बहुत बहुत बधाई भड़ास और उनकी पूरी टीम को. जिंदगी का सफ़र आसान नहीं होता. किसी भी रास्ते को खुद बनाना मुश्किल होता है.उस रास्ते पर चल कर अपनी सबसे बड़ी ऊचाई पर पहुचना उससे भी मुश्किल होता है. पर सबसे ज्यादा मुश्किल उस जगह पर खुद को बनाये रखना होता है. भड़ास का सबसे बड़ी ऊचाई पर पहुचना इतना मुश्किल भरा नहीं था क्योंकि भाई यशवंत जी ने जो तेवर अपनाये थे उससे उन्हें सबसे ऊपर पहुचना ही था. मगर चार साल तक उस ऊचाई पर बने रहना सबसे मुश्किल काम होता है. और यह काम तभी हो सकता है जब आदमी अपने काम को जूनून की हद तक करने की ठान ले.यशवंत ने भड़ास को अपना जुनून बना लिया. फिर जब आदमी अपने काम में अपनी आत्मा को भी जोड़ ले तो उसके नतीजे तो सबसे बेहतर होने ही होते है.
मैं यह भी मानता हूँ कि अगर आप जिंदगी में ईमानदार हैं तो सफलता आपको मिलनी ही है. और ईमानदारी का पहला सबक किसी दूसरे से शुरू नहीं होता. ईमानदारी सिर्फ और सिर्फ खुद से शुरू होती है. और यह आसान भी नहीं है. खुद से आदमी झूठ नहीं बोल सकता. मुझे लगता है कि यशवंत जी के इस मुकाम तक पहुचने की एक बड़ी बजह यह भी है कि बो खुद के प्रति बेहद ईमानदार है. चार्ली चैप्लिन ने कहा था कि खुद पर हंसना सबसे मुश्किल काम होता है. अपनी ही साईट पर अपने खिलाफ लिखा हुआ छापना सबसे बड़ा काम होता है. पर यह यशवंत जी के ही बस का था. ईश्वर से कामना है कि यशवंत जी के यह तेवर बनाये रखे.बहुत बहुत बधाई भड़ास की पूरी टीम को और खास तौर पर यशवंत जी को.
संजय शर्मा
संपादक
वीक एंड टाइम्स.
लखनऊ
09452095094
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