Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

सुख-दुख...

अथ श्री महाफिक्सर कथा

जब मैं आचार्य सत्यवचन से मिलने पहुँचा तो वे किसी असंतुष्ट नेता की तरह पके हुए बैठे थे। मुझे पता नहीं था किस वजह से, पंडिताइन से झगड़े के कारण या किसी यजमान द्वारा मनचाही दक्षिणा न दिए जाने के चलते। मगर जैसे ही मैंने आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग का ज़िक्र छेड़ा वे ऐसे फट पड़े, जैसे मोदी को फेंकू या राहुल को पप्पू कहने पर उनके समर्थक फट पड़ते हैं। कहने लगे-ये टीवी अख़बार वाले नादान हैं, नालायक हैं। कुछ अता-पता है नहीं, बस दिन-रात फिक्सिंग का रोना लिए बैठे हैं।

जब मैं आचार्य सत्यवचन से मिलने पहुँचा तो वे किसी असंतुष्ट नेता की तरह पके हुए बैठे थे। मुझे पता नहीं था किस वजह से, पंडिताइन से झगड़े के कारण या किसी यजमान द्वारा मनचाही दक्षिणा न दिए जाने के चलते। मगर जैसे ही मैंने आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग का ज़िक्र छेड़ा वे ऐसे फट पड़े, जैसे मोदी को फेंकू या राहुल को पप्पू कहने पर उनके समर्थक फट पड़ते हैं। कहने लगे-ये टीवी अख़बार वाले नादान हैं, नालायक हैं। कुछ अता-पता है नहीं, बस दिन-रात फिक्सिंग का रोना लिए बैठे हैं।

मैंने कहा- मीडिया की चिंता वाज़िब है, क्योंकि बात ही ऐसी है। आख़िरकार इतने बड़े टूर्नामेंट में पैसे के बल पर नतीजे बदले जा रहे हों और उनमें क्या खिलाड़ी, क्या प्रबंधक और क्या टीम मालिक सब शामिल हों तो उनका जलना, उबलना, पिघलना सब जायज़ है।

ख़ाक़ जायज़ है, वे उसी लपलपाती ज़बान से बोले-आप भी उसी बिरादरी के हैं इसलिए उनकी तरफदारी तो करेंगे ही। मगर मैं सत्यवचन सच कहता हूँ कि आप लोगों को न भारतीय संस्कृति का पता है न इतिहास का। एक घटना की पूँछ पकड़ ली और लगे उछल-कूद मचाने। थोड़ा पढ़-लिख लिया होता तो ऐसी मूर्खता की बात न करते।

अब फटने की बारी मेरी थी। मैंने भी ममता बैनर्जी की मुद्रा अख़्तियार करते हुए कहा-अब इसमें धर्म, संस्कृति और इतिहास कहाँ से आ गया। मामला खेल का है और सट्टबाज़ों द्वारा मैचों के नतीजों को प्रभावित करके दर्शकों के साथ धोखाधड़ी करने का है। आप इसे कहाँ से कहाँ लिए जा रहे हैं। यही नहीं, एक ही साँस में आप सारे पत्रकारों को बेवकूफ़ भी घोषित किए जा रहे हैं। ये तो सरासर ज़्यादती है।

यही तो तुम पत्रकारों के साथ मुश्किल है। दिन-रात जिस तिस के बारे में भी अंट-शंट बोलते रहोगे तब कुछ नहीं और अगर किसी ने एक लाइन कह दी तो मिर्ची लग जाती है। शुक्र है तुमने इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला नहीं बताया, वर्ना पत्रकारों का अगला क़दम यही होता है। ख़ैर अब धीरज धारण कर ध्यान से ज्ञानवाणी सुनो- आईपीएल में जो हुआ केवल वही फिक्स नहीं था, बल्कि दुनिया भर में जो कुछ हो रहा है, वह सब फिक्स है।

मैं इस गुगली से अवाक था। समझने की कोशिश करने लगा कि आख़िरकार आचार्य सत्यवचन कहना क्या चाह रहे हैं। मेरी भौचक मुखमुद्रा को देखकर वे प्रसन्न हो गए और प्रफुल्लित होकर बोले- तुम्हारी ये मुद्रा ही बताती है कि तुमने शास्त्रों का अध्ययन नहीं किया है इसलिए तुम ज्ञानशून्य हो। अच्छा ये बताओ ग्रह, नक्षत्र, तारे, पृथ्वी सबकी गति, दिशा आदि तय है या नहीं?

मैंने कहा है।

यानी वे सब फिक्स हैं। इसी तरह से दिन-रात और ऋतु परिवर्तन भी फिक्स हैं? मैंने दबी आवाज़ में कहा हाँ।

तुम ये भी जानते होगे कि हर प्राणी का प्रारब्ध निश्चित है, उसी के अनुसार उनकी जीवनचर्या पूरी होती है। वे अपने भाग्य से बँधे होते हैं और उनके कर्म पहले से फिक्स होते हैं?

मैं इसे नहीं मानता। भाग्य वगैरा कुछ नहीं होता। मनुष्य अपना भाग्य खुद बनाता है।

आचार्य कुपित होकर बोले-ये तुम नहीं तुम्हारा अहंकार बोल रहा है। ये अटल सत्य है कि इस नश्वर संसार मे सब कुछ फिक्स है। हर प्राणी उसी फिक्सिंग के हिसाब से काम करता है। श्रीसंत, मयप्पन या श्रीनिवासन किसी की क्या बिसात कि वे अपनी मर्ज़ी से कुछ फिक्स कर लें। वे जो कर रहे हैं उस…ऊपर की ओर देखते हुए कहा…महाफिक्सर के आदेश पर कर रहे हैं। वह नहीं चाहेगा, तो इस संसार में एक पत्ता भी नहीं खड़केगा।

देखिए आप फालतू की बात कर रहे हैं…ये नियतिवादी, पुराणपंथी तर्क मैं बहुत सुन चुका हूँ। आपकी मानें तो किसी का कोई दोष ही नहीं है, क्योंकि वे सब तो आपके महाफिक्सर के आदेश पर कर रहे हैं।

दोष उनका अगर है तो उनकी सज़ा भी फिक्स की जा चुकी है। अगर महाफिक्सर ने किसी को दोषमुक्त माना है तो कोई भी उसका कुछ नहीं कर सकता।

आपके कहने का मतलब है कि कोई कुछ न बोले, कुछ न करे। जिसकी जो मर्ज़ी आए करे, क्योंकि आपके महाफिक्सर की यही इच्छा है।

नहीं ज़रूर करो….मगर मत भूलो कि तुम लोग भी जो कर रहे हो वह भी उसी की मर्ज़ी से हो रहा है। ये अखिल ब्रम्हांड उस महाफिक्सर के लिए आईपीएल जैसा ही तो है। वह खेलता रहता है, खिलाता रहता है। उसे सारे मैचों के परिणाम पहले से पता होते हैं क्योंकि उसी ने तो उन्हें फिक्स किया है।

वे गीता का पाठ पढ़ाने ही वाले थे कि मेरा धैर्य चुक गया। उन्होंने यदा यदा हि धर्मस्य उच्चारा ही था कि मैंने बोल पड़ा- अब आप ये कहेंगे कि जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होगी प्रभु अवतार लेंगे और जो कुछ होगा उन्हीं के करने से होगा, क्योंकि वह भी फिक्स है? आचार्य जी ने मुस्कराते हुए सहमति दर्शाई।

मैंने चिढ़ाते हुए कहा-क्या इस फिक्सर मंडली में ब्रम्हा, विष्णु, महेश, इंद्र आदि शामिल हैं? हर प्राणी के के कर्मों का बही-खाता रखने वाले चित्रगुप्त भी फिक्सिंग में हाथ बँटाते होंगें

आचार्य की भृकुटियाँ तनने लगीं और गौर वर्ण लाल होने लगा। मैंने विदा लेने के अंदाज़ में उठते हुए कहा-महाराज असली महाफिक्सर तो कुबेर हैं और वे ऊपर नहीं इसी पृथ्वीलोक में विराजमान हैं। ये कुबेर मंडली सब कुछ फिक्स कर रही है। इसने धर्म, समाज, राजनीति, अर्थशास्त्र सबको फिक्स कर दिया है और क्षमा कीजिएगा, आप जो कुछ कह रहे हैं वह भी उन्हीं की फिक्सिंग का परिणाम है। शास्त्रों और पुराणों से फुरसत मिले तो इस पर ज़रा विचार कीजिएगा, आपका ज्ञानवर्धन होगा….चलता हूँ…..नमस्कार।

लेखक मुकेश कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं और कई चैनलों के एडिटर इन चीफ रह चुके हैं.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...