Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

प्रिंट-टीवी...

अक्षय तृतीया पर ‘द हिंदू’ का जैकेट और वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद जोशी की टिप्पणी

भारत के अखबारों के पास शानदार अतीत है और आज भी अनेक अखबार अपने पत्रकारीय कर्म का बखूबी इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें मैं 'द हिन्दू' को सबसे आगे रखता हूँ। पहले भी और आज भी। अखबार के सम्पादकीय दृष्टिकोण की बात छोड़ दें तो उसकी किसी बात से असहमति मुझे कभी नहीं हुई। हाल के वर्षों में हिन्दू व्यावसायिक दौड़ में भी शामिल हुआ है और बहुत से ऐसे काम कर रहा है, जो उसने दूसरे अखबारों की देखादेखी या व्यावसायिक दबाव में किए होंगे। पर ऐसा मैने नहीं देखा कि सम्पादक अपने अखबार की व्यावसायिक नीतियों और सम्पादकीय नीतियों के बरक्स अपनी राय पाठकों के सामने रखे।

भारत के अखबारों के पास शानदार अतीत है और आज भी अनेक अखबार अपने पत्रकारीय कर्म का बखूबी इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें मैं 'द हिन्दू' को सबसे आगे रखता हूँ। पहले भी और आज भी। अखबार के सम्पादकीय दृष्टिकोण की बात छोड़ दें तो उसकी किसी बात से असहमति मुझे कभी नहीं हुई। हाल के वर्षों में हिन्दू व्यावसायिक दौड़ में भी शामिल हुआ है और बहुत से ऐसे काम कर रहा है, जो उसने दूसरे अखबारों की देखादेखी या व्यावसायिक दबाव में किए होंगे। पर ऐसा मैने नहीं देखा कि सम्पादक अपने अखबार की व्यावसायिक नीतियों और सम्पादकीय नीतियों के बरक्स अपनी राय पाठकों के सामने रखे।

अखबारों में जैकेट का चलन बढ़ता जा रहा है। एक शुरू करता है तो दूसरा चार जैकेट लगा देता है। बेशक इसमें पैसा मिलता है, पर शायद अब कोई सम्पादकीय विभाग अपने विज्ञापन विभाग से इस मामले पर दरियाफ्त करता हो। पर यह मसला जैकेट का नहीं, अखबार के विचार का है। इस सोमवार को हिन्दू के चेन्नई संस्करण में अक्षय तृतीया पर एक इन हाउस विज्ञापन जैकेट के रूप में छापा। इसका स्पष्टीकरण अखबार के सम्पादक सिद्धार्थ वरदराजन ने छापा है जो एक ओर पत्रकारिता की उस रेखा को स्पष्ट करता है, जिसका उल्लंघन लगातार हो रहा है। साथ ही अखबार की वैचारिक रेखा को व्यक्त करता है। बहरहाल उस संस्थान के भीतर क्या राय बनती है यह अलग बात है, पर इसे पारदर्शी तरीके से पाठक के सामने भी लाया जा सकता है यह बात महत्वपूर्ण है। इसे खुद पढ़ें। और मीडिया ब्लॉग सैंस सैरिफ में यह रपट पढ़ें

इसके पहले 1 जनवरी 2012 के अंक में सोनिया गांधी की प्रशंसा में छपे जैकेट पर मिली प्रतिक्रियाओं के जवाब में सिद्धार्थ वरदराजन ने फेसबुक पर जो लिखा वह भी ध्यान देने लायक है।  पहले जैकेट को देखें उसके बाद नवागत सम्पादक की प्रतिक्रिया। इस विज्ञापन की सबसे जोरदार पंक्तियाँ हैं

"We remain, Madamji,
ever at your feet"

सिद्धार्थ वरदराजन ने तब अपने फेसबुक स्टेटस में लिखा था- “To all those who messaged me about the atrocious front page ad in The Hindu’s Delhi edition on Jan 1, my view as Editor is that this sort of crass commercialisation compromises the image and reputation of my newspaper. We are putting in place a policy to ensure the front page is not used for this sort of an ad again.”

प्रमोद जोशीलेखक प्रमोद जोशी वरिष्ठ पत्रकार हैं. हिंदुस्तान समेत कई अखबारों में संपादक रह चुके हैं. उनका यह लिखा उनके ब्लाग से साभार लेकर यहां प्रकाशित किया गया है.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...