मेरे चचेरे भाई रविकांत सिंह पर यूपी के गाजीपुर जिले की पुलिस ने गैंगस्टर लगा दिया है. रविकांत को मैं निजी तौर पर जानता हूं. बचपन से जानता हूं. अगर इस युवक का कभी कोई आपराधिक अतीत रहा होता या वर्तमान में इसकी गतिविधियां संदिग्ध होतीं, तो मैं खुद ही इस पूरे प्रकरण से खुद को अलग कर लेता, यह कहते हुए कि जैसी करनी वैसी भरनी. पर रविकांत एक साफ-सुथरी छवि का आदमी है.
ग्राम प्रधान चुनाव में वह प्रत्याशी बना. ऐसा इसलिए क्योंकि मेरे बाबा भी एक बार ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ चुके हैं और चार-छह वोटों से हारे थे. तो परिजनों के मन में एक आकांक्षा रही कि नई पीढ़ी में से किसी एक को ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ना चाहिए और परिजनों ने रविकांत को प्रत्याशी बना दिया. हर गांव में कई गुट ग्रुप होते हैं. अपने गांव में भी हैं. दुर्भाग्य से उन्हीं दिनों एक प्रधान पद के प्रत्याशी के समर्थक की हत्या हो गई. हत्या करने वाले को सब जानते हैं और बाद में वह हत्यारोपी ईनामी बदमाश घोषित किया गया और काफी बाद में उसे पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया लेकिन उसके साथ-साथ हत्यारोपियों की लिस्ट में दूसरे ग्रुप के लोगों ने रविकांत का नाम भी डलवा दिया.
तब पुलिस ने रविकांत को पकड़ने के लिए घर की महिलाओं-माताओं को उठाकर थाने में रात भर बिठा दिया. जब रविकांत ने सरेंडर किया तो महिलाओं को छोड़ा गया. इन महिलाओं में मेरी मां भी थी. उस प्रकरण के सभी साक्ष्य वीडियो के रूप में मौजूद होने के कारण कई जगह हम लोगों ने कंप्लेन की और देश भर के पत्रकारों ने साथ दिया. अंततः आरोपी थानेदार को लाइन हाजिर किया गया और तत्कालीन एसएसपी रवि कुमार लोकू को तबादला. वह प्रकरण तत्कालीन एडीजी ला एंड आर्डर बृजलाल के संज्ञान में था लेकिन उन्होंने भी महिलाओं को थाने में बिठाए जाने के खिलाफ कोई आदेश निर्गत नहीं किया. डीआईजी-आईजी को भी घटना से अवगत कराया गया था.
इन सभी की चुप्पी के कारण माताओं को रात भर थाने में रहना पड़ा. उस घटना ने मुझे अंदर से हिलाकर रख दिया था कि जब इतने बड़े बड़े अफसरों के यहां अनुरोध करने पर भी महिलाओं को अवैध तरीके से थाने में बिठाए जाने से मुक्ति नहीं मिली तो इस माया राज में औरों का क्या हाल होता होगा. समय के साथ जख्म भरने लगे और जांचों की लंबी उलझाऊ प्रक्रियाओं से खुद को मैंने अलग करना शुरू कर दिया. वो शायद मेरी गलती थी. मैंने मान लिया था कि इतना हो-हल्ला हो जाने के बाद भविष्य में पुलिस अफसर कोई भी कदम उठाने के पहले जरूर इसकी छानबीन करेंगे कि क्या गलत है और क्या सही, लेकिन मेरा वह मत गलत निकला.
अब गाजीपुर के एसएसपी डा. मनोज कुमार ने मेरे चचेरे भाई रवि कांत पर गैंगस्टर लगा दिया है. सिर्फ एक मुकदमें, वह भी फर्जी फंसाए जाने के कारण और वह भी न्यायालय में विचाराधीन, के कारण अगर किसी पर गैंगस्टर लगा दिया जाए तो इसे क्या कहा जाए. यह कहीं न कहीं निर्दोष युवक को पेशेवर अपराधी की राह पकड़ने को मजबूर करने वाला कदम है. इस तरह के कृत्य का अगर हम सभी पुरजोर विरोध नहीं करेंगे, और अपने अपने मंचों से इसकी मुखालफत नहीं करेंगे तो कल को यह घटना किसी के साथ भी घटित हो सकती है.
अपने करियर में हमेशा आम आदमी की आवाज बनने की कोशिश करने वाला मैं जब अपने परिवार के मामले की लड़ाई नहीं लड़ सकता तो शायद दूसरों की भी ऐसी घटनाओं में मदद करने की हिम्मत-साहस नहीं जुटा पाऊंगा. पर यह मैं लड़ाई अकेले नहीं लड़ सकता. आप सभी लोगों से अनुरोध है कि पूरे प्रकरण को अपने अपने लोकतांत्रिक हथियारों के जरिए उठाएं और न्याय पाने की इस लड़ाई में मेरी मदद करें. गैंगस्टर के दुरुपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दायर किए जाने, मां को थाने बिठाने वाले प्रकरण में चल रही जांचों का अंजाम जानने हेतु आरटीआई किए जाने, मायावती और उनके सिपहसालारों तक एक निर्दोष को गैंगस्टर में फंसाए जाने के प्रकरण की जांच कराए जाने के लिए आवाज उठाने का काम हम सबको करना होगा.
आप सभी अपने आप में एक संस्थान हैं, एक सिपाही हैं, एक जिम्मेदार व्यक्ति हैं, इसलिए मैं चाहूंगा कि कृपया अपने अपने स्तर से प्रयास शुरू करें. मेरे हिस्से का जो काम होगा, इनपुट देने-लेने का जो दायित्व होगा, वो मैं सहर्ष करने को तैयार हूं. मैं दिल से आभारी हूं लखनऊ के उन पत्रकार साथियों का जिन्होंने रविकांत पर गैंगस्टर लगाए जाने से ठीक पहले प्रमुख सचिव सूचना प्रशांत त्रिवेदी से मिलकर अपना विरोध जताया और इस गैरकानून कदम को रोकने की अपील की. वो अलग बात है कि प्रमुख सचिव का दबाव भी काम नहीं कर पाया. इससे यह समझ में आ रहा है कि यूपी में सत्ता सिर्फ मायावती, उनके पंच प्यारों नौकरशाहों के पास है. और इनके बिहाफ पर हर जिले में एसपी-डीएम राज कर रहे हैं.
अगर आपका बसपा के किसी नेता विधायक मंत्री से परिचय नहीं है, अगर आपकी मायावती और उनके पंच प्यारे नौकरशाहों तक पहुंच नहीं है तो आपका भगवान ही मालिक है. यही परिघटना मेरे परिजनों के साथ घटित हो रही है. भड़ास4मीडिया के जरिए बेधड़क पत्रकारिता करने की प्रक्रिया में ये जो घटनाएं मेरे सामने पेश आती हैं, वे एक चुनौती की तरह हैं जिससे पार पाकर ही हम सही मायने में पत्रकार और जिम्मेदार नागरिक कहला सकते हैं अन्यथा जीने और रंडियों की दलाली करने में कोई खास फर्क नहीं. उम्मीद करता हूं कि आप सबों की सक्रियता से यह प्रकरण अपने अंजाम तक पहुंच सकेगा और पीड़ित को न्याय व दोषियों को दंड मिल पाएगा.
आभार
यशवंत
एडिटर
भड़ास4मीडिया
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यूपी पुलिस ने निर्दोष युवक पर लगाया गैंगस्टर
गाजीपुर के एसएसपी डा. मनोज को भड़ास के एडिटर यशवंत का पत्र
मां को थाने में बिठाए जाने वाले प्रकरण को जानने-पढ़ने के लिए इस शीर्षक पर क्लिक करें–





