Pankaj Chaturvedi : पता नहीं कुछ सरकारी महकमे इतने बड़े बुदि्ध शत्रु क्यों होते हैं? दिल्ली से छपने वाले हिंदुस्तान टाईम्स में आज आधे पन्ने का एक इश्तेहार छपा है, हो सकता है अन्य अखबारों में भी हो. गृह मंत्रालय की संस्था 'नेशनल इंस्टीट्यूट फार डिजास्टर मैनेजमेंट' ने छपवाया है.
यह पूरे आधे पजे का यानी कई लाख का होगा. इसमें गरीब मजलूम लोगों को बताया गया है कि वे खुद को ठंड से कैसे बचाएं. विज्ञापन अंग्रेजी में है. अंग्रेजी अखबारों में है. लगता है कि इसे गरीब तो कोई पढेगा नहीं, हां बस उनकी ''गरीब अकल'' के लिए ही होगा यह. काश इतने पैसे में कुछ अलाव जलवा देते, कुछ गरम कपडे बंटवा देते. सरकारी पैसे का तरकारी की तरह इस्तेमाल. धिक्कार… जरा कोई शिंदे बाबू को खबर कर दे…
साहित्यकार और वरिष्ठ पत्रकार पंकज चतुर्वेदी के फेसबुक वॉल से.






