Prem Chand Gandhi : आपको अगर कोई चीज़ पसंद नहीं तो साफ़ कह दीजिये ना, क्यों धर्म का बहाना बनाते हैं… अगर कोई धर्म मातृवंदना को ख़ारिज़ करता है तो मैं ऐसे धर्म को खारिज़ करता हूं… क्यों कि जो धर्म मां को नहीं माने, वह कुछ और हो सकता है धर्म तो नहीं ही है… आप ऐसे धर्म में क्यों बने रहना चाहते हैं जो आपको मां के सामने झुकने से रोकता है…
मैं उस देश में रहता हूं जहां एक मुसलमान संगीतकार ने ‘मां तुझे सलाम’ और ‘वंदे मातरम’ को एक धागे में पिरोया है… मैंने मां का सम्मान किसी धर्म या धर्मग्रंथ से नहीं सीखा है, इसलिए कहता हूं कि तुम अगर मां का गीत नहीं गा सकते तो तुम्हें धर्म के गीत गाने का कोई हक़ नहीं है… लेकिन मेरे कहने मतलब यह नहीं लगाना कि मैं हिंदू ही हूं… मेरे मन में अमीना, कौशल्या, देवकी, यशोदा और मरियम जैसी हरेक मां के लिए सम्मान है… तुम शायद मां-बच्चे के संबंध को महज जैविक संबंध मानने वालों में होंगे, मैं इसे मनुष्यता का सबसे महान रिश्ता मानता हूं…
साहित्यकार प्रेम चंद गांधी के फेसबुक वॉल से.






