फ़तेह बहादुर पर जज नियुक्ति पत्र देने के लिए लाखों रुपये घूस मांगने का आरोप

: जज बनने के लिए मैं भ्रष्टाचार का सहारा नहीं लूंगी – गगनगीत कौर :  नियुक्ति विभाग के प्रमुख सचिव कुंवर फ़तेह बहादुर पर उच्च न्यायिक सेवा चयन प्रक्रिया में एक महिला अभ्यर्थी से परीक्षा परिणाम के बाद लाखों रुपये घूस मांगे जाने के गंभीर आरोप लगे हैं. इस पर पारदर्शिता के क्षेत्र में कार्यरत लखनऊ स्थित नेशनल आरटीआई फोरम द्वारा प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिख कर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की सहायक महाधिवक्ता रह चुकीं गगन गीत कौर के अनुसार वर्ष 2009 में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के पद के सामान्य वर्ग की कुल 24 सीटों की रिक्ति निकली.

इनमें पांच सीटों पर महिलाओं की नियुक्ति होनी थी. गगन गीत कौर साक्षात्कार तक पहुंचीं और नियमानुसार उनका चयन होना चाहिए था. कुछ प्रक्रियात्मक गड़बड़ियों से उनका नाम 12 जनवरी, 2010 के परिणाम में छूट गया. बाद में उनके प्रार्थना पत्र पर विचार करने के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय के चयन और नियुक्ति रजिस्ट्रार राजीव कुमार त्रिपाठी ने कुंवर फतेह बहादुर, प्रमुख सचुव, नियुक्ति को 1 सितंबर, 2010 और 5 मई, 2011 को पत्र लिखकर गगन गीत की नियुक्ति करने के निर्देश दिये. पत्र में यह भी लिखा था कि सरकार की तरफ से कौर की नियुक्ति का आदेश जारी किया जाए और इसकी एक प्रति इलाहाबाद उच्च न्यायालय को जल्द से जल्द भेजी जाए.

आरोप है कि नियुक्ति विभाग मामले को टालता रहा और सुनील कुमार (अनु सचिव, नियुक्ति विभाग) ने नियुक्ति पत्र जारी करने के बदले गगन गीत से कुंवर फ़तेह बहादुर के नाम पर लाखों रुपये की मांग की. गगन गीत ने इसकी शिकायत 31 मई, 2011 को भारत के मुख्य न्यायाधीश और इलाहाबाद उच्च न्यायालय में की. गगन गीत का आरोप है कि पैसा नहीं दे पाने के कारण उनका नियुक्ति पत्र नहीं जारी किया गया और नियुक्ति विभाग ने इस पर कुछ गैरवाजिब आपत्तियां लगाईं. जब इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 13 जुलाई, 2011 को एक बार फिर पत्र लिख कर नियुक्ति विभाग को इनको नियुक्ति पत्र देने के आदेश दिये तो आरोप है कि कुंवर फतेह बहादुर की तरफ से नियुक्ति विभाग के संयुक्त सचिव योगेश्वर राम मिश्रा ने पैसे मांगे.

गगन गीत के अनुसार योगेश्वर राम ने फतेह बहादुर के लिए वित्तीय सहयोग की मांग की और कहा कि नियुक्ति पत्र इसके बाद ही जारी हो सकेगा. अंत में गगनगीत ने इस भ्रष्टाचार से तंग हो कर 23 जनवरी, 2012 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय को एक पत्र लिखकर अपनी सीट सरेंडर कर दी है और कहा कि वह जज बनने के लिए भ्रष्टाचार का सहारा नहीं लेंगी. नेशनल आरटीआई फोरम का कहना है कि उच्च न्यायिक सेवा में ऐसा आरोप लगना बहुत गंभीर मामला है. फोरम की कन्वेनर डॉ नूतन ठाकुर ने इस मामले में मुख्य सचिव को 25 फरवरी 2012 को पत्र लिख कर उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है.

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