लखनऊ। सीबीआई ने एनआरएचएम घोटाला मामले में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनंत कुमार उर्फ अंटू मिश्रा, पूर्व परिवार कल्याण मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा, विधायक रामप्रसाद जायसवाल, प्रमुख सचिव प्रदीप शुक्ला और एमएलसी डाक्टर अशोक कटियार के अलावा महानिदेशक परिवार कल्याण डाक्टर एसपी राम व चार निजी दवा आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ शनिवार को मुकदमा दर्ज किया है। सीबीआई की टीम ने अंटू के कई ठिकानों पर छापेमारी भी की है।
सूत्रों की मानें तो जल्द पूर्व मंत्री व कुछ अन्य आरोपितों को एनआरएचएम घोटाले में गिरफ्तार किया जा सकता है। कार्रवाई की जद में कुछ दागी सीएमओ भी आ सकते हैं। आरोप है कि इन लोगों ने फर्जी दस्तावेज के सहारे एनआरएचएम की धनराशि हड़पने के लिए धोखाधड़ी की है। मुकदमे की जद में 72 जिलों में सीएमओ व जिला परियोजना अधिकारी के पद पर तैनात करीब 100 तत्कालीन अधिकारी भी आ रहे हैं। बनारस में दवा कारोबारी महेंद्र पाण्डेय एवं मानवेंद्र चड्ढा, लखनऊ के ठेकेदार राशिद उर्फ गुड्डू खान तथा दिल्ली के दवा व्यापारी गिरीश मलिक को नामजद किया गया है। इनमें से बाबू सिंह कुशवाहा, आरपी जायसवाल, प्रदीप शुक्ल और एसपी राम एनआरएचएम घोटाले के एक मामले में पहले से ही जेल में हैं, जबकि अंटू मिश्र समेत अन्य को भी सीबीआई जल्द गिरफ्तार कर सकती है। इनमें से एक ठेकेदार मानवेंद्र दैनिक जागरण, वाराणसी के पूर्व संपादकीय प्रभारी राघवेंद्र चड्ढा के भाई हैं।
उल्लेखनीय है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के 15 नवंबर 2011 के आदेश पर एनआरएचएम घोटाले की जांच कर रही सीबीआई को पता चला ने पूर्व मंत्रियों ने निजी आपूर्तिकर्ताओं के साथ साजिश कर दवा, शल्य चिकित्सा उपकरण और अन्य मदों में हेराफेरी की है। अंटू पर आरोप है कि उन्होंने ठेकेदारों और बिचौलियों की मदद से जिलों में सीएमओ की तैनाती में रिश्वत ली। दवा, उपकरण, प्रशिक्षण व निर्माण का आदेश अपने चहेते को दे दिया। मुख्य चिकित्साधिकारियों ने दवा, शल्य चिकित्सा, सर्जिकल आइटम की आपूर्ति का ठेका बिना निविदा कराये उस आपूर्तिकर्ता को दी, जिसने उनकी तैनाती कराने में अहम भूमिका निभाई थी। आपूर्तिकर्ताओं ने बाजार दर से पांच से दस गुना अधिक दर लगाकर आपूर्ति की। विभाग के उच्चाधिकारियों ने इनकी अनदेखी की और वह भी इसमें हिस्सेदार रहे।
सीबीआई टीम शनिवार को सुबह सात बजे पूर्व मंत्री अंटू मिश्रा के राजधानी के गोमतीनगर विपुल खंड स्थित आवास पर पहुंची। भाई मधु मिश्रा से सीबीआई ने तलाशी में सहयोग देने को कहा। इसके बाद पूरे आवास की तलाशी ली। मधु मिश्रा ने अपने मोबाइल से कहीं बात करना चाहा तो एक निरीक्षक उन्हें बाहर लेकर निकले। मोबाइल लेकर करीब दस मिनट तक कुछ जांच परख की। फिर अंदर चले गये। सीबीआई टीम को यह अंदेशा था राज्य स्तरीय क्रय से सम्बंधित फाइलें उनके आवास पर ही मौजूद हैं। टीम को अंटू के घर से कुछ खास हाथ नहीं लगा। तलाशी करीब करीब साढ़े छह घंटे तक चली।
कानपुर में भी सीबीआई की टीम सुबह सवा छह बजे सिविल लाइन में कोषागार के सामने स्थित अंटू मिश्र के आवास पर पहुंची। पांच सदस्यीय टीम के साथ दूरसंचार विभाग के दो अधिकारी भी थे। टीम ने घर के नौकरों को बाहर कर अंदर से दरवाजा बंद कर दिया और छानबीन शुरू की। जांच-पड़ताल में टीम को कई अहम दस्तावेज मिले, जिन्हें कब्जे में ले लिया। सूत्रों के मुताबिक बरामद दस्तावेजों में कई एफडीआर, बैंक खाते, लॉकर व संपत्ति के कागजात भी शामिल हैं। इस बाबत तीन कमरे भी सील करने की सूचना मिली है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है। टीम ने घर में मौजूद मंत्री के माता पिता, पत्नी, पुत्र से काफी देर तक पूछताछ की। टीम ने दूरसंचार अधिकारियों की मदद से फोन की कॉल डिटेल का सत्यापन किया। टीम नोएडा में रह रहे मंत्री के वाहन चालक व उसकी पत्नी को भी साथ लेकर आयी थी। छह घंटे सघन-पड़ताल के बाद टीम दोपहर बारह बजे के आस-पास लौट गयी।
पूर्व परिवार कल्याण मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा ने भी चार ठेकेदारों, प्रदीप शुक्ला, रामप्रसाद जायसवाल, डाक्टर कटियार के साथ एनआरएचएम की धनराशि हड़पने का षड्यंत्र किया। बाबू सिंह ने जिलों में एनआरएचएम धन को खर्च करने के लिए बतौर प्रभारी नियुक्त किये। अधिकारियों को लूट खसोट की खुली छूट भी दे दी। जिला परियोजना अधिकारी परिवार कल्याण के पद पर उन्हीं अधिकारियों की तैनाती की जाती थी, जो मंत्री के इशारे पर उनके चहेतों को ही ठेके आवंटित करते थे। इसके एवज में तत्कालीन विधायक आरपी जायसवाल व एमएलसी डाक्टर अशोक कटियार भी अवैध तरीके से उपकृत होते रहे। आपराधिक षड्यंत्र के तहत स्वास्थ्य विभाग के दो टुकड़े करने का प्रस्ताव किया गया, जिसे केन्द्र सरकार के एनआरएचएम के लिए तय मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए स्वीकृति दी गयी।
सीबीआई सूत्रों के मुताबिक डाक्टरों को सीएमओ बनाने के एवज में पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा, अनंत कुमार मिश्र अंटू, तत्कालीन बसपा विधायक आरपी जायसवाल और एमएलसी अशोक कटियार ने डाक्टरों से करोड़ों रुपये वसूले। इस काम में उनकी मदद पूर्व प्रमुख सचिव स्वास्थ्य प्रदीप शुक्ल और महानिदेशक स्वास्थ्य एसपी राम ने की। घूस की रकम का एक हिस्सा प्रदीप शुक्ल तक भी पहुंचने के सुबूत सीबीआई के हाथ लग चुके हैं। पैसा देकर तैनाती पाये सीएमओ उन्हीं सप्लायर्स को दवाइयों और उपकरणों की सप्लाई, प्रशिक्षण और निर्माण कार्य के ठेके देते थे जो सीएमओ बनने के लिए उनकी मदद करते थे। सीबीआई ने ऐसे चार सप्लायर्स को भी अपनी एफआईआर में नामजद किया है, जिन्होंने मंत्रियों और अधिकारियों के साथ अपने संबंधों का लाभ उठाकर उन तक घूस की रकम पहुंचायी। इसके एवज में मनचाहे डाक्टरों को जिलों में तैनात करवाया।





