इस लिखे पर कितना गुस्सा आ जाए और बदले में जाने क्या क्या दंड मुझे दिलवा दें, लेकिन तब भी मैं कहना चाहूंगा कि मानवाधिकार के प्रति आपकी सोच व भाषा बड़ी घटिया है. मानवाधिकार के फील्ड में कुछ धंधेबाज हैं, पर वो तो हर फील्ड में हैं, नेतागिरी में तो सबसे ज्यादा धंधेबाज हैं, मीडिया में तो हर दूसरा मीडियावाला दलाल है, कोर्ट में भी खूब करप्शन है, तो इससे क्या हम सारे इंस्टीट्यूशन्स को निगेट कर देंगे?

राहुल जी, आप कृपया फिर सोचिएगा, और अपनी भाषा को चेंज करिएगा… हम इंतजार करेंगे.

राहुल गांधी का फेसबुक अपडेट यह है..

Rahul Gandhi
2 hours ago via Mobile
Where is the Human Rights industry now?

Women Maoists stabbed Congress leader
Mahendra Karma 78 times.
For anti-Maoist crusader and Congress
veteran Mahendra Karma, the last few
minutes of his life must have been
excruciatingly tortuous: a handful of
hardened female combatants took turns to
stab him 78 times, making sure they inflicted
maximum pain before he met his end.
— with Rahul Gandhi.

Madan Bhurle Sahi hai boss..

Shravan Kumar Shukla जिसे अपने राइट्स के बारे में न पता हो वह ह्यूमन राइट्स की बात कर भी कैसे सकता है?.. जी हां! आप सही सोच रहे हैं.. मैं 'राहुल' के ही बारे में बोल रहा हूं……..!!!

Shravan Kumar Shukla पूरी तरह सहमत हूँ आपसे! बहुत कुछ सीखने की जरुरत है. एक बात याद आ गई.. . इन्ही की तरह एक और नेता पुत्र हैं.. अखिलेश यादव.. जो ३९ वर्ष के होकर उत्तर प्रदेश के मुखियां है.. रोते-गाते फिर भी काम चला ही रहे हैं.. इस उम्र में उनके 3 बच्चे हैं.. लेकिन राहुल? अरे राहुल तो 44 का होकर भी बच्चा ही है अभी..! अगर जानकारी न हो तो ऐसे बयान देना ही नहीं चाहिए था..

Subhash Gupta mujhe maloom hai,,,,,,,,ap sarkaar hain,,rajkumar hain,,,,is desh k pahle navjawan hain……………very nice line sir..

पंकज कुमार झा अगर राहुल ने ऐसा कहा है तो पहली बार उनके परिपक्वता की दाद देता हूँ. सच में मानव अधिकार आज की तारीख का सबसे घृणित उद्योग है. इस नाम पर दलाली करने वाले सभी लोग किसी भड़ुवे से भी ज्यादा घृणित हैं.

Shravan Kumar Shukla पूरी तरह सहमत हूँ आपसे!

आशीष कुमार 'अंशु' Yashwant Singhbhai vinamra nivedan hai, aap status fir se padhe ..yah manvadhikar kee baat karne walon ke liy naheen hai, yah hai so called 'human right industry' chalane walon ke liy….
jinake liy manvadhikar ek dookan hai….aur kuchh naheen …

Dinesh Choudhary कल एनडीटीवी पर प्रो. हरगोपाल को भूतपूर्व शिवसैनिक व वर्तमान कांग्रेसी नेता ने लगभग चिल्लाते हुए कहा कि आपको शर्म आनी चाहिये। प्रो. साहब का दोष केवल इतना था कि उन्होंने विकास के वर्तमान माडल में आदिवासियों को शामिल करने की बात कही। दूसरे शब्दों में जयराम रमेश भी तो यही बात कर रहे हैं। जो हिंसक हैं उनसे सरकार चाहे जैसे निपटे। पर डर ये है कि हालिया घटना के बहाने कुछ इस तरह का दमन चक्र न चलया जाए जिसमें निर्दोष आदिवासी-ग्रामीण लोग पिसने लगें। कारपारेट संचालित मीडिया इसी बात के लिये उकसा रहा है व मानवाधिकारों को कोसने की नीति क्या इसी काम के लिये जमीन तैयार करने का पूर्वाभ्यास है?

Yashwant Singh पंकज कुमार झा… सच में अगर सबसे बड़ा घृणित उद्योग है तो वो नेतागिरी है और नेताओं की दलाली करने वाले लोग भड़ुवे से भी ज्यादा घृणित है… आप इसे मानेंगे या नहीं??

Yashwant Singh आशीष कुमार अंशु जी.. आप भी ध्यान से पढ़िए… यह पूरे मानवाधिकार जमात के लिए है और उसे बेहद घटिया व निकृष्ट भाषा से नवाजा है राहुल ने… और, इस पूरे प्रकरण में मानवाधिकार का मसला आया कहां से… अगर आया है तो राहुल बताएं कि उनकी कांग्रेस ने महेंद्र कर्मा के मानवाधिकार की अनदेखी क्यों की… यानि कर्मा जी नक्सलियों के निशाने पर थे तो उन्हें जेड प्लस दिए जाने के आवेदन को अभी तक क्यों लटकाए रखा.. जब कर्मा मार दिए गए तब जाकर उनके बेटे व परिजन को जेड प्लस की सेक्युरिटी दी गई है.. यह काम पहले ना करके खुद राहुल व कांग्रेस ने महेंद्र कर्मा के मानवाधिकार का हनन किया यानि जिसे घोषित तौर पर जान का खतरा था और उसे मजबूत से मजबूत सुरक्षा दी जानी चाहिए थी, उसे इन कांग्रेसियों ने मरने के लिए छोड़ रखा था.. और जब कर्मा जी मार दिए गए तो ये कांग्रेस मानवाधिकार आंदोलन को गालियां दे रहे हैं, तंज कर रहे हैं, आक्षेप कर रहे हैं…

Shravan Kumar Shukla सहमत हूँ! वैसे भी कर्मा पर ४ असफल हमले हो चुके था.. पिछले वर्ष भी उनकी गाड़ी उड़ा दी गई थी.. लेकिन वो बच गए.. गाड़ी १५ फुट दूर जाकर गिरी.! ओसे इन्होने जो शब्द इस्तेमाल किये हैं वह इनकी दादी जी के आखिरी वक्त की गवाही देते हैं.! वैसे इंदिरा शुरू में काफी अच्छी थी, लेकिन सत्ता के नशे में चूर होने के बाद बहक गई.! यह अभी से उड रहे हैं..! वैसे मानवाधिकार को यह कैसे समझ सकते हैं? जब खुद इनके और इनके दोस्तों के ऊपर रेप और रेप के बाद पूरे परिवार को गायब कर देने का मामला चल रहा है.. इससे ज्यादा घटियापना और क्या हो सकता है?

Ajit Kumar yashwant ji thik kah rahey hai yah kadwa sach hai isliye nahi hazam ho raha hoga ………………………..

पंकज कुमार झा लाख बुरी है नेतागिरी की दुनिया फिर भी जीने के काबिल है यशवंत भाई. इसी नेतागिरी के कारण आप भी सुकून से अपनी असहमति दर्ज करा पा रहे हैं और इसी नेतागिरी उद्योग के कारण हम सब भी कहीं न कहीं अपनी तमाम असहमतियों के बावजूद ज़िंदा हैं. आपके विचारों का दूकान लगाने वाले लोग कैसे हैं यह आपसे ज्यादा अच्छी तरह मुझे आपकी जेल यात्रा के दौरान पता चला था. मुझे भरोसा था कि जेल से निकलने के बाद इस व्यभिचारी विचार के बारे में पुनर्विचार करेंगे जो सिवा छल-प्रपंच और धोखा के कुछ भी नहीं सिखाता. लेकिन आपका भोलापन अभी तक कायम है शायद.

Ajit Kumar jha sahab apki baat mai sahmat hu lekin is jahan me kuchh hi aise log hai jis per yashwant ji ne tippani ki hai bahut se achhey log bhi hai…………

Yashwant Singh पंकज कुमार झा जी, मैं आपके भोलेपन पर मुग्ध हूं जो परम हरामी राजनीति के प्रति अब भी साफ्ट कार्नर अपनाए हुए है… मानवाधिकार किसी कम्युनिस्ट या किसी भाजपा की बपौती नहीं है, पहली बात तो ये आप समझ लीजिए. आप लोगों के साथ दिक्कत ये है कि मानवाधिकार शब्द आते ही आप मान लेते हो कि ये कम्युनिस्ट पार्टी का हार्डकोर आदमी होगा तभी ये मानवाधिकार मानवाधिकार कह रहा है.. मेरे भाई, मानवाधिकार बहुत पुरानी और बहुत महान चीज है और ये जन जन की चीज है.. याद करिए वो दौर जब युद्ध के दिनों में शाम होते ही दोनों ओर की सेनाएं एक दूजे पर हमला नहीं करती थीं और कई बार एक दूसरे के सुख दुख में शामिल होती थीं और सुबह होते ही रणभेरी बजते ही एक दूसरे पर हमला बोल दिया करती थी… तो वो उस जमाने का मानवाधिकार था.. भाई, जैसे हम आजादी, बराबरी, समानता, न्याय की बात करते हैं, उसी तरह हमें मानवाधिकार को भी लेना चाहिए.. कल को आपके घर में किसी के साथ कोई घटिया कृत्य हो जाए यानि उस मानव के अधिकार का हनन हो जाए तो क्या उसके हक के लिए आप लड़ेंगे नहीं? पंकज जी, कुछ लोगों की गंदगी के कारण किसी पूरे इंस्टीट्यूशन को खारिज मत करिए… और, मुझे तो सच में लगता है कि भाजपा और कांग्रेस, दोनों इस मसले पर कि जनता का कोई अधिकार ही नहीं होना चाहिए, एक हैं… इसीलिए ये मानवाधिकार की बात से घबड़ाते हैं क्योंकि भाजपा व कांग्रेस की नीतियों से आम आदमी का नहीं बल्कि कारपोरेट का भला होता है और जब कारपोरेट का भला हो तब कैसा मावाधिकार… !!!! पंकज जी, आपकी सोच घटिया हो, यह तो मैं बर्दाश्त कर सकता हूं पर राहुल गांधी का स्तर भी आप जैसा हो, यह ठीक नहीं क्योंकि राहुल तो भावी पीएम हैं भई, उन्हें देश चलाने का काम कभी दुर्भाग्य से जनता ने वोटों के जरिए दे दिया तो वो क्या करेंगे… !!!!

आशीष कुमार 'अंशु' Yashwant Singh: bhai aapki is baat par poori sahmati hai,
''राहुल बताएं कि उनकी कांग्रेस ने महेंद्र कर्मा के मानवाधिकार की अनदेखी क्यों की… यानि कर्मा जी नक्सलियों के निशाने पर थे तो उन्हें जेड प्लस दिए जाने के आवेदन को अभी तक क्यों लटकाए रखा.. जब कर्मा मार दिए गए तब जाकर उनके बेटे व परिजन को जेड प्लस की सेक्युरिटी दी गई है.. यह काम पहले ना करके खुद राहुल व कांग्रेस ने महेंद्र कर्मा के मानवाधिकार का हनन किया यानि जिसे घोषित तौर पर जान का खतरा था और उसे मजबूत से मजबूत सुरक्षा दी जानी चाहिए थी, उसे इन कांग्रेसियों ने मरने के लिए छोड़ रखा था.. और जब कर्मा जी मार दिए गए तो ये कांग्रेस मानवाधिकार आंदोलन को गालियां दे रहे हैं, तंज कर रहे हैं, आक्षेप कर रहे हैं…''

rahul gandhi likhte hauin –
''Where is the Human Rights industry now?'',
industry is arth men jab itani berahmi se hatya kee gai, 50 se adhik chakoo ke war aur 50 se adhik goliya maari gai unhen fir bhee so called human right activist ise aadiwasi vs state kee ladai batane men juti hui hai….yah sharmnak hai…
maowadi kabhee honge lekin aaj ve aadivasiyon ke paryayvachi naheen hain. yah aap bhee jante hain kee dandkarany men kis tarah ke samajhaute maowadiyon ne kiy hain…

Robin Rastogi Yash ji ki bat se shmat hun. Desh ki rajneeti v ptrkarita aa gulam hai. Jis traha humara desh gulam tha. Desh ko azad kraya kirantikariyo ne orr aaj na jane koun?? Desh ke hal burai hai. Pr jo hua voo nandniya hai.

पंकज कुमार झा यशवंत भाई, आपने न राहुल की टिप्पणियों पर गौर किया न ही मेरे जबाब पर. यहाँ वास्तविक मानवाधिकार पर किसी को कोई आपत्ति नहीं है. आपने शायद गौर नहीं किया कि इस पुनीत नाम पर चलाये जा रहे वामपंथी उद्योग पर सवाल है. इसीलिए जब भी आतंक के सन्दर्भ में मानवाधिकार …See More

संजय कुमार मिश्र मैं पूछता हूं कहां हैं कोयला खदानों की लूट मचाने वाले इस निर्लज्‍ज हिंसा की एक अप्रत्‍यक्ष तार इससे भी जुडती है राहुल बाबा इस त्रासद घटना में उसे दबाने का प्रयास न करें…….

Alam Shabbir rahul is best and rest is fake

Prathak Batohi बेहद सटीक सधा हुआ

Sanjeev Kumar mujhe mere ek friend ne bataya tha ,,jo D U me rahul jee ke sath padhta tha…unki tab bhi koi student wali harkat na hua kerti thi..beer wine se grast hoker aate the apne gard ke sath..shayad tab se he wo amnweye harkaton ke aadi hai?

Sanjay Kumar neeman or jayaj bat hai babu

यशवंत सिंह के एफबी वॉल से साभार.

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