भड़ास4मीडिया पर कानाफूसी कालम में जनसंदेश टाइम्स अखबार के गीता प्रेस वालों को बेचे जाने की चर्चा पढ़ी. इस गासिप में कुछ गड़बड़ियां हैं. सच्चाई ये है कि गीता प्रेस वालों ने जनसंदेश टाइम्स को नहीं खरीदा है. अनुज पोद्दार जो जनसंदेश टाइम्स के एमडी बने हैं, वह गीता प्रेस से किसी रूप में नहीं जुड़े हैं. नाम में सिर्फ पोद्दार लग जाने से कोई गीता प्रेस का नहीं हो जाता. गीता प्रेस का संचालन ट्रस्ट के जरिए किया जाता है जिसका मुख्यालय कोलकाता में है.
कल्याण मैग्जीन का प्रकाशन गीता प्रेस के माध्यम से होता है और सिर्फ धार्मिक किताबों से ही गीता प्रेस का नाता है. जिस अनुज पोद्दार का जिक्र किया गया है, वह गोरखपुर और बार्डर एरिया में कई तरह के कामकाज को संचालित करता रहा है. पोल्ट्री फार्म, डेयरी आदि के काम करने वाले इन सज्जन के बारे में जानकारी है कि इनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि यह अखबार को खरीद सकें.
संभव है, बाबूलाल कुशवाहा ने अपने नाम से अखबार का संचालन न दिखाकर ऐसे लोगों के नाम से दिखाना शुरू कर दिया हो जो उनके अधीन बने रहें और आर्थिक रूप से बहुत मजबूत भी न हों. सच्चाई क्या है, इसका पता छानबीन के बाद ही पता चल सकेगा. लेकिन मुझे इतना पता है कि अनुज पोद्दार और उनके परिवार की कभी ऐसी हैसियत नहीं रही है कि वह अखबार खरीद सकें.
गोरखपुर से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.






