: बनारस में भुअरा गैंग के भविष्य को लेकर चर्चा-ए-आम : बनारस और पेड न्यूज में बहुत गहरा याराना है. अखबरों में खबरें मैनेज ना हो या पेड न्यूज ना छपे यह संभव ही नहीं है. यहां हर अखबार में ऐसे लोगों का एक मजबूत सिंडिकेट तैनात है, जो खबरों को मैनेज करने से लेकर मेनूपुलेट करने का काम करता है. खासकर पेड न्यूज के मामले को लेकर बनारस में सबसे ज्यादा हिंदुस्तान और दैनिक जागरण ही बदनाम हैं. इन दोनों ही अखबारों में एक बड़ा सिंडिकेट है, जो इस काम को प्रोफेशनल तरीके से अंजाम देता है.
इस सिंडिकेट का काम ही है खबरों से पैसे का खेल खेलना. पर खेल खेलने में माहिर हिंदुस्तानी इस बार फंस गए हैं. मामला हाईकमान तक पहुंच जाने के बाद इन लोगों को लेने के देने पड़ रहे हैं. प्रधान संपादक शशि शेखर ने पेड न्यूज के खिलाफ घोषित अभियान चला रखा है. हालांकि अंदरखाने कुछ दूसरे तरीके से पेड न्यूज के पैकेज की खबरें भी आ रही हैं, पर निर्वाचन आयोग के डंडे के चलते सारे अखबार पेड न्यूज नहीं छपने से परेशान हैं तो प्रत्याशी भी निर्वाचन आयोग की धन्यवाद दे रहे हैं. पत्रकार अब उन्हें उस तरह से विज्ञापन और खबर के लिए पैसा देने को नहीं कह रहे हैं, जैसा बीते लोकसभा चुनाव में डंडा कर रखा था.
इस बार प्रधान संपादक एवं चुनाव आयोग के चलते इस सिंडिकेट की चल नहीं पा रही थी. विज्ञापन देकर कोई प्रत्याशी फंसना नहीं चाह रहा है, लिहाजा इन लोगों की सारी कमाई प्रभावित हो रही है. सूत्र बताते हैं कि चंदौली के सैयदराजा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे माफिया बृजेश सिंह वाली खबर को भी मैनेज किया गया था. चंदौली से यह बात छनकर आ रही है कि बृजेश सिंह एंड कंपनी ने नामांकन एवं सभा से पहले पैसा लेकर सभी अखबारों के दफ्तर पहुंचे थे, पर चुनाव आयोग की कड़ाई के चलते सब लोगों ने पैसा थामने से इनकार कर दिया था. सूत्र बताते हैं कि हिंदुस्तान से एमएम रहमान, संतोष सिंह एवं मनीष कुमार ने दो लाख रुपये के विज्ञापन की डील की थी, पर प्रबंधन ने बृजेश का विज्ञापन छापने से इनकार कर दिया.
बताया जा रहा है कि डील खतम होने के बाद एमएम रहमान ने अपने खास तथा पूर्व ब्यूरोचीफ आनंद सिंह से बात की. कहा जा रहा है कि आनंद सिंह ने उपर बात की. सारी चीजें तय हो जाने के बाद खबर को तानकर लगाने की डील हुई. कहा जा रहा है कि इसके लिए बृजेश एंड कंपनी ने एक लाख रुपये की डील फाइनल की. इसके बाद आनंद सिंह भी कमालपुर पहुंचे. स्थानीय प्रतिनिधि जमील खां के होने के बाद भी खबर आनंद सिंह एवं एमएम रहमान के निर्देशन में तैयार की गई. तैयार खबर को मुगलसराय ब्यूरो कार्यालय भेज दिया गया. हालांकि सूत्र बताते हैं कि खबर में थोड़ी-बहुत कांट-छांट कर अनूप कर्णवाल ने बनारस भेज दिया. उन्होंने खबर के साथ नोट भी लिखा कि इस पर विशेष ध्यान दें पेड न्यूज जैसी खबर है. इसे किल भी किया जा सकता है. दूसरी तरफ एमएम रहमान इस तरह की किसी भी बात तथा आरोप से इनकार करते हैं. उनका कहना है कि माफिया की खबर या विज्ञापन हम नहीं छाप रहे हैं. विज्ञापन या किसी मद में पैसा नहीं लिया गया है.
इसके पीछे कारण बताया जा रहा है कि अनूप जब से ब्यूरोचीफ बने हैं उन्हें पुराने लोग पचा नहीं पा रहे हैं. पुराने ब्यूरोचीफ एवं मुगलसराय में तैनात कुमार अशोक अपनी हर खबर को लेकर पूछताछ करते रहते हैं. विवादों से बचने के लिए अनूप एंड कंपनी उन लोगों की खबरों में ज्यादा काट-छांट नहीं करती है. इस बार भी ऐसा ही हो गया, पर इस बार मेहरबानी दिखाना अनूप को भारी पड़ गया. खबर बनारस पहुंची, अपकंट्री इंचार्ज आदर्श शुक्ला के छुट्टी पर होने के चलते चंदौली पेज देखने वाले आलोक राय ने खबर सिटी इंचार्ज रतन सिंह को दिखाई. रतन ने खबर को छोटा करने तथा अनिल मिश्रा से पूछ लेने को कहा. अनिल मिश्रा ने आलोक राय को खबर तानकर छापने को कह दिया. सूत्र बताते हैं कि अनिल मिश्रा ने सिटी पर भी खबर लगाने के लिए योगेश को कहा, पर योगेश ने स्थान खाली ना होने की बात कह कर खबर से पल्ला झाड़ लिया. बताया जा रहा है कि इसके बाद पूर्वांचल पेज पर भी खबर भेजने के निर्देश मिश्रा जी ने दिए, पर पेज फाइनल होने के चलते बात नहीं बन पाई.
खबर छपने के दूसरे ही दिन हिंदुस्तान में हड़कम्प मच गया. पूछा-ताछी शुरू हुई. गनीमत यह रही कि जिस दिन यह खबर प्रकाशित हुई उस दिन संपादक अनिल भास्कर दिल्ली में थे, लिहाजा उनके उपर किसी तरह का आरोप नहीं लगा. मामले में नवीन जोशी के निर्देश पर संपादक ने अनिल मिश्रा, रतन सिंह, आलोक राय एवं अनूप कर्णवाल को फोर्स लीव पर भेज दिया तथा जांच शुरू करा दी. सभी लोगों से घंटों इंट्रोगेट किया गया. सूत्र बताते हैं कि संपादक अनिल भास्कर ने अपनी रिपोर्ट नवीन जोशी को भेज दी है. इसमें अनिल मिश्रा को बचाने की कोशिश किए जाने की बात कही जा रही है, जबकि सबसे ज्यादा जिम्मेदारी उन्हीं की बनती है. इधर, एक सवाल यह भी खड़ा हो गया है कि इस मामले में एमएम रहमान एंड कंपनी से कोई पूछताछ नहीं की गई है. किसी तरह की पूछताछ न करना एक सवाल तो खड़ा करता ही है. बताया जा रहा है कि अनिल मिश्रा के अलावा रतन सिंह, आलोक एवं अनूप को बलि का बकरा बनाया जाएगा.
इससे एक तीर से कई शिकार हो जाएंगे. अनिल मिश्रा के पुराने दुश्मन माने जाने वाले रतन सिंह के खिलाफ कोई भी कार्रवाई होती है तो अनिल मिश्रा एंड कंपनी मजबूत होगी, अनूप कर्णवाल के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाती है तो आनंद सिंह एंड कंपनी मजबूत होगी. आलोक राय के आगे नाथ ना पीछे पगहा है तो माना जा रहा है कि बेचारे सबसे निरीह बकरा वो ही हैं, उनकी ही बलि ली जाएगी. बाकी दो का तबादला करके मामले को सलटाए जाने की खबरें आ रही हैं. पर जिस तरह मामला प्रधान संपादक तक पहुंचा है तो सब कुछ इतना आसान भी नहीं है. कहा जा रहा है कि बनारस में पले-बढ़े शशि शेखर यहां की रग-रग से वाकिफ हैं इसलिए इसबार अनिल मिश्रा एंड कंपनी को झटका लग सकता है. हालांकि संपादक अनिल भास्कर उनको बचाने की पूरी कोशिश में लगे हुए हैं.
अगर आपको याद हो तो बीते लोकसभा चुनावों में दैनिक जागरण और हिंदुस्तान दोनों ने पेड न्यूज की गंध मचा रखी थी. इतनी खबरें और विज्ञापन मैनेज हुए कि इन दोनों अखबारों की छीछालेदर होने लगी. जागरण में पेड न्यूज की कमान बीरेंद्र कुमार एवं राघवेंद्र चड्ढा ने संभाल रखी थी तो हिंदुस्तान में अनिल मिश्रा के पास ये जिम्मेदारी थी. दोनों हाथों से पैसे लूटे जा रहे थे. कुछ कंपनी को फायदा हो रहा था तो कुछ अपनी जेब में जा रहा था. पूर्वांचल के सारे जिलों में बाहुबली तथा माफिया टाइप लोगों के विज्ञापन और खबरें धड़ाधड़ अखबारों में प्रकाशित हो रही थी. चंदौली में तो एमएम रहमान एंड कंपनी ने भासपा प्रत्याशी तुलसी सिंह की इतनी पेड न्यूज पैसे के बल पर छपवाई कि उन्हें दूसरे दिन स्पष्टीकरण छापकर पाठकों से माफी मांगनी पड़ी थी. वो तो भला हो चुनाव आयोग का, जिसके चलते इस बार प्रत्याशी से लेकर पाठक वर्ग तक चैन और सुकून की सांस ले रहा है. खैर अब बनारस में चाय की अड़ी पर पत्रकार बिरादरी में इस बात को लेकर चर्चा है कि अब भूअरा गैंग का क्या होगा. बहरहाल आप भी इंतजार करिए और देखिए न्याय की कसौटी पर पेड न्यूज की कहानी.
भड़ास के कंटेंट एडिटर अनिल सिंह की रिपोर्ट.






