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अपने पत्रकार को छोड़ने की अपील के साथ चीनी अख़बार ने लिखा- ‘हमारा अख़बार छोटा है लेकिन हमारी रीढ़ की हड्डी सलामत है’

चीन में एक अख़बार ने पुलिस से अपने एक पत्रकार को छोडऩे की अपील अख़बार के पहले पन्ने पर की है. चीन के गुआंशू प्रांत स्थित इस अख़बार ने अपने पत्रकार चेन यॉन्गशू को रिहा किए जाने की मांग की है. चेन को पिछले हफ़्ते पुलिस ने पकड़ा था. अख़बार का कहना है कि उनकी गिरफ़्तारी हन्नान प्रांत में एक सरकारी कंपनी के बारे में रिपोर्ट के सिलसिले में हुई है. पुलिस ने भी इस बात की पुष्टि की है कि चेन को 'कंपनी के व्यवसाय को नुकसान' पहुंचाने के चलते गिरफ़्तार किया गया है.

चीन में एक अख़बार ने पुलिस से अपने एक पत्रकार को छोडऩे की अपील अख़बार के पहले पन्ने पर की है. चीन के गुआंशू प्रांत स्थित इस अख़बार ने अपने पत्रकार चेन यॉन्गशू को रिहा किए जाने की मांग की है. चेन को पिछले हफ़्ते पुलिस ने पकड़ा था. अख़बार का कहना है कि उनकी गिरफ़्तारी हन्नान प्रांत में एक सरकारी कंपनी के बारे में रिपोर्ट के सिलसिले में हुई है. पुलिस ने भी इस बात की पुष्टि की है कि चेन को 'कंपनी के व्यवसाय को नुकसान' पहुंचाने के चलते गिरफ़्तार किया गया है.

इस साल की शुरुआत में चेन ने ज़ूमलियन कंपनी के बारे में कई रिपोर्ट प्रकाशित की. इस कंपनी में हन्नान प्रांत की सरकार की हिस्सेदारी है. इसके बाद ज़ूमलियन ने एक बयान जारी कर कहा कि चेन की रिपोर्ट में ग़लत जानकारी के चलते उसके शेयर भाव गिर गए हैं. कंपनी ने रिपोर्ट में किए गए दावों को ‘ग़लत’, ‘आधारहीन’ और ‘भ्रामक’ बताया.

'द न्यू एक्सप्रेस' ने बड़े बड़े अक्षरों में पहले पन्ने पर सुर्ख़ी लगाई ‘कृपया उसे छोड़ दें.’ अख़बार का कहना है कि वह अब तक ख़ामोश इस वजह से था कि 19 अक्तूबर को गिरफ़्तार किए गए चेन के साथ कहीं दुर्व्यवहार ना किया जाए. संपादकीय कहता है कि ‘‘हमें लगता था कि जब तक हम ज़िम्मेदार रिपोर्टिंग कर रहे हैं तब तक हमें कुछ नहीं होगा. अगर कोई दिक़्क़त आएगी तब भी हम भूल-सुधार या माफ़ीनामा प्रकाशित कर सकते हैं. इससे बढ़कर अगर स्थिति ज़्यादा ही गंभीर हो जाए या हम कोर्ट केस हार जाएं तो पैसे दे देंगे या अख़बार बंद कर देंगे.’’

अख़बार आगे लिखता है कि ''सच ये है कि हम बहुत भोले हैं. चेन को वक़ील की सुविधा मिलने से पहले तीन दिन और तीन रातें जेल में बितानी पड़ीं.’’ बीबीसी संवाददाता जॉन सडवर्थ का कहना है कि सभी चीनी अख़बारों की तरह न्यू एक्सप्रेस भी कड़े सरकारी नियमों के अंदर काम करता है लेकिन इस अख़बार ने खोजी पत्रकारिता में अपनी एक पहचान कायम कर ली है. अख़बार ने अपने पन्ने पर लिखा है कि ‘‘हमारा अख़बार छोटा है लेकिन हमारी रीढ़ की हड्डी सलामत है. बावजूद इसके हम ग़रीब हैं.’’ हालिया वर्षों में चीन के मीडिया संस्थानों और प्रशासन के बीच झड़पें होती रही हैं. साभार- बीबीसी

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