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अंबाला में बाल्टियों के सहारे भास्‍कर की दुकानदारी

वैसे अखबार तो सारे ही लगभग दुकान में तबदील हो चुके हैं। लेकिन दैनिक भास्कर तो अम्बाला में सरे बाजार अपनी दुकान सजाकर बैठ गया है। आते जाते राहगीरों का आवाज लगाकर कह रहा है कि भाइयों भास्कर खरीदने में बड़ा फायदा है। अम्बाला कैंट के मुख्य राय मार्केट में ठीक बिग बाजार के सामने प्राइम लोकेशन पर सड़क किनारे भास्कर का स्टाल लगा है। वहां कर्मचारी भास्कर के साथ प्लास्टिक की बाल्टी मुफ्त मिलने का आफर राहगीरों को बता रहा है। भास्कर की टी शर्ट पहने ये कर्मचारी हर आए गए को कहता है कि छोडि़ए अन्‍य अखबार, आपको भास्‍कर के अलावा कोई दूसरा अखबार इतनी अच्छी बाल्टी फ्री में नहीं दे सकता।

वैसे अखबार तो सारे ही लगभग दुकान में तबदील हो चुके हैं। लेकिन दैनिक भास्कर तो अम्बाला में सरे बाजार अपनी दुकान सजाकर बैठ गया है। आते जाते राहगीरों का आवाज लगाकर कह रहा है कि भाइयों भास्कर खरीदने में बड़ा फायदा है। अम्बाला कैंट के मुख्य राय मार्केट में ठीक बिग बाजार के सामने प्राइम लोकेशन पर सड़क किनारे भास्कर का स्टाल लगा है। वहां कर्मचारी भास्कर के साथ प्लास्टिक की बाल्टी मुफ्त मिलने का आफर राहगीरों को बता रहा है। भास्कर की टी शर्ट पहने ये कर्मचारी हर आए गए को कहता है कि छोडि़ए अन्‍य अखबार, आपको भास्‍कर के अलावा कोई दूसरा अखबार इतनी अच्छी बाल्टी फ्री में नहीं दे सकता।

अम्बाला रीजन में अखबारों में बढ़ते प्रतिस्‍पर्धा के चलते भास्कर को अपनी दुकान जमाकर रखनी है। इसलिए इससे पहले की भरे बाजार कोई खुद को आकर बेचता भास्कर ने कहा कि हमी सबसे पहले बैठ जाते हैं। लेकिन इस तमाम प्रयास के बावजूद भी बाल्टी जो है कि वो पाठक को खींच नहीं पा रही है। पाठकों के समक्ष जो फोटो प्रस्तुत की गई है। उसमें देखा जा सकता है कि स्टाल पर एक चिडिय़ा का बच्चा भी नहीं खड़ा है, किसी पाठक की तो बात ही दूर और पीली टी शर्ट पहने ये कर्मचारी लोगों को आवाज लगा लगाकर थक गया, सो अब टेबल पर सर रखकर सो रहा है।

बाल्टियां आगे सजी हुई है, किसी राहगीर की नजर उस बाल्टी पर नहीं है। कुछ लोगों ने बताया कि यार बाल्टी भी कोई चीज हुई। एक गरीब से गरीब आदमी भी अपने घर में ऐसी बाल्टी इस्तेमाल नहीं करता जैसी कि भास्कर वाले अपने पाठकों को देकर प्रलोभन दे रहे हैं। इस आफर में शर्त ये है कि साल भर के लिए सब्‍सक्रिप्‍शन देने पर ही बाल्टी मिलेगी। दरअसल पिछले साल भास्कर ने अम्बाला में पाठकों को एक अच्छे आकर्षक पैकिंग में चटनी बांधकर देने का काम शुरू किया था। पाठक इतने नाराज हुए कि चटनी इनके मुंह पर पटक गए। इससे एक पहलू ये है कि अम्बाला में पाठक संख्या बढ़ाने के लिए भास्कर अपना सर्वें जोर शोर से चला रहा है। बेचारे ब्यूरो चीफ भी इस काम पर लगाए गए हैं कि जाओ पूछो पाठक भास्कर से क्या चाहता है।

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