Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

सुख-दुख...

अखबारों को विज्ञापन देकर नीतीश सरकार ने किया पथराव के दर्द का पुख्ता इलाज

पटना : बुधवार को बक्सर जिले के चौसा इलाके के नरबतपुर ग्रामवासियों द्वारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफ़िले पर हमला किये जाने से उन्हें फ़ायदा होगा या नुकसान, यह तो आने वाला समय ही बतायेगा। लेकिन फ़िलहाल इस घटना ने बिहार के अखबारों को जबर्दस्त फ़ायदा करा दिया है। बुधवार को बिहार के अखबारों को औसतन 4 पेज का विज्ञापन दिया गया है। हिन्दुस्तान, प्रभात खबर और दैनिक जागरण के अलावा बिहार सरकार ने विज्ञापन की रेवड़ी आज, राष्ट्रीय सहारा जैसे कम सर्कुलेशन वाले अखबारों को भी दिया है।

पटना : बुधवार को बक्सर जिले के चौसा इलाके के नरबतपुर ग्रामवासियों द्वारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफ़िले पर हमला किये जाने से उन्हें फ़ायदा होगा या नुकसान, यह तो आने वाला समय ही बतायेगा। लेकिन फ़िलहाल इस घटना ने बिहार के अखबारों को जबर्दस्त फ़ायदा करा दिया है। बुधवार को बिहार के अखबारों को औसतन 4 पेज का विज्ञापन दिया गया है। हिन्दुस्तान, प्रभात खबर और दैनिक जागरण के अलावा बिहार सरकार ने विज्ञापन की रेवड़ी आज, राष्ट्रीय सहारा जैसे कम सर्कुलेशन वाले अखबारों को भी दिया है।

सरकार द्वारा दिये गये विज्ञापन का ही कमाल रहा कि पटना से प्रकाशित किसी भी अखबार ने इस खबर को वास्तविक स्वरुप में प्रकाशित नहीं किया। मसलन दैनिक जागरण ने कुछ इस अंदाज में इस खबर को प्रकाशित किया। खबर का शीर्षक था, “शरारत के पत्थर से सियासी भूचाल”। अखबार ने लिखा कि बक्सर में सेवा यात्रा के पहले कार्यक्रम में बुधवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चौसा युद्धस्थल का मुआयना कर अगले कार्यक्रम की ओर जाने के लिए जैसे ही अपनी गाड़ी पर बैठने लगे, बैरीकेडिंग के पास खड़ी भीड़ से उन्हें डीएम, बीडीओ मुर्दाबाद, मुख्यमंत्री जिंदाबाद की आवाज सुनायी दी। वे तुरंत भीड़ की ओर मुखातिब हुए। ग्रामीणों ने आरोपों की झड़ी लगा दी-जिस रास्ते से आपको लाया गया है, वह रातोंरात तैयार हुआ है।

दैनिक हिन्दुस्तान ने इस खबर के संदर्भ में सरकार के सुर में सुर मिलाते हुए इसे कुछ लोगों की शरारत की संज्ञा दी। जबकि प्रभात खबर ने तो इस मामले में सीधे-सीधे जदयू नेताओं के बयान को ही अपना आधार बनाया है। हालांकि इस खबर को अंग्रेजी अखबारों ने प्रमुखता से पृथक खबर के रुप में प्रकाशित किया। द टेलीग्राफ़ ने इस खबर को खबर के रुप में प्रकाशित करते हुए लिखा कि जब मुख्यमंत्री चौसा जा रहे थे तब सड़क के किनारे खड़े लोग उनसे अपनी समस्यायें रखना चाहते थे। जबकि मुख्यमंत्री का काफ़िला उन्हें नजर अंदाज करते हुए चला गया। बाद में जब मुख्यमंत्री उसी रास्ते से वापिस लौटे तब स्थानीय निवासियों ने उन्हें अपनी समस्या सुनाने के लिए उन्हें रोकना चाहा। लेकिन मुख्यमंत्री नहीं रुके। इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने काफ़िले पर पथराव करना शुरु कर दिया। इस घटना में मुख्यमंत्री को तो कुछ नहीं हुआ, लेकिन कारों के शीशे टूट गये हैं।

बहरहाल, सरकारी विज्ञापनों का ही कमाल रहा कि श्री कुमार पर हुई पत्थरबाजी के संदर्भ में विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा दिये गये राजनीतिक बयानों को भी औपचारिकता के तौर पर अंदर के पन्नों पर जगह दी गयी। वैसे सवाल यह नहीं है कि कल ही अखबारों को विज्ञापन क्यों दिये गये, बल्कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इससे यह साबित नहीं होता कि बिहार में मीडिया पर अघोषित रुप से सेंसरशिप लागू है?

लेखक नवल किशोर कुमार अपना बिहार डॉट ओआरजी के संपादक हैं.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...