आगरा स्थित दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में शोध छात्रा नेहा शर्मा की सनसनीखेज मौत के बाद वाहवाही बटोरने के फेर में आगरा के हिंदुस्तान ने जमकर अपनी किरकिरी करवा ली। एक के बाद एक गलत खबरों की बदौलत दयालबाग क्षेत्र में पाठकों को जोड़ने की बजाय यह रहे-सहे पाठक भी खोने को बैठा है। असल में मार्च में हुई इस घटना के बाद हिंदुस्तान ने प्रथम पृष्ठ पर हेडिंग में रेप होने की बात लिखी थी। अन्य किसी अखबार ने इतनी गंभीरता के साथ इस बात को नहीं उठाया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद रेप की बात गलत साबित हुई। इससे आगरा हिंदुस्तान की काफी फजीहत हुई।
बात यहीं खत्म नहीं हुई। मामले पर नंबर बढ़वाने में लगे नौसिखए पत्रकारों ने फिर एक और कारनामा किया। उसने एक लैब असिस्टेंट की गिरफ्तारी को फिर प्रमुखता से उछालते हुए उसके नाम के साथ उसे मुख्य आरोपी होने का तमगा भी दे दिया। बाद में खुद पुलिस ने माना कि वह आरोपी नहीं है। हिंदुस्तान ने उस कर्मचारी को खलनायक बनाकर शहर में उसका रहना दूभर कर दिया। दयालबाग के लोगों को समझ में नहीं आ पा रहा है कि आखिर यह किस प्रकार की पत्रकारिता हिंदुस्तान के अंदर ‘पुष्पित’ हो रही है। ‘रीडर कनेक्ट’ के नाम पर वरिष्ठ संपादकीय कर्मचारी गली-मोहल्लों के कार्यक्रमों में उपस्थिति दर्ज कराते हैं वहीं इतने संवेदनशील मामलों पर संवेदनहीनता के साथ खबरें लिख दी जाती हैं। आखिर क्यों? इस पूरे प्रकरण में दैनिक जागरण और अमर उजाला ने सूझ-बूझ का परिचय दिया।
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