अंबानी भाई गले क्या मिले, रिलायंस के शेयर भले बढ़े, कई मीडिया घरानों के शेयर डाउन हो गए लगते हैं. इन मीडिया घरानों के हरामखोर संपादकों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं. वजह? अरे भाई, अभी तक दोनों अंबानी भाई अलग-अलग कंपनियों के मालिक हैं तो विज्ञापन भी दो अलग अलग ग्रुपों की ओर से मिलते हैं. खुदा के वास्ते अगर दोनों फिर से एक हो जाएंगे तो विज्ञापन इनका कामन हो जाएगा और एक ही रिलीज होगा. इस तरह मीडिया हाउसों की कमाई घट जाएगी.
दोनों भाइयों की कंपनियों और प्रोडक्ट्स के विज्ञापन काफी मात्रा में अखबारों चैनलों में छपते चलते हैं. अंबानी ब्रदर्स भरत मिलाप पर एक कार्टूनिस्ट ने हरामखोर संपादकों के भाव को कुछ यूं उकेरा है. समझ सकते हैं, मार्केट इकानामी ने पत्रकारिता में सबसे ज्यादा किसी पद को भ्रष्ट किया है तो वह है संपादक का पद. महामार्केटियर मालिक अब संपादक के पद पर महालायजनर टाइप के लोगों को ही नियुक्त करना चाहता है. इसी कारण तो संपादक जी की चिंता में संस्थान का घटता-बढ़ता बिजनेस भी शुमार है. इस कार्टूनिस्ट भाई को बधाई. रघुनाथ जी को इसलिए बधाई कि उनके लिंक के जरिए इस कार्टून तक पहुंच पाया. -यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया





