: गन्दी राजनीती की चलते नौ साल में दस संपादक : प्रबंधन के कान खड़े, टीम बदलने की चर्चा : नौ साल पहले देव नगरी देवघर में यूनिट बैठाने वाले प्रभात खबर का हाल यहां बुरा है. अंदरूनी राजनीति के कारण यहां अच्छे लोग नहीं के बराबर है. प्रबंधन अगर किसी को वहां भेजता है तो पहले से जमे जमाये लोग उनको इतना परेशान करते हैं कि वो भाग लेता है. प्रबंधन को समझ में ही नहीं आ रहा है कि आखिर देवघर यूनिट में ये राजनीति कौन कर रहा है.
कुछ दिन पूर्व आरके नीरद को पटना भेज दिया गया, फिर भी राजनीति जारी है. कई बार राजनीति जातिवादी रुख ले लेती है. पिछले दिनों एक संपादक की पोस्टिंग दुबारा होने से डरे कई लोग हिंदुस्तान धनबाद और जमशेदपुर निकल लिये. एक ने तो राज्य ही छोड़ गया.
उधर डेस्क की हालत काफी ख़राब है. ना तो वहां डीएनइ है और ना न्यूज़ एडिटर. डेस्क इंचार्ज का भी पोस्ट खाली है. नए संपादक, जो न्यूज़11 में गए थे, वो फिर देवघर आ गए हैं. अपने ही शहर धनबाद के व्यक्ति ने इनकी काफी मदद की, जिसका कर्जा ये चुकाने के लिए तैयार हैं. पर अब प्रबंधन की नज़र इन दोनों पर है. माना जा रहा है कि धनबाद में एक व्यक्ति को भेजा जाएगा ताकि नए लोगों के आने में ये पुरानी टीम उनको परेशान ना करे.
पूर्व संपादक संजय मिश्र जब यूनिट में बदलाव और ब्यूरो बदलने की सोच रहे थे तभी उनको इसी पुरानी टीम ने राजनीति कर हटवा दिया. लेकिन प्रबंधन को इसकी भनक लगी और मिश्रा जी को पंचायतनामा देकर प्रबंधन ने दिखाया कि हमारे यहाँ आदमी की कद्र होती है. लेकिन अभी भी हालात ठीक नहीं है. वहां हिन्दुस्तान और जागरण अखबार की ज्यादा पूछ नहीं है. हिन्दुस्तान में पैसे का धंधा खूब होता है. जागरण में पिछले दस सालों में कोई आदमी ना आया है और ना गया है. इसका फायदा सीधा प्रभात खबर को मिल रहा है.
चूंकि कोई प्रतिद्वंदी नहीं है, इसलिए जैसे चल रहा है वैसे चलने दो की नीति प्रभात खबर में काम कर रही है. लेकिन अन्दर ही अन्दर चर्चा है कि अब सम्पादकीय विभाग के वैसे लोगों को वहां से हटा कर दूसरे जगह भेजा जायेगा जो सात साल से ज्यादा से देवघर में हैं और देवघर में नए लोगो को लाया जायेगा. ये भी कहा जा रहा है कि नए लोगों में सिर्फ वैसे ही होंगे जो प्रभात खबर में वर्तमान में हैं या फिर प्रभात खबर के साथ लम्बी पारी खेल चुके हैं. (कानाफूसी)





