Amar Nath Jha : खुर्शीद अनवर को निजी तौर पर जनता नहीं था…. हाँ एक-आध जगह गाहे-बगाहे मुलाक़ात हुई थी, उनका फोटो देखने के बाद ऐसा लगता है। उनके स्वतंत्र जीवन और मुक्त आहार-विहार के किस्से कभी-कभी विश्वविद्यालय में उनको जानने वाले लोगों से सुनता जरूर था। लेकिन हाल के दिनों मे जनसत्ता मे आ रहे उनके लेख काफी प्रभावित कर रहे थे।
वे इस्लाम और हिन्दुत्व — दोनों तरह की कट्टरता के खिलाफ थे और बेखौफ लिख रहे थे। पहले हमलोगों को ये शिकायत रहती थी कि जिस तरह बहुत से लोग हिन्दू कट्टरता के खिलाफ लिखते हुये कभी इस बात को तवज्जो नहीं देते हैं की उनका निजी धर्म हिन्दू है, उस तरह के बेखौफ लेखक मुस्लिम बीरदारी से क्यों नहीं आ रहे हैं….खासकर हिन्दी मे लिखने के लिए। खुर्शीद अनवर ने उस कमी को पूरी कर दी थी। वे अंदर से इस्लाम की कट्टरता से लड़ रहे थे… कम से कम अपने लेखों की मार्फत।
अचानक जब फेसबुक पर उनकी अत्महत्या की खबर आ रही है तो बेहद तकलीफ हो रही है। बलात्कार सभ्य मनुष्य द्वारा किया गया जघन्यतम अपराध है, ऐसा मानने मे मुझे कोई ऐतराज नहीं। परंतु जैसा कि काफी लोग लिख-कह रहे हैं की बिना किसी आरोप के मीडिया ट्रायल का क्या खतरनाक हादसा हो सकता है इसका जीता-जागता नमूना उनकी अत्महत्या है। अब बलत्कार और यौन–शोषण जैसे संगीन मामले की गंभीरता को बचाए रखने के लिए जरूरी है कि कम से कम ऐसी खबरों कि तह मे गए बगैर मीडिया को इसे भड़काऊ अंदाज मे नहीं बेचना चाहिए…. बल्कि ऐसे तथाकथित पत्रकारों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। अनजाने प्रशंसक की खुर्शीद अनवर को श्रद्धांजलि।
अमर नाथ झा की फेसबुक पर टिप्पणी.






