Swami Balendu : राजस्थान में शिव के दर्शन की लालसा में पूरे परिवार के साथ जहर खा कर आत्महत्या करने वाला व्यक्ति फ्रीलांस फोटोग्राफर था, उसके बच्चे स्कूल जाते थे, वो कोई निरक्षर नहीं था| आप उसे अन्धविश्वासी कहते हो परन्तु वो अपने आपको आस्थावान कहता था| उसे पूरा विश्वास था कि वो मरेगा नहीं, तभी उसने सबूत के लिए वीडियो बनाई थी, उसे विश्वास था कि शंकर भगवान प्रगट होकर उसे बचा लेंगे, क्योंकि धर्मग्रन्थ भरे पड़े हैं इस प्रकार की कहानियों से कि जब भक्त मरने लगता है तो भगवान प्रगट होकर बचा लेते हैं|
पढ़ लो कहानी ध्रुव की या प्रहलाद की…. फिर भी वो अभागा अपने बच्चों समेत मर गया…. कोई भगवान नहीं आया उसे बचाने! किसने मारा उसे! क्या कहोगे: अन्धविश्वास, आस्था या फिर दृढ विश्वास! मैं ऐसे बहुत से पढ़े लिखे मूर्खों से मिला हूँ जो इस प्रकार की धार्मिक बकवास को सच मानते हैं और अपने बच्चों को भी अन्धविश्वासी बनाते हैं| इसलिए मैं कहता हूँ कि धर्म और ईश्वर अन्धविश्वास के अलावा और कुछ नहीं और ये धार्मिक किताबें तो जला डालने लायक हैं, जो कि अन्धविश्वास को फैलाने का कारण हैं|
स्वामी बालेंदु के फेसबुक वॉल से.






