मुंबई : सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय और समूह के तीन अन्य शीर्ष अधिकारी बुधवार को सेबी के समक्ष पेश हुए। यह मामला तीन करोड़ से ज्यादा निवेशकों को करीब 24,000 करोड़ रुपये की राशि लौटाए जाने का है। सेबी ने सुब्रत रॉय और सहारा के तीन अन्य निदेशकों को निजी तौर पर पेश होने का निर्देश दिया था, ताकि वह उनकी व्यक्तिगत और कंपनियों की संपत्तियों और निवेश के ब्योरे की जांच कर सके। सहारा समूह के अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि रॉय और दूसरे अधिकारी आज सेबी के सामने हाजिर होंगे या नहीं।
सेबी ने 26 मार्च को जारी अपने आदेश में उन्हें व्यक्तिगत तौर पर हाजिर होने के निर्देश दिए। इसी आदेश में सहारा की दो कंपनियों और उनके चार शीर्ष कार्यकारियों से 8 अप्रैल तक बाजार नियामक को अपनी संपत्तियों और निवेश का ब्योरा देने के लिए कहा था। यह पता नहीं चल सका है कि आदेश के मुताबिक इन लोगों ने सेबी के समक्ष संपत्तियों के ब्योरे सौंपे हैं या नहीं।
सुब्रत रॉय और उनके समूह के अन्य अधिकारियों को सेबी के पूर्णकालिक सदस्य प्रशांत शरण के सामने पेश होने के लिए कहा गया था। इन अन्य अधिकारियों में अशोक राय चौधरी, रवि शंकर दुबे और वंदना भार्गव के नाम हैं। नियामक ने कहा कि यदि ये लोग आदेश के मुताबिक सेबी के सामने पेश नहीं हो पाते, तो सेबी उनकी अनुपस्थिति में ही उनकी और उनकी कंपनियों की परिसंपत्तियों की नीलामी की शर्तों का निर्धारण कर सकता है।
सहारा समूह ने समाचार पत्रों को जारी विज्ञापनों समेत विभिन्न माध्यमों से सेबी और इसके उच्चाधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय और अन्य को मिलकर अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दे रहे हैं। संयोग से प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (सैट) भी इसी सप्ताह 13 अप्रैल को सेबी के आदेश के खिलाफ सुब्रत रॉय और अन्य द्वारा दायर अपीलों पर सुनवाई करने वाला है।
इन अपीलों में इन व्यक्तियों ने अपने बैंक खातों, परिसंपत्तियों और निवेश को कुर्क करने के सेबी के पहले के आदेश को चुनौती दी है। इन परिसंपत्तियों में सहारा समूह का पुणे के करीब विकसित एम्बे वैली रिजॉर्ट, दिल्ली, मुंबई और देश में कुछ अन्य जगहों की जमीन-जायदाद, शेयर, म्यूचुअल फंड और अन्य प्रकार के निवेश शामिल हैं। (एनडीटीवी)






