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अखिलेश ने कहा- पत्रकारों ने खबर दिखाने के नाम पर दांव दिया

लखनऊ। सैफई महोत्सव पर मीडिया में उठे बवाल पर आज खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पत्रकारों के सामने सफाई देने आये। 26 दिसंबर से 8 जनवरी तक चले सैफई महोत्सव में हो रहे नाच गाने और सांस्कृतिक कार्यकर्मों पर उठ रहे सवाल, वहीँ मुजफ्फरनगर दंगे के बाद राहत शिविरों में रह रहे पीड़ितों का इस ठण्ड में बुरे हालात के ऊपर मीडिया ने लगातार खबरे दिखाई, समाचार पत्रों और न्यूज़ चैनलों पर दिखाये गए कार्यकर्मों को लेकर मुख्यमंत्री इतने खफा दिखे की उन्होंने कुछ मीडिया हाउसेज की रिपोर्टिंग पर सवाल खड़े करते हुये उनसे माफ़ी मांगने की बात भी कह डाली।

लखनऊ। सैफई महोत्सव पर मीडिया में उठे बवाल पर आज खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पत्रकारों के सामने सफाई देने आये। 26 दिसंबर से 8 जनवरी तक चले सैफई महोत्सव में हो रहे नाच गाने और सांस्कृतिक कार्यकर्मों पर उठ रहे सवाल, वहीँ मुजफ्फरनगर दंगे के बाद राहत शिविरों में रह रहे पीड़ितों का इस ठण्ड में बुरे हालात के ऊपर मीडिया ने लगातार खबरे दिखाई, समाचार पत्रों और न्यूज़ चैनलों पर दिखाये गए कार्यकर्मों को लेकर मुख्यमंत्री इतने खफा दिखे की उन्होंने कुछ मीडिया हाउसेज की रिपोर्टिंग पर सवाल खड़े करते हुये उनसे माफ़ी मांगने की बात भी कह डाली।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एक अखबार द्वारा सैफई महोत्सव में खर्च हुये 300 करोड़ रुपयों की खबर पर नाराजगी जाहिर करते हुये कहा कि उक्त अखबार को उन तीन सौ करोड़ रुपयों का पूरा हिसाब सरकार को देना चाहिये, उन्होंने ये भी कहा की सरकार ऐसी रिपोर्ट को खारिज करती है और रिपोर्ट छापने वालों को आगाह करती है की वो या तो उन 300 करोड़ का लेखा-जोखा दे या सरकार से माफ़ी मांगे नहीं तो सरकार उस अखबार और उस रिपोर्टर पर कारर्वाई करने पर मजबूर हो जायेगी।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव काफी नाराज दिखे उन्होंने मुजफ्फरनगर काण्ड में टीवी चैनल पर दिखाई जा रही रिपोर्ट को गलत बताते हुये यहाँ तक कह डाला कि कुछ मीडिया हाउस सरकार की छवि खराब करना चाहते है, इसलिए उन्होंने ऐसी रिपोर्ट टीवी न्यूज़ में प्रसारित की। यहाँ सवाल ये उठता है कि अखिलेश यादव मुजफ्फरनगर की ख़बरों को लेकर परेशान है, मुजफ्फरनगर में सरकार की नाकामियों को लेकर परेशान है, की सैफई महोत्सव में हुये खर्चे और उसपर उठ रही उँगलियों को लेकर चिंतित है।

जवाब तो उन्हें ही देना पड़ेगा आखिर प्रदेश के मुख्यमंत्री होने के नाते जवाबदेही भी उन्ही की बनती है। मुजफ्फरनगर काण्ड और राहत शिविरों में इस ठण्ड के मौसम में हुये बुरे हालात पर उनके पिता मुलायम सिंह यादव से सवाल पूछना भी उन्हें बुरा लग रहा है। उन्होंने कहा सपा की सरकार है जवाब मै दूंगा एक काबिल और पिता की बात मानने वाले बेटे की झलक दिखाते हुए उन्होंने अपने सरकार का बचाव तो कर लिया लेकिन शायद ये भूल गए की उनके पिता समाजवादी पार्टी के मुखिया है और इस प्रदेश कि सरकार के मुखिया के पिता है, तो कहीं न कहीं उनकी जवाबदेही तो बनती ही है।

अखिलेश यादव एक बात से और खफा है उनका कहना है कि मै खुद जब मुजफ्फरनगर दौरे पर गया था तो मेरे साथ हवाई जहाज में कुछ बड़े पत्रकार भी गए थे उन्होंने कहा था कि ये रिपोर्ट आधे घंटे के पॅकेज में चलेगी लेकिन चैनल वालों ने यहाँ भी मुख्यमंत्री को दांव दे दिया और खबर प्रसारित नहीं कराई जबकि खुद मुख्यमंत्री ने अपने जानने वालों से कहा था आज मुजफ्फरनगर में मेरे दौरे की अच्छी खबर आने वाली है। लेकिन खबर प्रसारित नहीं हुई बल्कि उस पत्रकार का एसएमएस आया कि खबर प्रसारित नहीं हो सकती। मुख्यमंत्री अंग्रेजी चैनलों से भी खफा है कि वो मुजफ्फरनगर दंगो को लेकर अपनी रिपोर्ट में प्रदेश की छवि विश्व में खराब कर रहे है।

मुख्यमंत्री ने सैफई महोत्सव पर उठ रह सवालों पर सवाल खड़े करते हुए कहा मीडिया नाहक कलाकारों पर वार कर रही है। मीडिया को जो भी सवाल करने है, मुझसे करें कलकारों से नहीं। बहरहाल आज की पत्रकारवार्ता में मुख्यमंत्री काफी नाराज दिखे, वो क्यों नाराज दिखे ये वही जाने लेकिन उन्हें एक बात का हिसाब देना होगा कि बीते 14 दिनों तक जो सैफई महोत्सव की धूम पूरे देश में रही करीब 24 चार्टर्ड विमान सैफई से मुम्बई का चक्कर लगाते रहे, सलमान खान से लेकर माधुरी दीक्षित ने इस महोत्सव में अपने जलवे बिखेरे उस सैफई महोत्सव में महज 6 से 8 करोड़ रुपये खर्च हुये होंगे।

मुख्यमंत्री ने आखिर सैफई में हुये तमाशे पर सफाई क्यों देनी पड़ी, आखिर क्या वजह हुई की खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुजफ्फरनगर काण्ड को लेकर मुलायम सिंह यादव पर हो रहे हमलों का जवाब देने की कमान खुद संभल ली। सैफई महोत्सव हर साल होता है लेकिन ये पहली बार हो रहा है जब इस महोत्सव के समापन पर प्रदेश सरकार के मुखिया खुद सामने आये और सफाई देते दिखाई दिये ये क्यों हुआ ये तो खुद अखिलेश जाने और उनके रणनीतिकार लेकिन इतना तो तय है की इस महोत्सव को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की किरकिरी शायद अखिलेश को रास नहीं आई।

लखनऊ से शीतांशु पति त्रिपाठी की रिपोर्ट.

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