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अदम गोंडवी के परिवार के लिए मदद जुटाता एक जिलाधिकारी

साहित्य और शायरी को नयी पहचान दिलाने वाले जाने-माने शायर और जनकवि रामनाथ सिंह उर्फ़ अदम गोंडवी लम्बी बीमारी के बाद अब हमारे बीच नहीं हैं. गोंडवी साहब के जाने के बाद भी उनका परिवार क़र्ज़ में डूबा हुआ है. उनके जाने के बाद उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा हुआ है, जो काबिलेतारीफ है. साहित्य को पालने वालों में शुमार अदम साहब के परिवार को आज साहित्य शाधकों और महान शायर गोंडवी के शब्दों को आत्मसात करने वालों से आर्थिक मदद की दरकार है, जो उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि साबित हो सकती है.

साहित्य और शायरी को नयी पहचान दिलाने वाले जाने-माने शायर और जनकवि रामनाथ सिंह उर्फ़ अदम गोंडवी लम्बी बीमारी के बाद अब हमारे बीच नहीं हैं. गोंडवी साहब के जाने के बाद भी उनका परिवार क़र्ज़ में डूबा हुआ है. उनके जाने के बाद उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा हुआ है, जो काबिलेतारीफ है. साहित्य को पालने वालों में शुमार अदम साहब के परिवार को आज साहित्य शाधकों और महान शायर गोंडवी के शब्दों को आत्मसात करने वालों से आर्थिक मदद की दरकार है, जो उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि साबित हो सकती है.

यह सहयोग 1 रुपये से लेकर लाखों रुपए के रूप में हो सकता है. मैं आपको बताना चाहता हूँ, गोंडवी साहब ने अपनी गरीबी को जानते हुए भी अपने भतीजे दिलीप सिंह को सख्त हिदायत दी थी, मेरे इलाज़ के लिए किसी से सहयोग लेने के लिए अपनी तरफ से मत कहना. ऐसे थे हमारे अदम गोंडवी साहब. कहते हैं बूंद-बूंद से घड़ा भरता है. लोगों का छोटा सहयोग भी बड़ा मायने रखता है. हम सब मिलकर अपने जनकवि गोंडवी साहब के परिवार को मदद देकर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं.

सहयोग के लिए गोंडवी साहब के भतीजे दिलीप सिंह जी से ०९९५८२५३७०८ (09958253708) से संपर्क कर सकते हैं, या गोंडवी साहब के अकाउंट नंबर में सीधे धनराशि जमा कर सकते हैं. अकाउंट नंबर है- अदम गोंडवी ३१०९५६२२२८३ (31095622283), स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, पारसपुर ब्रांच. आप मदद के लिए गोंडा के जिलाधिकारी रामबहादुर जी से भी संपर्क कर सकते हैं. ये वही इंसान हैं जिन्होंने साहित्य साधकों से लेकर आम आदमी तक सभी से अदम साहब के परिवार को मदद करने के लिए विनम्र अपील की है. जरुरतमंदों के दर्द को समझने वाले ऐसे जिलाधिकारियों की संख्या नाममात्र ही है. रामबहादुर जी का नंबर ०९४५४४१७५३७ (09454417537) है.

अंत में गोंडवी साहब के शब्दों से अपनी गुजारिस को मजबूती देना चाहता हूँ—
"काजू भुनी प्लेट में विस्‍की ग्लास में/ उतरा है रामराज विधायक निवास में".

रोहिताश्‍व मिश्रा

पत्रकार

दिल्‍ली

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
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